बारिश से फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा देने और मंडियों में भीगा अनाज बिना कटौती एमएसपी पर खरीदने की मांग
रेवाडी, 17 अक्टूबर 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने अहीरवाल क्षेत्र में सरसों और गेहूं की बिजाई के लिए पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद उपलब्ध करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सरसों की बिजाई शुरू हो चुकी है और लगभग एक सप्ताह बाद गेहूं की बिजाई भी शुरू हो जाएगी, लेकिन किसानों को जरूरत के अनुसार डीएपी नहीं मिल रहा है।
विद्रोही ने कहा कि बिजाई से पहले खाद की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई तो किसानों को परेशानी उठानी पड़ेगी और बुआई प्रभावित होगी। उन्होंने आशंका जताई कि खाद की कमी के कारण किसान या तो समय पर बिजाई नहीं कर पाएंगे अथवा निजी व्यापारियों से महंगे दाम पर और कालाबाजारी में डीएपी खरीदने को मजबूर होंगे। दोनों ही परिस्थितियों में आर्थिक नुकसान किसान को झेलना पड़ेगा।
दावों को जमीन पर उतारने की मांग
विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसानों के हित में बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन उन्हें जमीन पर उतारने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाती। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अन्य राज्यों और विदेश यात्राओं पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को प्रदेश के किसानों और आमजन की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री को ‘पर्यटक मुख्यमंत्री’ बताते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश की समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिए जाने से प्रशासनिक जवाबदेही कमजोर हो रही है। विद्रोही ने मांग की कि सरकार खाद की उपलब्धता और वितरण की निगरानी करे, ताकि किसानों को बिजाई के समय भटकना न पड़े।
फसल नुकसान की भरपाई हो
विद्रोही ने कहा कि असमय वर्षा से खेतों में पड़ी बाजरा और धान की फसलों को काफी नुकसान हुआ है। प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाने की व्यवस्था करना राज्य सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंडियों में पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण बिक्री के लिए लाया गया बाजरा और धान भी बारिश में भीग गया। इसकी जिम्मेदारी किसानों पर डालना उचित नहीं है। सरकार को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए खरीद नियमों में आवश्यक ढील देनी चाहिए और किसानों का बाजरा व धान बिना कटौती के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदना चाहिए।









