जनता की पहली मांग इंटरनेशनल एयरपोर्ट नहीं बल्कि शुद्ध पेयजल है

हिसार 10 जुलाई(प्रवीन कुमार) हिसार संघर्ष समिति एवं सेक्टर 16-17 रेजीडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन के प्रधान जितेन्द्र श्योराण ने कहा है कि राहगिरी व अन्य सरकारी आयोजनों के आयोजन को सफल बनाने में जुटे प्रशासन को चाहिए कि वह पहले शहर की जनता को शुद्ध पेयजल मुहैया करवाए। उन्होंने कहा कि सरकारी आयोजनों को कामयाब बनाने के लिए जो अधिकारी या कर्मचारी लगाए जाते हैं, उनका आधा हिस्सा ही सही मायने में जनता के हित में काम कर लें तो जनता की समस्याएं दूर हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि शहर की जनता की पहली जरूरत इंटरनेशनल एयरपोर्ट नहीं बल्कि शुद्ध पेयजल है, इसलिए सांसद, विधायक व मेयर को थोड़ा इस पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपाई इस समय सदस्यता अभियान चला रहे हैं लेकिन इससे पहले उन्हें यह भी देखना चाहिए कि जनता की समस्याएं क्या है, वे हल हो रही है या नहीं। यदि नहीं तो पहले उन्हें इस तरफ ध्यान देना चाहिए और विचार करना चाहिए कि पहले सदस्यता अभियान जरूरी है या जनसमस्याओं का हल।े

जितेन्द्र श्योराण ने कहा कि पूरे साल में लगभग दो माह ही ऐसे हैं, जिनमें पेयजल व बिजली की तंगी से जनता को जूझना पड़ता है। ऐसे में क्या दो माह की तंगी को देखते हुए सरकारी अमले को बाकी बचे 10 माह के दौरान कोई काम नहीं करना चाहिए। यदि जलघरों की सफाई समय पर करवा दी जाए तो उनमें से इतनी गाद निकलेगी कि पानी का अच्छा स्टॉक हो सकता है। इसके अलावा बिजली आपूर्ति की व्यवस्था भी बनाई जा सकती है। बाढ़ बचाव के प्रबंध व बड़े-बड़े दावे करने वाले अधिकारी अभी तक मामूली बरसात से तर हो रहे शहर से पानी निकासी का प्रबंध नहीं कर पाए। यह तो भगवान का शुक्र है कि बाढ़ तो क्या, अब तक तेज बरसात भी नहीं आई, अन्यथा बाढ़ बचाव के प्रबंध धरे के धरे रह जाते। ऐसे झूठे दावे करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाही किये जाने की जरूरत है।

जितेन्द्र श्योराण ने कहा कि राहगिरी जैसे आयोजन को सफल बनाने के लिए पूरे प्रशासन ने जोर लगा रखा है। अधिकारी बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन क्या प्रशासनिक अधिकारियों ने पेयजल की तंगी की तरफ ध्यान दिया है। सरकारी दबाव के चलते राहगिरी में लोग आ तो जाएंगे लेकिन क्या वो सरकारी व अधिकारियों के रवैये से खुश है, यह देखना होगा। यदि सरकार व अधिकारी राहगिरी के थीम के साथ जनता की समस्याएं दूर करने का समयबद्ध अभियान चलाते तो जनता की समस्याएं जल्द दूर होती लेकिन दुर्भाग्य है जनसमस्याओं के हल के लिए तो अधिकारियों को ढ़ोल बजाकर जगाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब पेयजल की तंगी के बारे में अधिकारियों से मिला जाता है तो वे नहर में पानी न होने का बहाना बनाकर जनता पर ही हंसने लगते हैं, लेकिन जब उन्हें पता है कि इस समय नहर बंद होनी है, तो उसका प्रबंधन पहले क्यों नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि सत्ता व विपक्ष के लोगों ने जनसमस्याओं को पूरी तरह से भूला दिया है, अधिकारियों का ध्यान नहीं है, ऐसे में लगता है कि जनता अब भगवान के भरोसे है और इन समस्याओं के निवारण के लिए भगवान को ही आना होगा या फिर आम जनता को गब्बर इज बैक की तर्ज पर अपने काम खुद करवाने पड़ेंगे।

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