सरकार ने आंदोलन करने के अलावा किसानों के पास कोई विकल्प नही छोड़ा

9 जुलाई 2019,  स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि नैशनल ग्रीन कोरिडोरे 152-डी के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवजा किसानों को कम से कम देना पड़े, इसके लिए केन्द्र व हरियाणा भाजपा सरकार तिकडमे भिड़ाकर किसानों को ठग रही है।

विद्रोही ने सोमवार से बाघौत-महेन्द्रगढ़ में जमीन मुआवजे को लेकर शुरू किये धरने का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार ने आंदोलन करने के अलावा किसानों के पास कोई विकल्प नही छोड़ा। विभिन्न जिलों के किसान लम्बे समय से नैशनल ग्रीन कोरिडोर 152-डी के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवजो बढ़ाने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे है। मोदी-भाजपा सरकार ने किसानों के आंदोलन को कमजोर करने के लिए पहले केन्द्रीय स्तर पर अधिग्रहित जमीन का मुआवजा बढ़ाने की मांग मानी, पर दूसरी ओर जिलों के कलैक्टर रेट कम करके किसानों को पूरा मुआवजा न मिले, इसका भी सुनियोजित षडयंत्र रच डाला।

विद्रोही ने कहा कि कलैक्टर रेट कम करने का सबसे ज्यादा खामियाजा महेन्द्रगढ़ व दादरी जिले के किसानों को उठाना पड़ रहा है। सवाल उठता है कि जब संसद ने छह वर्ष पूर्व भूमि अधिग्रहण कानून 2013 पारित करके यह सुनिश्चित कर दिया था कि किसानों को अधिग्रहित जमीन का मुआवजा बाजार भाव से चार गुणा ज्यादा मिलेगा, तब हरियाणा भाजपा सरकार भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के नियमों में हेराफेरी करके किसानों को बाजार भाव से चार गुणा ज्यादा मुआवजा देने से क्यों वंचित कर रही है?

विद्रोही ने किसानों, कमजोर तबके, गरीबों से पूछा कि जब वे जानते है कि भाजपा पंूजीपतियों व उच्च स्वर्ण जातियों की प्रभुत्व वाली पार्टी है, फिर भी वे भाजपा को भारी समर्थन देकर खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी क्यों मारते है? जब किसान, मजदूर, कमेरा वर्ग, शोषित भाजपा को भारी समर्थन देगा तो फिर उनका शोषण नही होगा तो किसका होगा? हरियाणा के मेहनतकश लोग बबूल का पेड़ बोकर उससे फलों की आशा कैसे कर सकते है?

विद्रोही ने भाजपा सरकार से मांग की कि किसानों के साथ चूहे-बिल्ली का खेल खेलकर उनसे धोखाधडी करने की बजाय भूमि अधिग्रहण कानून 2013 अनुसार बिना ना-नुकर किसानों को अधिग्रहित जमीन का बाजार भाव से चार गुणा ज्यादा मुआवजा दे।

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