ओम प्रकाश चौटाला किसे चुनेंगे अपना नया सदर ?

धर्मपाल वर्मा,
चंडीगढ़।
विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने वाले और लोह पुरुष कहे जाने वाले हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला ने कई दिन प्रदेश में भ्रमण कर स्थिति का जायजा लेकर अपने विजन के दृष्टिगत पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी भंग कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा जो आज बैठक में हाजिर भी नहीं थे, का त्यागपत्र मंजूर कर लिया गया। उन्होंने कहा की सक्षम और योग्य लोगों को जोड़कर नई कार्यकारिणी का गठन करेंगे। अब उनका नया अध्यक्ष कौन होगा, इस पर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं लेकिन यह मानना पड़ेगा कि अनुमान इनेलो और ओम प्रकाश चौटाला के मामले में अमूमन फेल हो जाते हैं ।
कौन बनेगा अध्यक्ष ग्यह पता तो जल्दी ही चल जाएगा लेकिन यह तय करना कि ऐसा सक्षम व्यक्ति कौन होगा जिस पर पूरा इनेलो परिवार विश्वास करके चलेगा। अध्यक्ष बनाना कोई छोटी बात नहीं है पहले भी लोकदल के पास तीन चार ही ऐसे लोग थे जिन पर वे इतना भरोसा कर सकते थे कि उन्हें पार्टी की बागडोर इस संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी जा सके।
इनमें स्वर्गीय सरदार जसविंदर सिंह अशोक अरोड़ा शेर सिंह बडशामी को छोड़ कर बहुत अधिक ऑप्शन नहीं थे। पार्टी यानी चौधरी ओम प्रकाश चौटाला किसी जाट को अध्यक्ष बनाएंगे या गैर जाट को अभी अनुमान लगाया जाना कठिन है लेकिन उनके वक्तव्य से ऐसा लगता था कि वे पार्टी को जाटों की पार्टी के ठप्पे से बाहर निकाल कर सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाली पार्टी के रूप में स्थापित करना चाहते है।

चौधरी ओम प्रकाश चौटाला पार्टी के विभाजन , चुनाव की करारी हार ,विधायकों का दल बदल कर जाना, कार्यकर्ताओं द्वारा पार्टी बदल जाना, लोकसभा चुनाव में और बुरी हार झेलने, अपनो द्वारा ही कमर में छुरी गोपी जाने की असहनीय पीड़ा को झेलते हुए जिस तरह 87 साल की उम्र में दिन रात एक किए हुए हैं, अपने फैसले किसी भी कीमत पर बदलने को तैयार नहीं है, यह दर्शाने की कोशिश कर रहे हैं कि बहादुर लोग कभी पीछे मुड़कर नहीं देखते । बे विपरीत परिस्थितियों में भी रास्ते बनाने में जुटे रहते हैं।

आप समझ सकते हैं कि इनेलो से जहां पहले चार विधायक नैना चौटाला अनूप धानक फोगाट प्रिथी सिंह नंबरदार जेजेपी में चले गए थे फिर संख्या कम हो जाने के कारण अभय सिंह चौटाला को प्रतिपक्ष के नेता का पद छोड़ना पड़ा था। फिर रावत ,बलवान सिंह रणबीर सिंह गंगवा भाजपा में चले गए । अब भी नीचे नीचे कई लोग भारतीय जनता पार्टी में अपना भविष्य तलाश रहे हैं ।आज शायद अशोक अरोड़ा भी पार्टी छोड़ भाजपा में जाने की योजना पर काम कर रहे हैं। इनेलो को एक और बड़ा नुकसान यह हुआ कि उनके दो विश्वासपात्र लोग स्वर्ग सिधार गए इनमें डॉक्टर हरिचंद मिड्ढा अध्यक्ष के रूप में पार्टी के लिए पंजाबी चेहरा हो सकते थे। दूसरे सरदार जसविंदर सिंह को भी अध्यक्ष बनाया जा सकता था परंतु वह भी नहीं रहे।

नया अध्यक्ष कौन होगा, इसका अनुमान लगाना कठिन है परंतु श्री चौटाला यह तय कर चुके हैं की प्रधान बनाया किसको जाना है।

उनके तेवर ,उनका आत्मविश्वास यह जता रहा है कि वे आखरी दम तक हार मानने वाले नहीं है और जिन्हें वह गद्दार साबित कर चुके हैं उनसे प्यार करने वाले नहीं है। वे अपने राजनीतिक विरोधी 20 साल से प्रतिस्पर्धा में खड़े पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे के प्रति सहानुभूति रख सकते हैं परंतु उन्हें वे गद्दार कतई स्वीकार्य नहीं है जो गोहाना में सरेआम उनकी कमर में छुरा घोंप कर गए थे।

ओम प्रकाश चौटाला ने चौधरी देवीलाल की तरह हरियाणा में पिछड़े वर्गों के कल्याण, उनको राजनीतिक हिस्सेदारी देने, उन्हें राजनीति में ऊंचा उठाने का काम तुलनात्मक दृष्टि से प्राथमिकता पर किया है ।उन्होंने दो पिछड़ों को राज्य सभा भेजा कई लोगों को टिकट देकर विधायक बनाया मंत्री बनाया राजनीतिक हिस्सेदारी दी यानी उनके तुष्टीकरण पर फोकस करने की कोशिश की ।श्री चौटाला पार्टी को जाटों के साथ पिछड़ों और दलितों की पार्टी बनाने की कोशिश करेंगे और शहर के नागरिकों को सक्रिय कार्यकर्ताओं को उत्साही युवाओं को जोड़ने के लिए कोई भी संघर्ष करने को आमादा नजर आते हैं ।अब देखना यह है की कार्यकारिणी में ऐसे कौन से हीरे ढूढ कर लाएंगे जो इन हालातों में पार्टी को आगे बढ़ाने में सफल होगे। ऐसा लगता है कि श्री चौटाला जेल में वापस जाने से पहले पहले कार्यकारिणी का गठन कर इसकी घोषणा करने वाले हैं।

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