राहुल गांधी का जन्मदिन : संघर्ष की कहानी

– कमलेश भारतीय

 आज कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का जन्मदिन है । समर्थक बधाइयां देंगे और स्वाभाविक भी है । मेरे जैसा कलम घिसने वाला तो कुछ विश्लेषण ही करेगा । आखिर अभी तक राहुल सफल क्यों नहीं हो पाए ? अमेठी से चुनाव क्यों हारे ? अब अध्यक्ष क्यों नहीं रहना चाहते ? बहुत सारे सवाल हैं । जिनके जवाब हर कोई पूछ सकता है । 

राहुल एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसके जवाहरलाल नेहरू , इंदिरा गांधी और राजीव गांधी तीन तीन प्रधानमंत्री रहे और यही इल्जाम लगाया जा रहा है कि आखिर परिवारवाद कब तक चलेगा ?  अमेठी में हार के बाद यही प्रचारित किया जा रहा है कि परिवारवाद को चोट मारी है जनता ने । यह सिर्फ एक परिवार मात्र नहीं है । यह जवाब दिया जाता है कांग्रेस की ओर से । यह परिवार कुर्बानी देने वाला परिवार है । इस बात को क्यों भूल जाते हैं  । दूसरी ओर भाजपा ने सारा सोशल मीडिया इस बात से भर दिया कि राहुल तो पप्पू है । इसे कुछ समझ नहीं । वह तो न किसान को जाने और  न ही फसलों के बारे में । न जाने कितने चुटकुले बनाए गये । इस तरह कितनी बुरी तरह छवि पूमिल की गयी । जबकि कांग्रेस के वार रूम से इसका कोई काउंटर ढंग से नहीं किया गया । 

अमेठी से हार जाना भी बहुत ही शर्मनाक है जिसमें आपने कम से कम तीन दशक पुरानी अपनी परंपरागत सीट ही खो दी । यदि दो जगह से चुनाव लडना था तो क्यों नहीं प्रियंका गांधी को ही अमेठी से चुनाव लडवा दिया ? उसकी ताकत को पूर्वी यूपी में बेकार ही झोंक दिया । क्यों ?

अब लोकसभा चुनाव के बाद क्यों रट लगा रखी है इस्तीफा देने की ? क्या संघर्ष नहीं करोगे ? जन्मदिन है और संकल्प लो कि संघर्ष करूंगा । सत्ता में इस बार न सही अगली बार जरूर आऊंगा । शुभकामनाएं । 

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