बैठक में सड़क विकास, धूल नियंत्रण, सीएंडडी कचरा प्रबंधन और शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा, खुले में कचरा जलाने और निर्माण स्थलों पर धूल फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर
गुरुग्राम, 18 अक्टूबर। गुरुग्राम में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और सड़कों से उड़ने वाली धूल को कम करने के उद्देश्य से नगर निगम गुरुग्राम ने सड़क विकास, यांत्रिक सफाई, पानी के छिड़काव, निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) कचरा प्रबंधन तथा खुले में कचरा जलाने की घटनाओं पर निगरानी को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। निगमायुक्त प्रदीप दहिया की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप चल रहे कार्यों, विभिन्न पोर्टलों पर लंबित शिकायतों और प्रवर्तन कार्रवाई की स्थिति की समीक्षा की गई।
अधिकारियों ने बताया कि सीएक्यूएम के तहत गुरुग्राम में कुल 396 किलोमीटर सड़कों के विकास का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 17 अक्टूबर तक इनमें से 198.74 किलोमीटर सड़कों पर कार्य पूरा किया जा चुका है, दिसंबर माह के अंत तक शेष कार्य भी पूरा कर लिया जायेगा। निगमायुक्त ने विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रमुख सड़कों से धूल हटाने के लिए विशेष अभियान
समीक्षा में प्रमुख सड़कों पर जमा धूल को हटाने के लिए अभियान चलाने की कार्ययोजना पर जोर दिया गया। इसके तहत प्रत्येक जोन को उन सड़कों की पहचान करनी है, जहां धूल हटाने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। संबंधित टीमों को प्रतिदिन किए गए कार्य का विवरण और कार्य से पहले तथा बाद की तस्वीरें प्रस्तुत करने का प्रावधान रखा गया है। मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की रात के समय जांच और निगरानी भी कार्ययोजना का हिस्सा है। सैनिटेशन इंस्पेक्टरों को मशीनों के निर्धारित रूट, काम के घंटे, सफाई के दायरे और सामने आने वाली कमियों की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अतिरिक्त, बागवानी और संबंधित टीमों के माध्यम से लक्षित स्थानों पर पानी के छिड़काव के लिए जोनवार रूट प्लान तैयार करने तथा निगरानी टीम से वास्तविक तैनाती का सत्यापन कराने की कार्ययोजना है। इन गतिविधियों का उद्देश्य सड़क की सतह पर जमा धूल को नियंत्रित करना और वाहनों की आवाजाही से धूल उड़ने की समस्या को कम करना है।
सीएंडडी कचरे के प्रबंधन और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई
निर्माण एवं विध्वंस कचरे के उचित प्रबंधन को प्रदूषण नियंत्रण कार्ययोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। बैठक में निर्माण स्थलों, धूल वाले मार्गों, कचरा डालने के स्थानों और बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान करने पर जोर दिया गया। निर्माण स्थलों पर बैरिकेडिंग, डस्ट स्क्रीन और निर्माण सामग्री के ढेर को ढककर रखने की व्यवस्था की जांच करने, सड़कों के किनारे निर्माण सामग्री के भंडारण को रोकने तथा मलबे के परिवहन में ढके हुए वाहनों के इस्तेमाल का सत्यापन करने जैसे बिंदु शामिल हैं। नालों और सीवरों की सफाई से निकलने वाली गाद को समय पर उठाने तथा उसका उचित निस्तारण सुनिश्चित करने पर भी ध्यान देने की योजना है।
अधिकारियों ने बताया कि 1 अप्रैल से 17 अक्टूबर तक विभिन्न उल्लंघनों के लिए कुल 588 चालान किए गए। इनमें सीएंडडी कचरे से संबंधित 278, बिना ढके निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों के 173, धूल नियंत्रण संबंधी निर्देशों का पालन न करने के 72, धूल नियंत्रण के लिए लगाए गए जुर्माने के 27, कचरा जलाने के 22, खुले में कचरा डालने या फेंकने के 15 और निर्माण कार्य बंद न करने से संबंधित एक चालान शामिल है। इनके आधार पर निर्माण स्थलों और कचरा प्रबंधन से जुड़े नियमों के अनुपालन की निगरानी को और व्यवस्थित करने पर जोर दिया गया।
खुले में कचरा जलाने की घटनाओं पर तत्काल प्रतिक्रिया
खुले में कचरा और बायोमास जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया की व्यवस्था होगी। इसके तहत घटना की सूचना मिलने पर टीम को मौके पर पहुंचकर सुरक्षित तरीके से आग बुझाने और बचे हुए कचरे को उठाने की कार्रवाई करनी होगी। साथ ही, घटना का स्थान, तस्वीरें और जिम्मेदार व्यक्ति या एजेंसी का विवरण दर्ज करने तथा लागू नियमों के तहत कार्रवाई शुरू करने का प्रावधान है। जिन स्थानों पर बार-बार कचरा जलाने की घटनाएं सामने आती हैं, वहां विशेष निगरानी रखने और सैनिटेशन सिक्योरिटी फोर्स (एसएसएफ) की तैनाती करने पर भी जोर दिया गया है। सैनिटेशन कर्मचारियों, आरडब्ल्यूए, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण एजेंसियों और रोड स्वीपिंग एजेंसियों को जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण एवं सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियां चलाने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए है।
दैनिक निगरानी और फोटो सहित रिपोर्टिंग की व्यवस्था
कार्यों की निगरानी के लिए समयबद्ध रिपोर्टिंग व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अनुसार, एक दिन के भीतर प्राथमिकता वाली सड़कों और प्रदूषण संबंधी हॉटस्पॉट की पहचान करने तथा पानी के छिड़काव के रूट तय करने का लक्ष्य रखा गया है। तीन दिनों के भीतर कनिष्ठ अभियंताओं द्वारा वार्डवार निर्माण स्थलों और हॉटस्पॉट की प्रारंभिक सूची तैयार करने तथा 396 किलोमीटर के सड़क विकास लक्ष्य के तहत सड़कवार पेविंग की स्थिति की जांच करने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, फील्ड टीमों और कनिष्ठ अभियंताओं को प्रतिदिन शाम 5 बजे तक जांचे गए स्थलों, नियमों के उल्लंघन, जारी चालानों और कचरा जलाने की घटनाओं का विवरण प्रस्तुत करना होगा। कार्यों के सत्यापन के लिए जियोटैग की गई पहले और बाद की तस्वीरें, लंबित कार्रवाई तथा बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है। अगली समीक्षा में तय लक्ष्यों और समयसीमा के मुकाबले प्रगति की जांच करने तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय से जुड़े अनसुलझे मामलों को उच्च स्तर पर उठाने का प्रस्ताव है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए समन्वित प्रयासों पर जोर
निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि नगर निगम की इस समीक्षा का मुख्य फोकस सड़क विकास के निर्धारित लक्ष्यों को आगे बढ़ाने, सड़कों से धूल हटाने, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, सीएंडडी कचरे के उचित निस्तारण, खुले में कचरा जलाने की घटनाओं पर रोक और शिकायतों के समयबद्ध समाधान है। इन कार्यों की प्रभावी निगरानी के लिए जोनवार जिम्मेदारियां, नियमित फील्ड निरीक्षण, फोटो आधारित रिपोर्टिंग और उल्लंघनों पर कार्रवाई की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। सड़क विकास, स्वच्छता, बागवानी और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण संबंधी लक्ष्यों की प्रगति पर नजर रखने की दिशा में यह महत्वपूर्ण है।







