कांकोरी कांड के हीरो व अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के 123वीं जयंती

स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने कांकोरी कांड के हीरो व अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के 123वीं जयंती पर अपने कार्यालय में उनके चित्र पर पुष्पाजंली अर्पित करके श्रद्धाजंली अर्पित की। कपिल यादव, अमन कुमार, कुमारी वर्षा, प्रदीप यादव व अजय कुमार ने भी अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर विद्रोही ने कहा कि देश की आजादी के लिए अंग्रेजी साम्राज्य के विरूद्ध सशस्त्र संघर्ष छेडने के लिए पंडित रामप्रसाद बिस्मिल ने अपने क्रांतिकारी साथियों के साथ काकोरी में रेल से जा रहे सरकारी खजाने पर कब्जा करके इस धन को अंग्रेजों के खिलाफ लडने के लिए हथियार खरीदने की योजना बनाकर अंग्रेजों के विरूद्ध सशस्त्र संघर्ष करने की लड़ाई को तेज किया।

काकोरी कांड के महान शहीद बिस्मिल, अशफाक उल्ला व ठाकुर रोशन सिंह ने क्रांतिकारी राजेन्द्र नाथ लाहड़ी के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरूद्ध सशस्त्र संघर्ष की योजना बनाई। विद्रोही ने बताया कि अंग्रेजी हुकूमत ने गोडा जेल में 17 दिसम्बर 1927 को क्रांतिकारी राजेन्द्र नाथ लाहड़ी को फांसी पर लटका दिया। वहीं 19 दिसम्बर 1927 को अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखापुर जेल में व 19 दिसम्बर को ही अमर शहीद अशफाक उल्ला खां को उत्तरप्रदेश की फैजाबाद जेल में फांसी पर लटका दिया गया व इसी दिन ठाकुर रोशन सिंह को भी फांसी दी गई।

इन तीनों महान क्रांतिकारियों के बलिदान से देश में अंग्रेजों के विरूद्घ सशस्त्र संघर्ष करने के क्रांतिकारी आंदोलन में एक नई प्ररेणा व उत्साह पैदा हुआ, जिसके कारण शहीद चन्द्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह, राजगुरू व सुखदेव जैसे वीर क्रांतिकारियों ने क्रांति व बलिदान का एक नया इतिहास रचा। विद्रोही ने कहा कि देश की आजादी के लिए विभिन्न क्रांतिकारियों द्वारा किया गया अमर बलिदान आज भी प्ररेणा का स्त्रोत है व इन अमर शहीदों की शहादत से आज भी हमे शोषण, अन्याय, गैरबराबरी व साम्प्रदायिक उन्माद, जातिवाद, क्षेत्रवाद व आतंकवाद के विरूद्घ लड़ते हुए देश की एकता व अखंडता एवं सामाजिक सदभाव के लिए अपना सबकुछ बलिदान करने की प्ररेणा मिलती है।

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