पायल तडवी की दुखद कथा

कमलेश भारतीय 

मुम्बई के एक अस्पताल में प्रशिक्षु महिला डाॅक्टर पायल तडवी की आत्महत्या का मामला टीवी चैनल्ज में छाया हुआ है । पायल तडवी आदिवासी थी और संभवतः अपने समाज में पहली लडकी थी जो डाॅक्टर बनी थी लेकिन उसकी तीन सीनियर डाॅक्टर्ज ने उसे उसकी छोटी जाति को लेकर इतना प्रताडित किया कि उसने सुबह चार बजे मां को फोन करते करते अचानक फोन काट दिया और कुछ समय बाद खबर आई कि पायल ने अपनी इहलीला समाप्त कर ली । पायल विवाहित थी ।

उसके पति सलमान ने भी उसे बहुत समझाया लेकिन वह इतनी निराश हो गयी कि जीवन जीने की इच्छा ही समाप्त हो गयी । अब पायल की मां और पति आरोप लगा रहे हैं कि पायल ने आत्महत्या नहीं की बल्कि उसकी इन तीन महिला डाक्टर्ज ने हत्या की । प्रदर्शन हो रहे हैं । 

पायल के मुंह पर फाइल फेंक देने की बात भी आ रही है और यह भी कहा जा रहा है कि ये सीनियर्ज कहती थीं कि तुम्हें कुछ नहीं सिखायेंगी और तुम झाडू लगाने लायक ही रह जाओगी । तुम्हें गधा बना कर ही रख देंगीं । कुछ नहीं समझाएंगी । ऐसी अनेक बातें पायल अपनी मां से शेयर किया करती थी । उसके पति ने अस्पताल प्रबंधन से शिकायत भी की लेकिन इसे रेगिंग कह कर उपेक्षित कर दिया । इस तरह पायल को कहीं से भी मदद नहीं मिली और वह निराश होती चली गयी । आखिरकार पायल ने आत्महत्या जैसी राह चुन ली ।

 यह बहुत बडी घटना है । हमारा पढा लिखा वर्ग ही अभी जाति की ऊंच नीच से नहीं हटा । जाति पाति ही समाज के स्टेटस का आधार क्यों ? पायल की योग्यता की बजाय उसकी जाति पर ही उसे पहचान दी गयी । क्यों ? 

गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो राकेश बहमनी ने यह पायल ने गलत कदम उठाया । उसे विपरीत स्थितियों का मुकाबला करना चाहिए था । इतना दबने की जरूरत नहीं थी । पायल को अपनी पूरी ताकत से इसका विरोध करना चाहिए था ।

 सही कह रहे हैं बहमनी । आखिर पायल अकेली नहीं थी । उसका पति और मां उसे पूरा साथ दे रहे थे । फिर ऐसा कदम किसलिए ?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *