कहने को बहुत कुछ है आज

– कमलेश भारतीय 

अभिनेता और लेखक गिरीश कर्नाड

आज बहुत कुछ कहने को है । कितने ही तरह के विचार हैं । कितनी ही बातें हैं एकसाथ एक ही दिन में घटीं । प्रसिद्ध नाटककार , फिल्म अभिनेता और लेखक गिरीश कर्नाड नहीं रहे । कुरूक्षेत्र के हरियाणा सृजन उत्सव में यशपाल शर्मा ने कर्नाड के नाटक तुगलक को अपनी स्मृतियों में स्थान देकर उल्लेख किया था । नागमंडलम् एक ऐसा नाटक जिसे अनेक बार युवा समारोहों में जज करने के बहाने देखा । आनंद लिया । आशा फिल्म में सहायक भूमिका में सदैव याद रहेंगे गिरीश कर्नाड । ऐसे व्यक्ति कभी कभी ही आते हैं । नमन् । 

दूसरी घटना क्रिकेटर युवराज सिंह का संन्यास लेना । बस । आंखें भर आईं – सिक्सर किंग की इस तरह विदाई पर । एक ऐसा हीरो जिसे विदाई मैच भी खेलना नसीब नहीं हुआ । युवराज ने स्वीकार किया कि न बल्ला साथ दे रहा था और न ही खेलने का अवसर मिल रहा था । तब लगा कि मेरे जाने का वक्त आ गया । चंडीगढ के सेकाटर सोलह के पुराने खेल स्टेडियम में पिता योगराज सिंह के साथ पहुचे जहां वे प्रेक्टिस किया करते थे । वहीं मैदान में रो पडे और पिता ने बाहों में भर लिया । सन् 2011 का हीरो कैंसर ने लील लिया । बेशक वे मानते हैं कि बाद में जब शतक लगाया तब सही समय था विदाई लेने का लेकिन चूक हो गयी । विदा । विदा क्रिकेट के हीरो । बहुत याद आओगे खासतौर पर जिस दिन कोई तुम्हारे एक ओवर में छह के छह छक्के लगा कर बराबरी कर लेगा कीर्तिमान की । 

तीसरी घटना पश्चिमी बंगाल की । जिसके राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से दिल्ली मिलने पहुंचे और ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री पद से हटा कर राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सुगबुग्हटें तेज हो गयी हैं । हिंसा को आधार बना कर राज्य सरकार को बर्खास्त किया जा सकता है । यह हत्थकंडा कांग्रेस ने भी बहुत बार अपनाया था और आंध्र प्रदेश में ऐसा उल्टा पडा कि फिर पांव नहीं लगे । यदि जल्दबाजी में भाजपा ने यह कदम उठा लिया तो कहीं दीदी के प्रति सहानुभूति लहर न बन जाए । वे खुद कह रही हैं कि घायल शेरनी ज्यादा खतरनाक होगी । अब यह देखना भाजपा का काम है । पर ये तीन घटनाएं मीडिया में दिन भर छायी रहीं ।

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