धान-कपास की खरीद के पर्याप्त प्रबंध नहीं, बारिश से खराब फसलों का मुआवजा दे सरकार, पोर्टल की बाध्यता समाप्त करे
चंडीगढ़/सिरसा, 15 अक्टूबर। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा करके सत्ता में आई भाजपा सरकार आज किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर कर रही है। कभी पोर्टल तो कभी खरीद प्रबंधों और तकनीकी खामियों के नाम पर किसानों को परेशान किया जा रहा है। भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों का खामियाजा अन्नदाता भुगत रहा है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश की मंडियों में धान और कपास की आवक जारी है, लेकिन पर्याप्त शेड, तिरपाल, जल निकासी और उठान की व्यवस्था नहीं होने से किसानों की मेहनत की कमाई बर्बाद हो रही है। बारिश से अनेक मंडियों में फसल भीगने के कारण किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। करोड़ों रुपये कमाने वाली मार्केट कमेटियां फसलों को सुरक्षित रखने में विफल साबित हुई हैं।
सांसद ने कहा कि कांग्रेस हमेशा किसानों को उचित मूल्य और सरल खरीद व्यवस्था देने की पक्षधर रही है। सरकार पोर्टल की अनावश्यक बाध्यताएं समाप्त कर पूरी उपज की समयबद्ध खरीद सुनिश्चित करे। बारिश से खराब फसलों का तत्काल सर्वे करवाकर मुआवजा दे तथा मंडियों में सुविधाएं और समय पर भुगतान सुनिश्चित करे। किसानों को राहत देना सरकार की जिम्मेदारी है, कोई एहसान नहीं।
अंकिता भंडारी के माता-पिता की आवाज दबाना शर्मनाक, न्याय सुनिश्चित करे सरकार : कुमारी सैलजा
उत्तराखंड कांग्रेस की प्रभारी कुमारी सैलजा ने अंकिता भंडारी के माता-पिता को दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने से पुलिस द्वारा हटाए जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि बेटी के लिए न्याय मांग रहे माता-पिता के साथ ऐसा व्यवहार भाजपा सरकार की संवेदनहीनता दर्शाता है। परिजन जिस वीआईपी की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, उसकी सीबीआई जांच पूरी होने तक राज्यपाल पद पर नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं।
कुमारी सैलजा ने कहा कि कथित तौर पर सुबह चार बजे पुलिस कार्रवाई करके पीड़ित परिवार की आवाज दबाना लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार है। सरकार बताए कि आखिर वह किसे बचाना चाहती है। सांसद ने निष्पक्ष जांच, परिजनों की सुरक्षा और अंकिता को न्याय दिलाने की मांग की। कांग्रेस पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है।








