कांग्रेस में इस्तीफों का दौर

कमलेश भारतीय

आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात सही निकली कि राहुल गांधी प्रनानमंत्री बनने का सपना भूल जाए बल्कि वह तो विपक्षी नेता बन सके इतना बहुमत जुटा ले । यही हुआ । कांग्रेस पचपन सीट नहीं ले पाई । इक्यावन पर ही अटक गयी और सचमुच राहुल गांधी विपक्षी नेता भी नहीं कहला सकेंगे । वैसे भी पहले कांग्रेस दल के नेता मल्लिकार्जुन खडसे चुनाव हार गये । अब नया नेता कौन बनेगा ? 

इस समय कांग्रेस में राहुल गांधी से लेकर राज बब्बर तक इस्तीफे का दौर जारी है । हर कोई इस्तीफा देने के लिए मचल रहा है । राहुल गांधी को मनाने में लगे हैं लेखिन खबरें हैं कि वे मान नहीं रहे । अडे हुए हैं । बाल हठ कर रहे हैं । पहले कहते थे कि चांद लूंगा । अब कहते हैं कि यह चांद है ही नहीं । यह तो आग का गोला है । मैया मोरी मुझे नहीं चाहिए । राज बब्बर भी इस्तीफा दे रहे हैं और पंजाब के सुनील जाखड भी । और पता नहीं कौन कौन इस्तीफा देने की कतार में खडा है । ऐसे तो आप में भी अलका लाम्बा कह रही हैं कि वे सन् 2020 में आप से इस्तीफा दे देंगी । अभी तो विधायक पद के मजे लेने दो । पूरी टर्म करने दो । वैसे उन्हें व्हाट्स अप ग्रुप से आप ने हटा दिया है । 

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ भी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देंगे लेकिन कांग्रेस में हरियाणा के लोग हैरान हैं कि अशोक तंवर इस्तीफे की बात ही नहीं कर रहे । अब तो सैलजा ने भी इशारा कर दिया कि हरियाणा में कांग्रेस संगठन कमजोर होना भी हार की एक वजह मानी जा सकती है । फिर भी अशोक तंवर हाईकमान की ओर ताक रहे हैं । कब तक आएगा इस्तीफा ?

 क्या इस तरह इस्तीफों से कांग्रेस में बदलाव आएगा ? सवाल यह है । आखिर मंथन कीजिए और जो उचित स्थान पर नहीं उन्हें वहां से हटाइए और उचित स्थान पर भेजिए । इस तरह इस्तीफों के दौर से कांग्रेस और कमजोर होगी । यह बात गौर करने की है । प्रियंका गांधी भी भाई को यही समझा रही है कि यदि इस्तीफा दे दोगे तो यह तो भाजपा की चाहत पूरी हो जाएगी । इसलिए डट कर मुकाबला करो । देखते हैं कि यह इस्तीफों का दौर कांग्रेस को कहां ले जाता है ?

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