· बीजेपी सरकार की अदूरदर्शी नीतियों, प्रशासनिक विफलताओं और निजी कंपनियों को मुनाफा पहुंचाने की गलत नीति के चलते अनेक जिले अंधेरे में – दीपेन्द्र हुड्डा
· सरकार तुरंत बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संयुक्त मोर्चे से बातचीत कर माँगों का समाधान निकाले, ताकि बिजली व्यवस्था को पूरी तरह ठप होने से बचाया जा सके – दीपेन्द्र हुड्डा
· मात्र एक करोड़ रुपये पूंजी वाली जिस कंपनी के पास बिजली वितरण का पर्याप्त अनुभव नहीं, न ही रखरखाव के जरूरी संसाधन हैं, उसे बिजली वितरण का ठेका किस आधार पर दिया गया– दीपेन्द्र हुड्डा
· बीजेपी सरकार एग्री डिस्कॉम को अलग करने की बड़ी साजिश कर रही, ताकि किसानों के हिस्से की बिजली और उनकी सब्सिडी धीरे-धीरे खत्म की जा सके साथ ही कांग्रेस सरकार के दौरान मिली 10 पैसे प्रति यूनिट जैसी राहत को छीना जा सके – दीपेन्द्र हुड्डा
· बिजली विभाग के सालाना करीब ₹20,000 करोड़ के राजस्व में से अकेले नूंह और गुरुग्राम से ₹9,200 करोड़ मिल रहा – दीपेन्द्र हुड्डा
· सरकार अभी ₹2 से ₹2.50 प्रति यूनिट बिजली चार्ज कर रही, निजीकरण के बाद कंपनी को ₹50 प्रति यूनिट तक चार्ज करने का अधिकार मिल जाएगा – दीपेन्द्र हुड्डा
चंडीगढ़, 22 अक्टूबर। सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा के गुरुग्राम, नूंह में बिजली वितरण के निजीकरण (समानांतर लाइसेंस) देने के फैसले के विरोध में बिजली निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की 3 दिवसीय हड़ताल और उसके परिणामस्वरूप आम जनता को भुगतने पड़ रहे भारी कष्ट को लेकर हरियाणा की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि बीजेपी सरकार की अदूरदर्शी नीतियों, प्रशासनिक विफलताओं और निजी कंपनियों को मुनाफा पहुंचाने की गलत नीति के चलते हरियाणा का औद्योगिक हब कहे जाने वाले गुरुग्राम सहित नूंह और झज्जर के बड़े हिस्से में बीती रात से अंधेरा छाया हुआ है। त्योहारी सीजन के ठीक बीच में जनता का इस तरह बिजली संकट से जूझना सरकार की पूर्ण नाकामी को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि DHBVN को अपना लगभग एक-तिहाई राजस्व अकेले गुरुग्राम से मिलता है। इस मुनाफे वाले क्षेत्र को निजी कंपनियों के हाथों में सौंपने से सरकारी निगम की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा जाएगी। इसके पीछे एक बड़ी साजिश एग्री डिस्कॉम को अलग करने की भी है, ताकि किसानों के हिस्से की बिजली और उनको मिलने वाली सब्सिडी धीरे-धीरे खत्म की जा सके एवं कांग्रेस सरकार के दौरान मिली 10 पैसे प्रति यूनिट जैसी राहत को छीना जा सके। प्राइवेट कंपनियां सिर्फ मुनाफे के लिए काम करेंगी और उनकी आपूर्ति केवल उद्योगों, मॉल्स और शहरी इलाकों तक सीमित रह जाएगी। हरियाणा सरकार को बिजली विभाग से सालाना करीब ₹20,000 करोड़ का राजस्व मिलता है, जिसमें अकेले नूंह और गुरुग्राम जिलों से ₹9,200 करोड़ से अधिक की कमाई होती है। वर्तमान में सरकार जनता से बिजली के लिए लगभग ₹2 से ₹2.50 प्रति यूनिट चार्ज कर रही है, लेकिन निजीकरण के बाद निजी कंपनी को ₹50 प्रति यूनिट तक चार्ज करने का अधिकार मिल जाएगा। अगर ऐसा हुआ, तो आम जनता, किसानों और छोटे व्यापारियों पर कितना भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा, इसकी कल्पना की जा सकती है। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि बिजली कर्मचारियों की माँगें पूरी तरह से न्यायसंगत हैं। प्रदेश के ऊर्जा ढांचे को निजी हाथों में सौंपने की साजिश को कर्मचारी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार अपनी जिद छोड़े और राज्य में ब्लैकआउट जैसी गंभीर स्थिति को दूर कराए। गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का निजी लाइसेंस देने वाले फैसलों और आदेशों को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर आम लोगों के लिये ये निजीकरण योजना इतनी अच्छी लग रही है तो मुख्यमंत्री नायब सैनी जी सबसे पहले इसे लाडवा में लागू करके दिखाएँ।
उन्होंने कहा कि इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह जैसे राजस्व जिलों की बिजली वितरण के लिए पैरेलल लाइसेंस देना प्रदेश को बेचने जैसा कदम है। भाजपा सरकार इन दोनों जिलों की बिजली व्यवस्था Eleven Power Private Limited नाम की निजी कंपनी को सौंप रही है, जिसका गठन ही महज एक साल पहले हुआ था। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस कंपनी के पास बिजली वितरण के क्षेत्र में पर्याप्त अनुभव नहीं है और न ही रखरखाव के लिए जरूरी संसाधन एवं आर्थिक क्षमता है और जिसकी कुल पूंजी ही मात्र एक करोड़ रुपये है, को बिजली का ठेका किस आधार पर दे दिया गया। उन्होंने कहा कि बिजली का एक तिहाई राजस्व गुरुग्राम से आता है। प्राइवेट कंपनियां सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति करने की बजाए, औद्योगिक क्षेत्र, मॉल, कामर्शियल और शहरी क्षेत्रों के पास इलाकों में ही बिजली आपूर्ति करेंगी व घरेलू ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों व गरीब उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति नहीं करेंगी। जिससे बड़ी आबादी ऊर्जा संकट में फंस गई है। बीजेपी सरकार कृषि उपभोक्ताओं के लिए एग्री डिस्कॉम को अलग कर रही है। ताकि प्राईवेट कंपनी को किसानों के हिस्से की बिजली आपूर्ति हो और किसानों को मिलने वाली सब्सिडी धीरे-धीरे खत्म हो जाए। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने बिजली कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया और कहा कि सरकार का ये फैसला आम उपभोक्ताओं के लिए भी घातक है।
दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि सरकार तुरंत बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संयुक्त मोर्चे के प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनकी जायज माँगों का समाधान निकाले, ताकि बिजली व्यवस्था को पूरी तरह ठप होने से बचाया जा सके। हड़ताल और बिजली संकट के कारण प्रभावित आम जनजीवन को सामान्य करने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास कर बिजली आपूर्ति बहाल की जाए। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने आगे कहा कि BJP सरकार जनता को अबाध बिजली देने की बजाय पॉवर कट, ब्लैक आउट जैसे हालात में जीने को मजबूर कर रही है। दीपेन्द्र ने बिजली संकट के लिए मौजूदा सरकार की अदूरदर्शिता को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि शहर हो या गाँव कोई भी क्षेत्र बिजली कटौती से अछूता नहीं है। बिजली कर्मियों की हड़ताल के कारण गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, पंचकूला, रोहतक, सोनीपत समेत अनेक इलाके बिजली संकट में घिर गए हैं। इन इलाकों रात से बत्ती गुल है, लोग रात भर परेशान रहे। बिजली नहीं आने से वाटर सप्लाई भी नहीं हुई, जिससे समस्या और बढ़ गई है। बिजली कटौती से न केवल घरेलू उपभोक्ता और किसान परेशान हैं बल्कि उद्योग धंधे भी चौपट हो रहे हैं। औद्योगिक इलाकों में पॉवर कट के चलते उत्पादन घट कर आधा रह गया है। उद्यमी अपने उद्योगों की एक भी शिफ्ट भी ठीक से नहीं चला पा रहे। लेबर को बिना काम का वेतन भी देना पड़ रहा है। इंडस्ट्री को हज़ारों करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है। जनरेटर पर कारखाना चलाना इसलिये संभव नहीं है कि डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं।








