कुवि के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने दी बधाई, औषधीय एवं जैव-अणुक रसायन विज्ञान में शोध को मिली पहचान
कुरुक्षेत्र, 17 अक्टूबर (प्रमोद कौशिक)। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापिका एवं इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज की निदेशिका प्रो. नीरा राघव को विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है। विश्वविद्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और एल्सेवियर से संबद्ध इस सूची में उन्हें रसायन विज्ञान, विशेष रूप से औषधीय एवं जैव-अणुक रसायन विज्ञान के क्षेत्रों में शोध योगदान के लिए शामिल किया गया है।
इस उपलब्धि पर कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा, कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल तथा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज के डीन प्रो. जितेंद्र शर्मा ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि प्रो. नीरा राघव की यह उपलब्धि पूरे विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की सूची में स्थान मिलना उनके उत्कृष्ट शोध, निरंतर वैज्ञानिक प्रयासों और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान की पहचान है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय में उच्चस्तरीय शोध को प्रोत्साहन मिलेगा और युवा शोधार्थी भी प्रेरित होंगे।
कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल ने कहा कि यह उपलब्धि प्रो. राघव के वर्षों के परिश्रम, शोध के प्रति समर्पण और अकादमिक उत्कृष्टता का परिणाम है। उनका कार्य शोधार्थियों और युवा वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणादायी है।
डीन प्रो. जितेंद्र शर्मा ने कहा कि प्रो. राघव की उपलब्धि संस्थान के लिए विशेष महत्व रखती है। इससे संस्थान के शैक्षणिक एवं अनुसंधान कार्यों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है।
लक्षित औषधि वितरण और एंजाइम अवरोधन पर शोध
प्रो. नीरा राघव का शोध मुख्य रूप से लक्षित औषधि वितरण, एंजाइम अवरोधन और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित है। उन्होंने कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार संबंधी अनुसंधान में नैनोसेल्यूलोज और पॉलीसैकराइड आधारित उन्नत औषधि वितरण प्रणालियों के विकास पर कार्य किया है। इन प्रणालियों का उद्देश्य दवाओं को शरीर में निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचाने की संभावनाओं को बेहतर बनाना है।
इसके अतिरिक्त उन्होंने विभिन्न रोगों से जुड़े कैथेप्सिन एंजाइमों के अवरोधन तथा पाचन तंत्र संबंधी रोगों के नियंत्रण की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए नए कार्बनिक संकर यौगिकों के विकास पर भी शोध किया है।
अपशिष्ट जल उपचार में भी योगदान
पर्यावरणीय अनुसंधान के क्षेत्र में प्रो. राघव ने एमएक्सीन और उन्नत बहुलकीय धातु-ऑक्साइड नैनो-संकर पदार्थों का उपयोग कर अपशिष्ट जल उपचार तथा पर्यावरण संरक्षण से संबंधित कार्य किए हैं। उनका शोध स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की संभावनाएं तलाशने पर केंद्रित रहा है।
विश्वविद्यालय की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, प्रो. राघव के 150 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। उनके शोध कार्यों को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय में उद्धृत किया गया है।
शोध के प्रभाव और उद्धरणों के आधार पर सूची
इस वैज्ञानिक सूची के लिए स्कोपस डेटाबेस में उपलब्ध शोध प्रकाशनों और उनके उद्धरणों से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है। मूल्यांकन में शोध-पत्रों की संख्या के साथ उद्धरणों, एच-इंडेक्स तथा संयुक्त उद्धरण संकेतकों जैसे मानकों को ध्यान में रखा जाता है।
प्रो. नीरा राघव की उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के विभिन्न संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।








