वायु के प्रकोप के साथ कुछ और प्रकोप भी हैं

– कमलेश भारतीय 

दो तीन दिन से वायु प्रकोप की मीडिया में खूब चर्चा हो रही है । इससे गोवा और गुजरात प्रभावित होने वाले हैं । अलर्ट जारी है । पर राजनीति में भी बहुत प्रकोप जारी है । लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिमी बंगाल में सबसे ज्यादा हिंसा हुई । हर चरण हिंसा में ही पूरा हुआ । अब विधानसभा चुनाव तक यह हिंसा थमने वाली नहीं लगती । हर रोज कहीं तृणमूल तो कहीं भाजपा कार्यकर्ताओं के मारे जाने के सम्चार आते रहते हैं । आखिर ये कोई विदेशी थोडे हैं जो लगातार हिंसा के शिकार हो रहे हैं । कोई घुसपैठिए भी नहीं । बंगाल के ही निवासी हैं । फिर इतनी मारामारी क्यों और किसलिए ? चुनाव को चुनाव ही रहने दीजिए । कोई युद्ध न बनाइए । 

दीदी ने ईश्वर चंद्र विद्यासागर की नयी मूर्ति बनवा कर रोड शो करने के बाद पुनः स्थापित की । यह मूर्ति भी चुनाव का मुद्दा बन गयी । जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घोषणा करते रह गये वहीं दीदी ने मूर्ति बनवा कर स्थापित भी कर दी । यह भी कहा कि मोदी और शाह बंगाल को गुजरात बनाना चाहते हैं और यह बंगाल है । कोई खिलौना नहीं । मैं बंगाल से किसी को खेलने नहीं दूंगी । चाहे मुझे जेल ही क्यों न जाना पडे । क्या दीदी को कुछ आभास हो रहा है आने वाले दिनों का कि अच्छे दिन नहीं आने वाले हैं ? या दीदी पूरी तरह तैयार हो रही है जंग के लिए ? 

सचमुच वायु प्रकोप से बढकर प्रकोप चल रहा है बंगाल में । हर रोज बंगाल खून से लथपथ दिखता है मीडिया में । रोता बिलखता है अपनों के लिए और नेता लोग राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं ।

 इधर पंजाब की राजनीति में , खासकर कांग्रेस की राजनीति में भी प्रकोप आ रहा है लगातार । नवजोत सिंह सिद्धू राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मिलकर कोई लैटर बम देकर आए हैं और नये विभागों का कार्यभार संभालने से मना कर रहे हैं । यदि राहुल ने नवजोत को हवा दी तो एक ऐसा राज्य जिसने लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया , वह गुटबाजी की भेंट चढ जायेगा । जैसे हरियाणा चढा हुआ है । इस प्रकोप को राहुल को रोकना होगा । हरियाणा में भी यदि चेहरा बदलने की जरूरत है तो बदल डालो । क्यों यह रिस्क विधानसभा में भी उठाने जा रहे हो ? प्रकोप तो यूपी में प्रेस रिपोर्टर पर आया जब मुख्यमंत्री पर टिप्पणी करने पर पत्रकार को जेल की हवा खानी पडी । सुप्रीम कोर्ट के आदेश हुए हैं कि रिहा करो । केस चलता रहेगा । पत्रकारिता के ऊपर खतरे की तलवार तो लटक गयी । खैर , क की धार सही बनाए रखने की जरूरत है ।

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