एक अच्छी पहल और एक गलत कदम

 कमलेश भारतीय 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शाम को शपथ ग्रहण करने से पूर्व एक अच्छी पहल की । वे राजघाट गये और महात्मा गांधी को नमन् किया । फिर अटल जी की समाधि पर भी गये । इसके बाद शहीदों को नमन् किया जिसमें यह बात भी आई कि इंडिया गेट तो अंग्रेजों ने अपने सैनिकों की स्मृति में बनवाया था जबकि अपने स्वतंत्र देश में वीर जवानों के लिए कोई स्मारक बनाने की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया । यह बहुत अच्छा कदम , अच्छी पहल कही जा सकती है जिसकी जितनी सराहना की जाए कम होगी । 

दूसरी ओर पहले पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शपथ ग्रहण समारोह।में आने को तैयार थीं जबकि बंगाल में चुनाव के दौरान हुई हिंसा में मारे गये 54 कार्यकरत्ताओं के परिवारजनों को भी आमंत्रित किए जाने के बाद ममता बनर्जी ने यू टर्न लेते हुए समारोह में आने से इंकार कर दिया । यह कहते हुए कि यह समारोह का राजनीतिकरण है ।

 इसके खिलाफ मनोज तिवारी बोले कि यह भाजपा को देखना है कि किसे आमंत्रित किया जाए और किसे नहीं । अच्छा है ममता न ही आए । वे उन कार्यकरत्ताओं के परिवार के सामने कौन सा मुंह लेकर आएंगी ? 

यह हद है । पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिदायत दे चुके हैं कि भडास और छपास से सांसद बचें । पर मनोज तिवारी बच नहीं पाए । अब सवाल उठता है कि शपथ ग्रहण समारोह में इन परिवारों को बुलाना कितना उचित है ? वैसे इन कार्यकर्ताओं के परिवारजनों को भाजपा के दिल्ली स्थित कार्यालय में सम्मानित करना ज्यादा सही कदम होता । पर पश्चिमी बंगाल में आने वाले चुनावों को देखते हुए शपथ ग्रहण समारोह में बुला कर सम्माधहन देना सही समझा । डिस तरह से दो दिन में तृणमूल के तीन विधायकों और पचास कारपोरेटर्ज को भाजपा में मिलाया गया उससे भी ममता बनर्जी ने अपना फैसला बदल लिया होगा । लगातार चालीस विधायक अपने पाले में ले जाने की चेतावनी दी जा रही है भाजपा की ओर से तो ममता अपना घर और गढ संभालेंगी , समारोह में क्यों आएंगी ? उन्होंने मंत्रिमंडल में बदलाव भी किया है । इस तरह देखा जाए तो प्रधानमंत्री ने एक अच्छी पहल के साथ एक गलत कदम भी उठाया है ।

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