सरकार प्रायोजित रूप से मसानी बैराज की जमीन पर एम्स बनाने का जुमला उछाल रही है: वेदप्रकाश विद्रोही

11 जुलाई 2019,  स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा भाजपा सरकार, प्रशासन व वन विभाग से मांग की कि मनेठी एम्स की प्रस्तावित जमीन पर वोट बैंक की औच्छी राजनीति करने की बजाय इस जमीन की वास्तविकता जनता के सामने रखे। विद्रोही ने कहा कि आश्चर्य है कि सरकार के पास सभी आवश्यक रिकार्ड होने के बाद भी मनेठी एम्स की 223 एकड़ जमीन पर भिन्न-भिन्न बोलिया बोली जा रही है। सवाल उठता है कि सरकार का राजस्व विभाग इस जमीन की स्थिति पर मौन क्यों है?

सरकार को बताना चाहिए कि 90 के दशक में यूरोपियन संघ के 175 करोड रूपये के अनुदान से अरावली क्षेत्र, दक्षिणी हरियाणा के किस-किस स्थान पर कितनी पंचायती जमीन पर पेड़-पौधे लगाय थे। इस मामले में ग्ररूग्राम के सांसद व केन्द्रीय मंत्री राव इन्द्रजीज सिंह को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए क्योंकि जब यूरोपियन संघ के अनुदान से दक्षिणी हरियाणा, अरावली क्षेत्र में पेड़-पौधे लगायेे गए थे, तब वे ही हरियाणा के वन मंत्री थे। विद्रोही ने कहा कि वहीं भाजपा सरकार को इधर-उधर की बात करके वोट बैंक के लिए दक्षिणी हरियाणा के लोगों का भावनात्मक शोषण करने की बजाय मनेठी एम्स संदर्भ में दो टूक राय लोगों के सामने रखनी चाहिए।

पारदर्शिता, ईमानदारी का दंभ भरने वाले मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर इस मामले में पारदर्शिता व ईमानदारी का व्यवहार क्यों नही कर रहे? खट्टर जी को यह भी बताना चाहिए कि सितम्बर 2018 मं किन कारणों से उन्होंने मनेठी एम्स को जुमला व पूरा न किया जा सकने वाला वादा बताया था? खट्टर जी का सितम्बर 2018 का बयान खुद ही प्रमाण है कि सरकार तथ्यों को छिपा रही है और दक्षिणी हरियाणा के लोगों के सामने सच रखने से भाग रही है। विद्रोही ने यह भी जानना चाहा कि हरियाणा के वन मंत्री राव नरबीर सिंह ने यह क्यों बयान दिया था कि मनेठी कीे इस प्रस्तावित जमीन पर एम्स बन ही नही सकता और वोटों की राजनीति के लिए यूटर्न किसके दबाव में लिया था।

विद्रोही ने कहा कि अब सरकार प्रायोजित रूप से मसानी बैराज की जमीन पर एम्स बनाने का जुमला उछाल रही है। सरकार को यह भी नही भूलना चाहिए कि मसानी बैराज की जमीन मसानी डैम के नाम पर ली गई थी व मसानी डैम पर भी 1978 में करोड़ों रूपये खर्च किये गए है। क्या इस डैम की जमीन को रिलीज करके नदी के बीच के पाट में एम्स बनाना संभव है या नही, इसकी पहले वैद्यानिक जांच होनी चाहिए और बिना जांच के यह भी विधानसभा चुनाव के बाद जुमला बन जायेगा। विद्रोही ने मांग की कि सरकार मनेठी में एम्स बनाने को प्राथमिकता दे, फिर चाहे इसके लिए 250 एकड़ जमीन सरकार को नये सिरे मनेठी में ही क्यों न अधिग्रहित करनी पड़े। 

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