25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में काला अध्याय

25 जून 2019.  स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने एक बयान में कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में काला अध्याय है, पर 44 साल बाद इस घटनाचक्र पर राजनीति की रोटिया सेंकने की बजाय इससे सबक लेने की जरूरत है।

विद्रोही ने कहा कि 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगाने वाले उस समय की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपने जीवनकाल में ही इसे अपनी गलती माना। वहीं आपातकाल लगाने के कारण देश की जिस जनता ने 1977 में इंदिरा जी को दंडित करके ना केवल उन्हे सत्ता से बाहर किया अपितु उन्हे रायबरेली व संजय गांधी को अमेठी लोकसभा क्षेत्र से हार का मुंह भी देखना पड़ा। लेकिन उसी जनता ने 1977-80 के बीच जनता पार्टी शासन में मची राजनीतिक अराजकता के चलते 1980 में इंदिरा गांधी-कांग्रेस को 351 लोकसभा सीटे देकर भारी बहुमत से फिर सत्ता दी।

विद्रोही ने कहा कि उक्त घटनाक्रम से सभी को सबक लेने व आज की राजनीतिक परिस्थितियों के परिक्षेक्ष्य में विश्लेषण करने की जरूरत है। सवाल उठता है कि क्या 25 जून 1975 के घोषित आपातकाल से आज के मोदी-भाजपा राज के अघोषित आपातकाल में कोई अंतर है? 44 वर्ष पूर्व घोषित आपातकाल था और आज अघोषित आपातकाल है। विद्रोही ने सवाल किया कि क्या मोदी-भाजपा-संघ सत्ता दुरूपयोग से आज सुनियोजित ढंग से अभिव्यक्ति की स्वतत्रंता व नागरिक अधिकारों को नही कुचल रहे है?

क्या एक साम्प्रदायिक, उन्मादी, फासिस्ट, कट्टरवादी संघी विचाराधारा को सत्ता बल पर आगे बढ़ाकर समाज में विघटन, बटवारा नही पैदा किया जा रहा? बढ़ती असहिष्णुता, मॉब लिंिचंग क्या अघोषित आपातकाल की दस्तक नही है? जो व्यक्ति, संगठन संघी विचारधारा का विरोध करता है, उसे देशद्रोही करार देकर पाकिस्तान भेजने की धमकी कौनसा लोकतंत्र है? विद्रोही ने कहा कि ईडी, आईटी, सीबीआई, एनआईए क्या एकतरफा ढंग से काम करके मोदी-भाजपा-संघ विरोधी राजनीतिक दलों, नेताओं संगठनों के यहां भ्रष्टाचार व जांच के नाम पर सुनियोजित ढंग से छापेमारी करके उन्हे डरा-धमका नही रहे है? भ्रष्टाचार मामलों में सभी केस, छापे, गैरभाजपाई व गैरसंघीयों पर ही क्यों?

क्या संघी पाक-साफ देवदूत है और गैरसंघी भ्रष्टाचारी व दानव है? जांच एजेंसियों व छापेमारी व धनबल से जिस तरह से सांसदों व विधायकों को मजबूर करके दल-बदल करवाकर भाजपा में शामिल किया जा रहा है और कांग्रेस-विपक्ष की सरकारों को अस्थिर किया जा रहा है, क्या वह अघोषित आपातकाल व सत्ता दुरूपयोग का खुला प्रमाण नही है? विद्रोही ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए जिस तरह सेना, आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा का राजनीतिकरण किया जा रहा है, वह अघोषित आपातकाल नही तो क्या है?

न्यायपालिका में सत्ता का बढ़ता हस्ताक्षेप, फिक्स जज-फिक्स बैंच व फिक्स न्याय के आरोप अघोषित आपातकाल के प्रमाण नही है? विद्रोही ने लोगों से अपील की कि वे अघोषित आपातकाल के खतरे को समझे और अभिव्यक्ति की स्वतत्रंता, नागरिक अधिकार, संविधान व लोकतंत्र को किसी भी हालत में सत्ता बल पर कुचलनेे न दे। 

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