सुशासन बाबू , चमकी बुखार और स्वास्थ्य सेवाएं

कमलेश भारतीय 

पहले एक बार गोरखपुर में सिलेंडर की कमी से बडी संख्या में बच्चों की अकाल मृत्यु हुई थी और अब बिहार में चमकी आकाशीय बिजली से ज्यादा चमकी और अब तक दो सौ के आसपास बच्चों की जान ले चुकी । संवेदनहीन प्रशासन देर से जागा और ऐसे ही सोये हुए मुख्यमंत्री सुशासन बाबू यानी हमारे नीतीश कुमार । अब जाकर अस्पताल में बच्चों की सुध लेने पहुंचे जब चारों तरफ धिक्कार और हाहाकार होने लगी । फिर भी इनके अस्पताल में मौजूदगी के बावजूद एक बच्चा और दम तोड गया । अब मुख्यमंत्री कोई डाॅक्टर थोडे ही हैं जो उनकी मौजूदगी में बच्चा स्वर्ग नहीं सिधार सकता ?

न तो गोरखपुर के कांड से हमने या प्रशासन ने कोई सीख ली और न ही कोई भी सरकार सीख लेगी । ऐसा नहीं लगता । यहां चिता संसद में जयश्री राम और जयहिंद के नारों के मुकाबले की है । यहां चिंता मुस्लिम बच्चों को वजीफा देकर वोट बैंक बनाने की है । बच्चों का क्या ? भगवान् ने दिए थे , उसी ने ले लिए ।

 चमकी के जवाब में उपमुख्यमंत्री भाजपा नेता सुशील मोदी भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए । दूसरी ओर सोशल मीडिया पर एक बात आ रही है कि अब स्मृति ईरानी बिहार किसी बच्चे की अर्थी को कांधा देने क्यों नहीं जातीं ? जवाब भी दिया गया है कि अब कोई चुनाव थोडे है और यह बिहार है , यूपी थोडे है ,,,देगिए कितनी निर्लज्ज हो गयी राजनीति ।

 वैसे क्या हमारे अस्पताल या स्वास्थ्य सेवाएं इस तरह की आपातकालीन समस्याओं से निपटने में सक्षम हैं ?। जवाब आएगा कि नहीं जनाब । सरकारी अस्पताल तो सामान्य सेवाएं भी नहीं दे पा रहे । आपातकालीन समस्या से कहां से निपटेंगे ? 

स्वास्थ्य सेवाओं पर गम्भीरता से विचार करने की जरूरत है न कि सुशासन बाबू और मीडिया की एंकर अंजना ओम कश्यप की आलोचना से कुछ होने वाला है । 

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