बड़ा कन्फ्यूजन है भाई!

भारत सारथी/ऋषि प्रकाश कौशिक

गुरुग्राम। कल चुनाव संपन्न होने के तुरंत बाद लगातार चैनलों से एग्जिट पोल के समाचार आने लगे। उन समाचारों में विभिन्न चैनलों ने भाजपा को 69 से 82 तक सीटें दे डालीं। इस पर हरियाणा की जनता को और राजनैतिक दलों को विश्वास नहीं हो पा रहा था। विभिन्न पत्रकारों ने आपस में फोन कर-करके एक-दूसरे के जिलों की स्थिति जानने का क्रम चालू कर दिया और उन बातों से किसी को भी इस एग्जिट पोल पर विश्वास नहीं हुआ। 

प्रश्न उठता है कि जो स्थानीय पत्रकार 25-30 सालों से अपने-अपने क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहे हैं, वे भी अपनी गृह सीट का शत-प्रतिशत निर्णय दे पाने में असफल रहते हैं। कहीं न कहीं सख्त मुकाबलों में यह स्थिति अधिक ही बनती है। हां, कहीं-कहीं पूर्णतया स्पष्ट हो जाता है कि अमुक उम्मीदवार आगे है। जब स्थानीय स्तर का पत्रकार जो वर्षों से पत्रकारिता कर रहा है उसी क्षेत्र में और उस क्षेत्र की गली-गली और सभी परिस्थितियों को समझता है, वह भी निर्णय लेने में सफल नहीं हो पाता तो एग्जिट पोल वाले कैसे चंद मिनटों में निर्णय लेकर प्रसारित कर देते हैं। उनके पास ऐसी कौन सी विधि है, जो वर्षों पत्रकारिता करते हुए पत्रकार को नहीं मालूम?

आज तो गजब ही हो गया। आज तक न्यूज चैनल पर एग्जिट पोल प्रसारित हुआ, जिसमें कांग्रेस को 30 से 42 और भाजपा को 32 से 44 सीटें दी हैं। इसी प्रकार विभिन्न चैनलों से अलग-अलग आंकड़े ही मिले हैं। ऐसे में कैसे अनुमान लगे कि कौन कितना सच्चा है।

आज अनेक राजनेताओं, पत्रकारों और जनता के लोगों से बात की। सभी कंफ्यूजन में हैं कि स्थानीय पत्रकारों की बात सच मानें या न्यूज चैनल के एग्जिट पोल की और अधिकांश जगह से जब इस बारे में निर्णय लेने को कहा जाता है तो जवाब यही मिलता है कि बड़ा कंफ्यूजन है भाई, कुछ कह नहीं सकते। जनता की स्थिति से तो ऐसा लगता है कि भाजपा यदि अपने बूते पर बहुमत प्राप्त कर सरकार बना ले तो बहुत बड़ी बात होगी और यदि इन चैनल वालों की बात की जाए तो ऐसा लगता है कि भाजपा के अतिरिक्त अन्य कोई पार्टी हरियाणा में अस्तित्व में है ही नहीं।

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