रेपो रेट बढ़ने से छोटी इंडस्ट्री की बढ़ेगी लागत, निवेश और रोजगार पर पड़ सकता है असर : दीपक मैनी

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PFTI ने जताई चिंता, MSME के लिए 2% ब्याज सब्सिडी और वर्किंग कैपिटल में राहत की मांग

गुरुग्राम। बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा हुआ तो छोटी इंडस्ट्री के लिए कारोबार चलाना और उसका विस्तार करना मुश्किल हो सकता है। ब्याज पर बढ़ने वाला खर्च उद्योगों के मुनाफे को घटाएगा, वहीं नई मशीनरी खरीदने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और कर्मचारियों की भर्ती की योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के फैसले पर प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (PFTI) ने चिंता जताई है। संगठन ने सरकार और आरबीआई से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को वित्तीय राहत देने की मांग की है।

PFTI के चेयरमैन दीपक मैनी ने कहा कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है, लेकिन इसका दबाव छोटी औद्योगिक इकाइयों पर अधिक पड़ता है। बड़े उद्योगों के पास पूंजी जुटाने के कई विकल्प होते हैं, जबकि छोटी इकाइयां रोजमर्रा के कारोबार और कच्चा माल खरीदने के लिए काफी हद तक बैंक कर्ज पर निर्भर रहती हैं।

ब्याज बढ़ा तो घटेगा मुनाफा, महंगा हो सकता है उत्पादन

रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी का असर उन कर्जों पर पड़ सकता है, जिनकी ब्याज दर इससे जुड़ी है। ऐसे ऋणों पर ब्याज भुगतान बढ़ने से उद्योगों का मासिक खर्च बढ़ सकता है। हालांकि, सभी कर्जों की ब्याज दर तुरंत नहीं बढ़ती। इसका असर बैंक की दरों और कर्ज की शर्तों पर निर्भर करेगा।

मैनी के मुताबिक, छोटी इकाइयों के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर कच्चे माल और दूसरे खर्चों का दबाव रहता है, वहीं दूसरी ओर कैश क्रेडिट (CC) और वर्किंग कैपिटल पर ब्याज बढ़ने से कारोबार के लिए उपलब्ध नकदी कम हो सकती है। यदि उद्योग बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर डालते हैं तो उत्पाद महंगे हो सकते हैं। ऐसा करना संभव नहीं होने पर मुनाफे में कटौती करनी पड़ सकती है।

नई मशीनरी और भर्ती की योजनाएं हो सकती हैं प्रभावित

ब्याज का बोझ बढ़ने पर उद्योग विस्तार की योजनाएं टाल सकते हैं। नई मशीनरी खरीदने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में निवेश धीमा पड़ सकता है। कर्ज मिलने में कठिनाई बढ़ी तो नए उद्यमियों और सूक्ष्म इकाइयों के लिए कारोबार शुरू करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसका असर ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट और कैपिटल गुड्स जैसे क्षेत्रों में निवेश के साथ रोजगार सृजन पर भी पड़ सकता है।

PFTI ने सुझाए राहत के तीन उपाय

PFTI ने सरकार और आरबीआई से MSME क्षेत्र के लिए 2% तक ब्याज सब्सिडी लागू करने, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के माध्यम से बिना गारंटी वाले वर्किंग कैपिटल की सीमा बढ़ाने और एमसीएलआर आधारित कर्ज पर बढ़ी ब्याज दरों के प्रभाव के लिए 90 दिन का संक्रमणकाल देने की मांग की है।

मैनी ने चेतावनी दी कि रेपो रेट 5.75% के पार जाने पर छोटे उद्योगों की वित्तीय स्थिति और नाजुक हो सकती है। उन्होंने कहा कि समय पर राहत नहीं मिली तो इसका असर कारोबार के साथ निवेश और रोजगार के अवसरों पर भी पड़ सकता है।

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Author: Bharat Sarathi

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