जनगणना ड्यूटी का बढ़ा दायरा

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निजी शिक्षक, बैंककर्मी और कंपनी कर्मचारी भी बन सकेंगे प्रगणक; पात्रता का अर्थ स्वतः नियुक्ति नहीं

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी,

जनगणना 2027 के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। उपलब्ध अधिसूचना विवरण के अनुसार, केंद्र सरकार ने 16 अक्टूबर 2026 को जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 18(1) के तहत जनगणना नियम, 1990 में संशोधन किया है। इसके जरिए प्रगणकों की नियुक्ति संबंधी प्रावधानों में निजी शिक्षण संस्थानों तथा विभिन्न प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।

यहां मूल अंतर समझना जरूरी है। संशोधन जनगणना नियमों में हुआ है, अधिनियम की धारा 18(1) में नहीं। यह धारा केंद्र सरकार को नियम बनाने की शक्ति प्रदान करती है।

किसकी लग सकती है ड्यूटी?

संशोधित प्रावधानों के बताए गए विवरण में सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सरकारी विभागों, स्थानीय प्राधिकरणों, सार्वजनिक उपक्रमों, वैधानिक निकायों, बैंकों, कंपनियों, संस्थानों, सोसायटियों और न्यासों के लिपिक तथा अधिकारी भी नियुक्ति के दायरे में आ सकते हैं। राज्य सरकार या केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन द्वारा उपयुक्त समझे जाने वाले अन्य व्यक्तियों की नियुक्ति का भी प्रावधान है।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक निजी शिक्षक, बैंककर्मी या कंपनी कर्मचारी की ड्यूटी अनिवार्य रूप से लग गई है। वास्तविक नियुक्ति प्रशासनिक आवश्यकता, चयन प्रक्रिया और संबंधित आदेश पर निर्भर करेगी।

हाईकोर्ट में विवाद क्यों?

हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस ने गैर-सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों के शिक्षकों की सेवाएं जनगणना के लिए लेने के वैधानिक आधार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि निजी विद्यालयों के शिक्षक स्थानीय प्राधिकरणों के कर्मचारी नहीं हैं और उनकी सेवाएं लेने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार आवश्यक है।

उपलब्ध विवरण के अनुसार, न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ ने 8 अक्टूबर 2026 को शिक्षकों का विवरण मांगने वाले हरियाणा सरकार के दो पत्रों पर रोक लगाई थी। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2027 बताई गई है।

संशोधन से मुकदमा खत्म नहीं

निजी शिक्षकों का स्पष्ट उल्लेख सरकार को नियुक्तियों के समर्थन में नया नियमगत आधार दे सकता है। फिर भी, नियमों में बदलाव से लंबित मुकदमा स्वतः समाप्त नहीं होता। न्यायालय के अंतरिम आदेश को भी अपने आप निष्प्रभावी नहीं माना जा सकता। संशोधन का वास्तविक प्रभाव अदालत के आदेश के दायरे और आगे की कार्यवाही से स्पष्ट होगा।

कर्मचारियों के साथ प्रशिक्षण भी जरूरी

जनगणना देश की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और अन्य विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराती है। इतने व्यापक अभियान के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की जरूरत है, लेकिन केवल नियुक्ति का दायरा बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। प्रशिक्षण, आंकड़ों की शुद्धता, गोपनीयता और कर्मचारियों की नियमित जिम्मेदारियों के साथ समन्वय भी आवश्यक है।

इस बदलाव का केंद्रीय प्रश्न यही है कि व्यापक मानव संसाधन का उपयोग करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया की वैधानिकता और न्यायालय के निर्देशों का पालन कैसे सुनिश्चित किया जाए। नियुक्ति की पात्रता, वास्तविक ड्यूटी और न्यायिक विवाद का अंतिम निर्णय—तीनों अलग-अलग विषय हैं।

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Author: Bharat Sarathi

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