क्या आज पटौदी की राजनीतिक परिपाटी टूटेगी !

पटौदी की जनता को मिलेगा अपना नया 13वां विधायक. अभी तक कोई पार्टी व नेता लगातार दो बार नहीं जीता. नारायण सिंह व मोहन लाल दो बार बने पर पार्टी अलग

फतह सिंह उजाला

गुरुग्राम/पटौदी। जिला की आरक्षित सीट पटौदी की जनता ने 2014 में जिला की पहली महिला एमएलए चुनने का कारनामा कर दिखाया, बिमला चौधरी हरियाणा बनने के बाद जिला गुरुग्राम से पहली महिला एमएलए बनी। लेकिन सबसे अधिक जिज्ञासा सहित रोचक बात यह है कि क्या इस बार गुरुवार को पटौदी की जनता यहां से एमएलए बनाने की परिपाटी को बरकरार रखेगी या फिर परंपरा को ध्वस्त करेगी। पटौदी का हरियाणा बनने के बाद में राजनीतिक इतिहास यही रहा है कि यहां से कोई भी पार्टी और कोई भी नेता लगातार दो बार चुनाव नहीं जीत सके हैं। यह जिज्ञासा मोंदी लहर में लोगों के बीच और भी तेज हो गई है कि क्या बीजेपी इस परिपाटी को बदलने में सफल रहती है। 

2019 के चुनाव में सीधा मुकाबला बीजेपी और आरएसएस के बीच में बना हुआ है। कुल मिलाकर 11 दावेदार मैदान में हैं। बीजेपी ने एमएलए बिमला चौधरी को फिर से टिकट नहीं देकर पार्टी के ही सह प्रवक्ता सत्य प्रकाश जरावता पर भरोसा जताया है। वहीं 2014 में भी बीजेपी टिकट के दावेदार रहे आरएसएस के कार्यकर्ता तथा पहाड़ी गांव के सरपंच नरेंद्र पहाड़ी ने पार्टी तथा अपने चाहने वालों के दम पर बीजेपी के ही खिलाफ चुनावी मोर्चा खोल दिया और मतदान होने के दिन तक नरेंद्र पहाड़ी पंचायती उम्मीदवार बना लिये गए। इससे मुकाबला रोचक और बेहद करीबी बन पड़ा है। जजपा के दीपचंद, कांग्रेस के सुधीर चौधरी, इनेलो के सुखबीर तंवर ही वोट की दौड़ में दिखाई दे रहे हैं। 

बहरहाल सवाल वही है कि क्या बीजेपी पटौदी से जरावता के रूप में लगातार दूसरा चुनाव जीतकर इतिहास बनाने में कामयाब रहेगी? या फिर वोटर अपनी परंपरा को कायम रखते हैं।  हरियाणा बनने के बाद में पटौदी से चौधरी नारायण सिंह अज्ञैर मोहन लाल पीपल दो बार एमएलए बने जरूर, लेकिन पार्टियां और चुनावी वर्ष अलग-अलग ही हैं।  1967 में अहीरवाल के दिग्गज राजनेता राव बिरेंद्र सिंह पटौदी से चुनाव जीतने के साथ ही अहीरवाल अथवा दक्षिणी हरियाणा से सीएम बनने वाले पहले अज्ञैर अंतिम नेता रहे हैं। 1968 में विशाल हरियाणा पार्टी से राव रामजीवन सिंह ने चुनाव जीता। 1967 में हारनें वाले शीशराम 1972 में एमएलए चुने गए। 1977 में चौधरी नारायण सिंह विशाल हरियाणा पार्टी से विजेता रहे। 

1982 में कांग्रेस टिकट पर मोहनलाल एमएलए बने, 1987 में लोकदल की टिकट पर शिवलाल, 1991 में मोहनलाल जनता पार्टी की टिकट पर चुनाव जीते।  1996 में बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी से नारायण सिंह फिर से एमएलए बने। 2000 में रामबीर सिंह इनेलो की टिकट पर चुनाव जीते।  2005 में कांग्रेस की टिकट से भूपिंद्र चौधरी एमएलए बने।  2009 में इनेलो नें नया चेहरा गंगाराम चुनाव में उतारा और सफल रही। 2014 में मोदी लहर के बीच में पटौदी से बीजेपी की टिकट पर बिमला चौधरी ने चुनाव जीत पर हरियाणा बनने के बाद जिला की महिला एमएलए बनने का कारनामा अपने व पार्टी के नाम किया। मोदी लहर तो अब भी है, लेकिन बीजेपी ने जरावता पर दांव लगाया और जरावता की टिकट घोषित होते ही विरोध में उठी आवाज बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है , क्यों कि 2014 में भी टिकट के दावेेदार , आरएसएस के नरेंद्र पहाड़ी को पटौदी में पंचायती उम्मीदवार बना बीजेपी को कड़ी टक्कर दे रखी है। बहरहाल अब गुरुवार को ही तय होगा कि पटौदी में पार्टी सहित उम्मीदवार के लगातार दो बार चुनाव नहीं जीतने की परंपरा कायम रहेगी या नया अध्याय लिखा जाएगा। 

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