गोपीचंद गहलौत शनिवार होंगे भाजपा में शामिल

भारत सारथी/ऋषिप्रकाश कौशिक

गुरुग्राम। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार को सायं 3 बजे पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में मुख्यमंत्री के सामने गोपीचंद गहलौत भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। ऐसा माना जाता है कि गोपीचंद गहलौत ने जो तीन दिन चिंतन-मनन किया या फिर भाजपा के उच्च नेताओं से बात की, उन सबको सोच-समझकर गहलौत ने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया। आपको बता दें कि गोपीचंद गहलौत ने अपनी राजनैतिक शुरुआत भी भाजपा से ही की थी। 

तीन दिन पूर्व जब गोपीचंद गहलौत ने एक सभा कर इनेलो से इस्तीफा दिया था, तभी से यह कयास लगाए जा रहे थे कि वे शायद भाजपा ही ज्वाइन करेंगे। उसके बाद से ही भाजपा के टिकटार्थियों की दौड़ में लगे हुुए उम्मीदवारों को बड़ा झटका लगा है। उनका सोचना था कि किसी तरह उमेश अग्रवाल की टिकट हम कटवाकर हम टिकट पा जाएंगे। परंतु जिस प्रकार मुख्यमंत्री गोपीचंद गहलौत को भाजपा में शामिल करा रहे हैं, इससे उम्मीदों पर पानी फिरा है। जो उम्मीदवार कल तक यह कहते नहीं थकते थे कि उमेश अग्रवाल की टिकट कट जाएगी, आज वही यह कह रहे थे कि उमेश अग्रवाल ने किसी का कोई बुरा तो किया नहीं है और काम भी किए हैं, पिछले बार बहुत वोटों से जीते भी थे, सिटिंग विधायक हैं अत: उनकी टिकट कटना तो मुश्किल ही है। शायद इसका कारण यह रहा हो कि उन्हें लगता है कि यदि उमेश अग्रवाल की टिकट कटी भी तो टिकट गोपीचंद गहलौत को मिल जाएगी। 

यह तो हुई टिकटार्थियों की बात। लेकिन भाजपा संगठन में भी इस बात से चिंता की रेखाएं उभरकर आ रही हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि गोपीचंद गहलौत का अपना एक कद है। हरियाणा विधानसभा में डिप्टी स्पीकर रह चुके हैं। जनाधार भी है। अत: उन्हें संगठन की ओर से अवश्य कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी और अपनी-अपनी ढपली, अपने-अपने राज वाले भाजपा संगठन में एक और खेमा खुल जाएगा। जो शायद अन्य खेमों से मजबूत होगा। अत: अनेक प्रकार से विचार कार्यकर्ताओं में चल रहे हैं। संक्षेप में यह कह सकते हैं कि भाजपा में इनकी इंट्री से भाजपा कार्यकर्ता प्रसन्न नजर नहीं आ रहे। 

अब इसे दूसरे रूप से देखें तो कह सकते हैं कि मुख्यमंत्री खट्टर ने एक तीर से कई निशाने साधने की सोची है। प्रथम तो वह राव इंद्रजीत को इस क्षेत्र में कमजोर करना चाहते हैं, दूसरा उन पर या भाजपा पर जात विरोधी जात विरोधी होने का तमगा लगभग लगता रहा है। अत: इनको मिलाकर वह जाटों को भी अपने पक्ष में करेंगे और तीसरी बात जो बार-बार उन पर पंजाबीवाद का नारा लगता है, उसमें भी वह कह सकेंगे कि पंजाबी बाहुल्य क्षेत्र में मैंने जाट को मुख्य जिम्मेदारी दी है। अत: मैं तो सबका साथ-सबका विकास पर चलने वाला व्यक्ति हूं।

अब इसका असर क्या होगा वह तो आने वाले दिनों में दिखाई देगा। जो भाजपाई इनेलो को पानी पी-पीकर कोसते थे, वे अब इनेलो के नेता को ही सलाम बजाएंगे और जो इनेलो वाले अब तक भाजपा को पानी पी-पीकर कोसते थे, वे भाजपा की नीतियों में आस्था जताएंगे और भाजपा को देश की सबसे अच्छी पार्टी बताएंगे और उनकी नीतियों का बखान करेंगे। देखना दिलचस्प होगा आने वाले समय में गुरुग्राम का माहौल।

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