संपूर्ण देश में 21 दिन का संपूर्ण लॉकडाउन

भारत सारथी/ऋषि प्रकाश कौशिक
संवत 2077 की पूर्व संध्या पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना से बचाव के लिए देशवासियों से कोरोना की चेन तोडऩे के लिए सहयोग मांगा और पूरे देश में रात्रि 12 बजे से 21 दिनों के लिए लॉकडाउन का ऐलान किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों का आभार जताया जो उन्होंने 22 मार्च को उनकी अपील पर घरों से न निकलने के अपने वादे को निभाया और साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे में भी लोग हैं, जो इसकी गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं, उन्हें भी समझना होगा। यदि हमें जिंदा रहना है तो सावधानियां बरतनी होंगी। साथ ही उन्होंने कहा कि कोरोना की उत्पत्ति से एक लाख लोगों तक प्रथम बार पहुंचने में 67 दिन का समय लगा लेकिन एक लाख से दो लाख पहुंचने में मात्र 11 दिन का समय लगा और दो लाख से तीन लाख तक पहुंचने में मात्र चार दिन का। इस बात से इस बीमारी की गंभीरता का अनुमान लगाया जा सकता है कि यदि हमें जिंदा रहना है तो लॉकडाउन को सफल बनाना ही होगा।

अन्य देशों के उदहरण देते हुए उन्हों ने कहा कि कोरिया और अमेरिका की स्वास्थ्य सेवाएं इस समय विश्व में सर्वश्रेष्ठों में गिनी जाती हैं लेकिन वे भी इस को रोक नहीं पाए। हालांकि अब उन्होंने प्रयास करके कुछ रोक लगाई है लेकिन चेन तोडऩा उन्हें सफल लगा है।

हमारे पास स्पष्ट सामने कुछ नहीं है। हमारे पास इससे जूझने के लिए कुछ है तो हमारे इन देशों के इस बीमारी के अनुभव, उन वैज्ञानिकों की इस पर खोज, हमारे देश के इस विषय के विशेषज्ञों के परामर्श और हम इन सभी के अनुभव का निचोड़ निकालकर इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि हमें लॉकडाउन करना ही पड़ेगा।

जीवन बचाना आवश्यक है। उन्हें मालूम है कि इस लॉकडाउन से देश को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी लेकिन हमने यह नहीं किया तो इसकी कितनी कीमत चुकानी पड़ेगी, हम अनुमान लगा नहीं सकते और वह कीमत हम देना नहीं चाहते। वह देश के हर नागरिक को स्वस्थ देखना चाहता हूं तो जनता से प्रार्थना की कि इस समय में इसे कामयाब करने में सहयोग दें।

संयम और अनुशासन:
संयम और अनुशासन ही हमें इस बीमारी से निजात दिला सकते हैं। उन्होंने परिवार से निवेदन किया कि वे अपने घर के आगे लक्ष्मण रेखा खींच लें। जो जहां है, जिस जगह है, वहीं रहे और संयम बनाए रखे।

इसके पश्चात जनता की समस्याओं को समझते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार, स्वयंसेवी संस्थाएं सभी मिलकर गरीब आदमियों के जीवन-यापन का प्रबंध करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति में इस बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं तो वह अपनी मर्जी से दवा न ले और डॉक्टरों के परामर्श पर ही दवा ले।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की स्वास्थ संस्थाओं पर बहुत बोझ पड़ गया है लेकिन हमें इसकी जानकारी है और इतने समय से हम उसकी तैयारी में भी जुटे हैं। आज ही 15 हजार करोड़ का बजट इसके लिए पास किया है। अत: हम अपने पूर्ण प्रयास कर रहे हैं इस महामारी से निपटने को।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा देश आज इस स्टेज पर है जहां हमारे आज के संकल्प तय करेंगे कि आने वाले समय में हम इस महामारी को कितना रोक सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से लेकर गांव के छोटे से छोटे नागरिक तक सोशल डिस्टेंस बनाकर रखेंगे और हमें कोरोना की चेन को तोडऩा है, क्योंकि मैंने पहले भी बताया कि जब यह फैलना शुरू करता है तो इसे रोकना अति मुश्किल होता है। उदाहरण हमारे सामने है अमेरिका, इटली, फ्रांस, चीन, कोरिया आदि।
कुछ लोग इस गलतफहमी में है कि सोशल डिस्टेंसिंग सिर्फ संक्रमित लोगों से बचने के लिए है लेकिन ऐसा नहीं है, यह सभी के लिए जरूरी है। इसलिए लापरवाही न बरतें। आपकी लापरवाही देश को बहुत बड़े खतरे में झोंक देगी।

आज जब अखबार आपके हाथ में है तो संपूर्ण देश में लॉकडाउन है। हम आपसे यह निवेदन करेंगे कि प्रधानमंत्री की कही बातों को इग्नोर न करें, उन्हें मानें। बल्कि हम इससे भी आगे जाकर कहेंगे कि देश सभी का है। बीमारी से बचाने की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार की ही नहीं अपितु सभी की है। ऐसे में हम सभी को मिलकर सारे देश का ख्याल रखना है। सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखनी है और यदि सरकार किन्हीं कारणों से आप तक सेनेटाइजर, मास्क आदि न पहुंचा पाए तो चिंतित नहीं होना है। माना आम आदमी के पास इतना धन नहीं होता कि सेनेटाइजर, मास्क आदि खरीद सके किंतु इतना धन तो अवश्य होता है कि वह फिटकरी खरीद सके। फिटकरी से अच्छा सेनेटाइजर शायद कोई बना नहीं। इसी प्रकार घर को साफ रखने के लिए, किटाणुमुक्त रखने के लिए नीम के पत्ते जलाए जा सकते हैं। गूगल, लोहबान की धूनी दी जा सकती है। कपूर का भी प्रयोग किया जा सकता है।

हमारा पुराना आयुर्वेद इतना विकसित है कि उसने हमारी रसोई में ही बड़े अस्पताल छिपे हैं लेकिन ऐसे समय में घर को किटाणु मुक्त करने के लिए तो इन चीजों का प्रयोग किया ही जा सकता है। ऐसा माना जा सकता है कि यदि इनका लाभ नहीं होगा तो नुकसान भी नहीं होगा। कुछ न करने से कुछ करना बेहतर है।

मन के हारे हार है और मन के जीते जीत, पुरानी कहावत है और शास्वत सत्य है। इस समय हमें इसी बात को याद रखना है कि यदि हम मन से टूट गए कि 21 दिन बहुत होते हैं कैसे घर में बंद रहेंगे, इसके बाद यह बढ़ भी सकता है क्या करेंगे, इन बातों से माना कि स्वाभाविक रूप से मन व्यथित होता है लेकिन समय की मांग यही है कि जीवन और समाज बचाने के लिए हमें हर हाल में खुश रहना पड़ेगा। खुश रहकर ही हम इस बीमारी से लड़ सकते हैं।

यह भी माना कि आज नववर्ष का आगमन हो रहा है अत: नववर्ष का आगमन का स्वागत सामाजिक रूप से न करके परिवार में भी किया जा सकता है और मन में यह विश्वास बनाया जा सकता है कि यह वर्ष आरंभ हुआ है तो हमारी मुसीबतों को कम ही करेगा। वैसे परिस्थितियां भी यह इशारा कर रही हैं कि 25 तारीख के पश्चात गर्मी बढ़ेगी और वायरस घटेगा। साथ ही कुछ पुरानी पुस्तकों के संदर्भ में जिन पर विश्वास तो नहीं किया जा सकता लेकिन आस बनाई जाती है कि नववर्ष से इस बीमारी का प्रकोप कम होगा। इसी को देखते हुए हमें विश्वास बनाए रखना होगा।

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