कर्नाटक में राजनिति का नाटक, फिर उठापटक

– कमलेश भारतीय

 लोकसभा चुनावों के बीच ही यह बात तय थी कि कर्नाटक , पश्चिमी बंगाल , दिल्ली और मध्यप्रदेश की सरकारों पर खतरा मंडराने वाला है और लीजिए कर्नाटक में राजनीति का नाटक शुरू हो गया । पहला अध्याय कांग्रेस के एक दर्जन से ऊपर विधायकों ने गवर्नर के पास जाकर लिख दिया और एक एक विधायक जनता दल का भी बदल गया पाला । कुमारस्वामी की सरकार संकट में आ गयी । विधायकों की मौज हो गयी है । किसी अज्ञात जगह होटल ले जाए गये हैं । फोन वघैरह सब ले लिए । पूरा अज्ञातवास जब तक कि भाजपा सरकार नहीं बना लेती । पिछले साल तो विधायकों की बहनें राखी भी न बांध पाई थीं । इस बार नाटक राखी तक लम्बा नहीं चलेगा । जल्द ही समाप्त हो लेगा । दिल्ली में भी विधायक चुनाव के दौरान ही भाजपा में शामिल होने लगे थे और पश्चिमी बंगाल में भी आकाश विजयवर्गीय के पापा कैलाश जुटे हुए हैं विधायक तोडने में ।

  क्या भाजपा कांग्रेस की राह पर चल रही है ? कांग्रेस ने भी सुचिता , पवित्रता का दामन छोड दिया था और येन केन विपक्ष की सरकारें बडी बेशर्मी से गाराई थीं । अरूण जेटली कहते हैं कि कांग्रेस अपना घर और विधायक संभाल कर रखे । भाजपा को दोष न दे । बिल्कुल सही फरमाते हैं । करोडों रुपयों की पेशकश जिंदगी में बार बार नहीं मिलती । जिंदगी बनाने का यही वक्त है । कर ले पूरी आरजू । कर रहे हैं । पैसा और वक्त अपनी भूमिका निभा रहा है । अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीति पर चलती रहने पर भाजपा को सिवाय आदर्शवाद के कुछ नहीं मिला । अब आदर्शवाद का दामन छोड अवसरवाद को अपनाया तो सुख ही सुख पाया । वाह । वक्त वक्त की बात है ।

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