घग्गर नदी का प्रदूषण गंभीर, हरियाणा के 91 ब्लॉक अति-दोहित, फिर भी ठोस कार्ययोजना नहीं : कुमारी सैलजा

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के जवाब से उजागर हुई जल प्रबंधन की गंभीर स्थिति, घग्गर के पंजाब और हरियाणा स्थित हिस्से सर्वाधिक प्रदूषित श्रेणी में शामिल

कहा- किसानों को सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा, बाढ़ से फसलें बर्बाद हो रही हैं और सरकारें जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रही हैं, केंद्र और प्रदेश सरकार तत्काल संयुक्त कार्ययोजना बनाएं

चंडीगढ़/सिरसा, 20 अक्टूबर। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सी डब्ल्यूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा हरियाणा के जल संकट, घग्गर नदी के प्रदूषण, बाढ़ नियंत्रण तथा किसानों की सिंचाई संबंधी समस्याओं पर दिए गए जवाब को बेहद चिंताजनक बताया है। सांसद ने कहा कि मंत्रालय के 19 अक्टूबर 2026 के आधिकारिक जवाब ने स्पष्ट कर दिया है कि हरियाणा में जल प्रबंधन की स्थिति गंभीर है, लेकिन किसानों और आम जनता को राहत पहुंचाने के लिए अभी तक अपेक्षित ठोस एवं समयबद्ध कार्ययोजना सामने नहीं आई है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के समक्ष हरियाणा से संबंधित दस महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए थे। इनमें यमुना-घग्गर नदी लिंक परियोजना, घग्गर को प्रदूषणमुक्त करना, नदी के तटबंधों की मजबूती, गाद की सफाई, नहरों का आधुनिकीकरण, टेल तक सिंचाई का पानी पहुंचाना, भूजल संरक्षण तथा केंद्र-राज्य संयुक्त जल प्रबंधन योजना प्रमुख थे। कुमारी सैलजा ने कहा कि केंद्रीय मंत्रालय ने अपने जवाब में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए स्वीकार किया है कि घग्गर नदी के दो प्रदूषित हिस्से, एक पंजाब और दूसरा हरियाणा में, सर्वाधिक गंभीर ‘प्राथमिकता-एक’ श्रेणी में आते हैं। यह स्थिति घग्गर नदी के पर्यावरण और आसपास रहने वाले लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

सांसद ने कहा कि नदी में औद्योगिक अपशिष्ट, सीवरेज और अन्य दूषित पानी का प्रवाह रोकने के लिए पंजाब में 57.10 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत परियोजनाओं और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का उल्लेख किया गया है, लेकिन हरियाणा में घग्गर के प्रदूषित हिस्से के लिए किसी विशिष्ट स्वीकृत परियोजना या निर्धारित समयसीमा की जानकारी जवाब में नहीं दी गई। कुमारी सैलजा ने सवाल उठाया कि जब घग्गर का प्रदूषण इतना गंभीर है तो केंद्र और हरियाणा सरकार इसे प्रदूषणमुक्त करने के लिए विशेष कार्ययोजना क्यों नहीं बना रही हैं? उन्होंने नदी में गिरने वाले प्रदूषित पानी की नियमित जांच, औद्योगिक इकाइयों की जवाबदेही और प्रभावी सीवेज शोधन व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।

घग्गर के तटबंधों की मजबूती में देरी से किसानों की चिंता बढ़ी

कुमारी सैलजा ने कहा कि घग्गर नदी के कमजोर तटबंधों के कारण सिरसा और फतेहाबाद सहित अनेक क्षेत्रों के किसानों को मानसून के दौरान बाढ़ का खतरा बना रहता है। केंद्रीय मंत्रालय के जवाब के अनुसार, घग्गर की बाढ़ समस्या पर अध्ययन और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद दोनों राज्यों की ओर से प्रस्तुत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट निर्धारित तकनीकी सिफारिशों के अनुरूप नहीं पाई गईं। संशोधित मॉडल अध्ययन की प्रक्रिया अभी भी जारी है।

सांसद ने कहा कि किसानों की फसलों और ग्रामीण आबादी की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर वर्षों तक केवल अध्ययन और बैठकों का सिलसिला चलते रहना स्वीकार्य नहीं है। केंद्र तथा राज्य सरकारों को कमजोर तटबंधों की पहचान कर उनकी मरम्मत, मजबूती और आवश्यकतानुसार ऊंचाई बढ़ाने का काम प्राथमिकता से पूरा करना चाहिए।

नहरों की टेल तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी से नहीं बच सकती सरकार

कुमारी सैलजा ने कहा कि सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और पश्चिमी हरियाणा के अनेक गांवों में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त नहरी पानी नहीं मिल पाता। उन्होंने नहरों के अंतिम छोर तक निर्धारित मात्रा में पानी पहुंचाने का मुद्दा उठाया था, लेकिन केंद्रीय मंत्रालय ने इसे राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय बताया है।

सांसद ने कहा कि किसानों को इससे कोई सरोकार नहीं कि जिम्मेदारी किस विभाग या सरकार की है। किसान को समय पर सिंचाई का पानी चाहिए, ताकि उसकी फसल और आजीविका सुरक्षित रह सके। हरियाणा सरकार को नहरों की मरम्मत, आधुनिकीकरण और पानी के समान वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

हरियाणा में 91 ब्लॉक अति-दोहित, भूजल संकट पर तत्काल कार्रवाई जरूरी

कुमारी सैलजा ने कहा कि केंद्रीय मंत्रालय के जवाब में प्रस्तुत भूजल आंकड़े बेहद गंभीर हैं। वर्ष 2025 के आकलन के अनुसार हरियाणा में वार्षिक भूजल पुनर्भरण 10.27 अरब घनमीटर है, जबकि वार्षिक भूजल दोहन 12.72 अरब घनमीटर तक पहुंच चुका है। भूजल दोहन का स्तर 136.75 प्रतिशत है। प्रदेश की 143 आकलन इकाइयों में से 91 अति-दोहित, छह गंभीर और 15 अर्ध-गंभीर श्रेणी में हैं। यह स्थिति भविष्य में कृषि, पेयजल और पर्यावरण के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकती है।

यमुना-घग्गर लिंक परियोजना पर भी ठोस पहल नहीं

कुमारी सैलजा ने कहा कि मानसून के दौरान यमुना के अतिरिक्त पानी को घग्गर से जोड़कर बाढ़ नियंत्रण और पश्चिमी हरियाणा की सिंचाई जरूरतों को पूरा करने की संभावनाओं पर गंभीरता से काम होना चाहिए। लेकिन केंद्रीय मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यमुना-घग्गर लिंक परियोजना का कोई प्रस्ताव तकनीकी-आर्थिक मूल्यांकन के लिए संबंधित केंद्रीय संस्थाओं को प्राप्त नहीं हुआ है। सांसद ने मांग की कि हरियाणा सरकार तत्काल विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की पहल करे और केंद्र सरकार तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराए।

कुमारी सैलजा ने कहा कि घग्गर नदी को प्रदूषणमुक्त करना, किसानों को पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध कराना, बाढ़ से फसलों की सुरक्षा और गिरते भूजल स्तर को रोकना केवल प्रशासनिक मुद्दे नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े सवाल हैं।

उच्चस्तरीय संयुक्त बैठक बुलाकर बजट, जिम्मेदारियां और समयसीमा निर्धारित की जाए

सांसद ने केंद्र और हरियाणा सरकार से मांग की कि घग्गर नदी के प्रदूषण, बाढ़ नियंत्रण, नहरों के आधुनिकीकरण तथा भूजल संरक्षण के लिए तत्काल उच्चस्तरीय संयुक्त बैठक बुलाकर बजट, जिम्मेदारियां और समय सीमा निर्धारित की जाए। सांसद ने कहा कि वे किसानों के अधिकारों, स्वच्छ पर्यावरण और हरियाणा के जल हितों की रक्षा के लिए इन मुद्दों को लगातार उठाती रहेंगी।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

और पढ़ें