कबीर जी भारत में समाजवादी विचाराधारा के पहले प्रवक्ता थे

17 जून 2019,  स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने अपने कार्यालय में कबीर जयंती के अवसर पर महान संत व समाज सुधारक कबीर जी के चित्र पर पुष्पाजंली अर्पित करके उन्हे भावभीनी श्रद्घाजंली अर्पित की। कपिल यादव, अजय कुमार, अमन यादव, प्रदीप कुमार व कुमारी वर्षा ने भी अपने श्रद्घासुमन कबीर जी को अर्पित किए।

इस अवसर पर विद्रोही ने कहा कि कबीर जी ने छ: सदी पूर्व ही धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक समानता व जातिविहीन समाजवादी समाज की परिकल्पना दुनिया के सामने अपने दोहों के माध्यम से प्रस्तुत की थी। कबीर जी ने जिस तरह जनसाधारण की भाषा में जातिवाद, धार्मिक आड़म्बर, सामाजिक रूढ़ीवाद, छुआछूत, गैरबराबरी और साम्प्रदायिकता के खिलाफ दोहों के माध्यम से अलख जगाया था, वह आज भी हमे सामाजिक बुराईयों और साम्प्रदायिकता के खिलाफ लडऩे की प्ररेणा देता है। विद्रोही ने कहा कि कबीर जी भारत में समाजवादी विचाराधारा के पहले प्रवक्ता थे। एक जुलाहे के घर में जन्म लेकर जिस तरह कबीर जी ने कम पढ़े-लिखे होते हुए भी कबीरवाणी के माध्यम से दुनिया को आपसी भाईचारे, सामाजिक सदभाव, समाजवाद, धार्मिक पांखड व रूढ़ीवादी के खिलाफ लडऩे का संदेश दिया, वह अपने आप में अदभूत है।

विद्रोही ने लोगों से आह्वïान किया वे कबीर के रास्ते पर चलकर एक नये समाज का निर्माण करे जहां व्यक्ति को जाति, धर्म व सामाजिक-राजनीतिक रूतबे की बजाय उसकी अपनी योगयता, ईमानदारी व समाज के प्रति समर्पण की भावना से उसका मूल्यांकन व आदर हो। 

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