क्या होगा कांग्रेस का ?

कमलेश भारतीय

 यह छोटा मुंह बडी बात होगी । इतनी बडी राष्ट्रीय पार्टी और मेरे जैसा छोटा सा पत्रकार यह विश्लेषण करने बैठे कि क्या होगा कांग्रेस का ? कहते हैं कि कई बार कांग्रेस इस तरह संकट में फंस चुकी पर हर बार उभर कर सामने आई । खासतौर पर सन् 1990 के बाद तो श्रीमती सोनिया गांधी ने ही इसे संजीवनी प्रदान की जबकि वे न खुद और न ही अपने पति राजिव गांधी को राजनीति में देखना नहीं चाहती थी लेकिन वक्त ने ऐसी अंगडाई ली कि न केवल राजीव गांधी को आना पडा बल्कि उनके बाद सोनिया गांधी को भी कांग्रेसजन ले ही आए ।

इसी तरह दोनों संतानें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी कांग्रेस में सक्रिय हुए । राहुल गांधी अध्यक्ष पद तक पहुंचे तो प्रियंका राष्ट्रीय महासचिव बनाई गयीं लेकिन उनकी एंट्री भी कांग्रेस के लिए रामबाण साबित नहीं हुई । न पूर्वी उत्तर प्रदेश में और न ही हरियाणा या दिल्ली कहीं भी उनका चुनाव प्रचार कोई सफलता दिला सका । राहुल ने चुनाव परिणाम के बाद से इस्तीफे की ऐसी रट लगाई कि कोई मना नहीं पाया । आखिरकार मोतीलाल बोरा को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया ।

अब सवाल है कि क्या होगा कांग्रेस का ? हरियाणा समेत कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव सिर पर हैं और सेनापति सेना को छोड गया है । हरियाणा में अध्यक्ष के बदलाव की मांग भी अनसुनी किए रखी । अब क्या होगा ? क्या बोरा जी कोई बदलाव लाएंगे ? भाजपा जहां तैयारियों में जुटी है वहीं कांग्रेस गुटबाजी में व्यस्त है । यह देर कहीं इस बात को न साबित कर दे – देर न हो जाए कहीं देर न हो जाए ,,,

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