नगर परिषद सचिव व बीआई के खिलाफ राज्य सूचना आयोग ने दिए विभागीय कार्रवाई के आदेश

नगर परिषद सचिव व बीआई के खिलाफ राज्य सूचना आयोग ने दिए विभागीय कार्रवाई के आदेश, 
-शहर के निजी अस्पतालों के भवनों से जुड़ी आरटीआई के तहत जानकारी नहीं देने पर चार हजार हर्जाना देने के भी आदेश 
-राज्य सूचना आयोग के निर्देशों के बावजूद भी दोनों अधिकारियों ने बरती कार्य में कोताही, शहरी निकाय विभाग को एक सप्ताह के अंदर करनी होगी कार्रवाई

भिवानी, 27 जून। भिवानी नगर परिषद की लचर कार्यप्रणाली से अब राज्य सूचना आयोग भी खासा नाराज है। समय पर आरटीआई का जवाब ना देने के एक मामले में नगर परिषद के सचिव राजेश महता व तत्कालीन बिल्डिंग इंस्पेक्टर मुकेश कुमार के खिलाफ शहरी निकाय विभाग पंचकूला को दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए हैं। इसी के साथ राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई कार्यकर्ता को चार हजार रुपये हर्जाना के तौर पर अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत तौर देने के आदेश जारी किए हैं। आयोग ने शहरी निकाय विभाग द्वारा दोनों ही अधिकारियों के खिलाफ एक सप्ताह के अंदर कार्रवाई कर इसकी रिपोर्ट भी आयोग के समक्ष भेजे जाने के आदेश दिए हैं।

स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने चार अक्टूबर 2017 को नगर परिषद कार्यालय से शहर में चल रहे निजी अस्पतालों के भवनों से जुड़ी आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी गई थी। इस संबंध में नगर परिषद ने कोई जानकारी नहीं दी। 9 नवंबर को इस मामले की प्रथम अपील सीटीएम के समक्ष की गई। सीटीएम ने एक सप्ताह के अंदर मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराए जाने के आदेश दिए। मगर फिर भी जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद 9 जनवरी 2018 को मामला राज्य सूचना आयोग के समक्ष रखा गया। इस मामले में 6 मार्च को पहली सुनवाई की गई। जिसमें नप अधिकारियों को सूचना देने के लिए दो सप्ताह की मोहलत दी गई। इस पर भी नप अधिकारी नहीं जागे और कोई जवाब नहीं दिया। इसी मामले में राज्य सूचना आयोग ने 20 अगस्त को नप सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 20 नवंबर को व्यक्तिगत तौर पर सूचना आयोग के समक्ष पेश होने के आदेश दिए। इसी मामले में 20 नवंबर को राज्य सूचना आयोग ने आयोग के आदेशों की पालना ना करने पर नगर परिषद के सचिव व तत्कालीन बीआई के खिलाफ अनुशासनात्मक विभागीय कार्रवाई के शहरी निकाय विभाग को आदेश दिए।

इस मामले में शहरी निकाय विभाग ने भी दोनों ही अधिकारियों पर अपनी नजरें इनायत रखते हुए कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले में बृजपाल परमार ने फिर 27 मई 2019 को राज्य सूचना आयोग के समक्ष दोबारा मामला रखा। जिस पर राज्य सूचना आयोग ने नगर परिषद के अधिकारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैय से नाराजगी जताते हुए कड़ा संज्ञान लिया। सूचना आयोग ने इस मामले में अब शहरी निकाय विभाग पंचकूला के मुख्य सचिव व निदेशक को आदेश जारी करते हुए पहले जारी किए गए आदेशों की पालना कर नप सचिव राजेश महता व तत्कालीन बीआई मुकेश कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए। वहीं चार हजार रुपये हर्जाना आरटीआई कार्यकर्ता को देने की सख्त हिदायतें भी जारी कर दी। सूचना आयोग ने शहरी निकाय विभाग को एक सप्ताह के अंदर दोनों ही अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सूचना आयोग को भी अवगत कराने के आदेश दिए हैं।

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