आईएमए से अपील : विरोध का ऐसा तरीका अपनाये जिससे मरीजों का ईलाज भी चलता रहे

15 जून 2019, स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने एक बयान में कहा कि ईलाज के दौरान मरीज की मौत को लेकर मरीज के परिजनों द्वारा डाक्टरों की पिटाई, अभद्र व्यवहार को किसी भी हालत में स्वीकार नही किया जा सकता है और ऐसे मामलों में सम्बन्धित सरकारों को तत्काल कानूनी कार्रवाई करके डाक्टरों को सरंक्षण देना चाहिए।

विद्रोही ने कहा कि देशभर में ऐसे मामले सामने आते रहते है, इसलिए लिए आवश्यक है कि सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों, नर्सिंग स्टाफ की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किये जाये। ऐसी ही बंगाल की घटना की चलते पूरे बंगाल के सरकारी डाक्टर तो हडताल पर है ही, साथ में जिस तरह देशभर में सरकारी अस्पतालों के डाक्टर हडताल व आंदोलन कर रहे है, उसके पीछे बंगाल की राजनीति है या डाक्टरों का स्वभाविक विरोध, इस पर गंभीरता से विचारने की जरूरत है।

विद्रोही ने कहा कि शुक्रवार को देशभर के सरकारी अस्पतालों में हुई हडताल ने कई मरीजों की जान ली है, साथ में सरकारी अस्पतालों में ईलाज के लिऐ गरीब गरीब व कमजोर तबके के लोगों को भी खासी परेशानी झेलनी पड़ी। एनसीआर क्षेत्र में कई सरकारी अस्पतालों में शनिवार को भी हड़ताल रही। बंगाल की घटना के मध्यनजर आईएमए भी आंदोलनरत है व 17 जून को देशभर के निजी अस्पताल भी एक दिन की हडताल पर रहेंगे। निजी डाक्टरों व निजी अस्पतालों की इस देशव्यापी हडताल से आमजनों की परेशानी और बढ़ेगी और सम्बन्धित मरीजों को अपनी जान से साथ भी हाथ धोना पड़ सकता है।

विद्रोही ने आईएमए से अपील की कि वे 17 जून की अपनी प्रस्तावित हड़ताल को रद्द करके विरोध का ऐसा तरीका अपनाये जिससे मरीजों का ईलाज भी चलता रहे और डाक्टरों का विरोध भी दर्ज हो जाये। वहीं सरकारी अस्पतालों के डाक्टरों को भी गंभीरता से विचारना चाहिए कि क्या उनका हडताल पर जाना उचित है। वहीं विद्रोही ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी आग्रह किया कि वे स्थिति को बिगाडने की बजाय बंगाल के सरकारी डाक्टरों की हडताल को समाप्त करवाने का हरसंभव प्रयास करे व भाजपा के फैलाये जाल में फंसकर स्थिति को और अधिक खराब न होने दे। विद्रोही ने हरियाणा के सभी सरकारी व निजी डाक्टरों से आग्रह किया कि वे जनहित में किसी भी हालत में हडताल न करे। 

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