गुरुग्राम में अग्रवाल की नाम-वापसी खूब रास आई भाजपा को

मुकेश शर्मा : राजनीतिक विश्लेषक

निवर्तमान विधायक उमेश अग्रवाल की राजनीतिक-शक्ति के दम पर उनकी धर्मपत्नी अनीता अग्रवाल के माध्यम से भरवाया गया नामांकन गुरुग्राम के भाजपा प्रत्याशी सुधीर सिंगला के लिए बड़ा चुनावी संकट समझा जा रहा था और गुरुग्राम सीट का चुनावी-गणित भी गड़बड़ा गया था।लेकिन इसी दौरान हुई ‘मनोहर गतिविधियों’ के चलते यह नामांकन वापस क्या हुआ कि भाजपा प्रत्याशी सुधीर सिंगला का चुनाव प्रचार स्पीड पकड़ता चला गया।

उसका परिणाम यह है कि जितने भी प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, वे अपना मुकाबला प्रायः भाजपा के नये चेहरे बताये जा रहे सुधीर सिंगला के साथ ही मान रहे हैं।इससे भाजपा की चुनावी-स्थिति का संकेत मिल जाता है।शहर में एक शरीफ़,सज्जन वकील की छवि वाले सुधीर सिंगला पूर्व मंत्री एवं हरियाणा भाजपा के स्तम्भ रह चुके स्व.सीताराम सिंगला के पुत्र हैं।बताया जाता है कि सारा दिन पिताजी को सामाजिक, राजनैतिक गतिविधियों में व्यस्त देख युवा सुधीर कहते थे कि वे राजनीति में नहीं आना चाहेंगे।लेकिन भाग्य उनकी राह देख रहा था।गुरुग्राम में पूर्व मंत्री सीताराम सिंगला के निधन पर तो कभी शीतला माता मंदिर परिसर में भाजपा के बड़े दिग्गज आये तो वहां शरीफ चेहरे-मोहरे वाले सुधीर उनकी निगाहों में आ गए और भाग्य ने उन्हें वह माफिक समय दिखा दिया,जिसकी शायद उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।

भाग्य की विडम्बना देखिए कि 2014 के चुनाव में हरियाणा में जीत का नया कीर्तिमान बना देने वाले विधायक उमेश अग्रवाल समर्थित नामांकन वापस ले लिया गया और भाग्य के धनी सुधीर सिंगला पॉजिटिव चुनावी-रथ पर सवार हो गए।इसे कहते हैं प्रारब्ध।

भाजपा की धुर-विरोधी कांग्रेस के प्रत्याशी सुखबीर कटारिया उन्हें चुनौती दे रहे हैं।सरपंच, पार्षद, ब्लॉक समिति उपाध्यक्ष से विधायक, मंत्री तक का सफर तय करने वाले सुखबीर कटारिया ने अपना राजनीतिक-निर्माण स्वयं किया और इन पदों से उनके राजनीतिक अनुभव का अनुमान लगाया जा सकता है।अग्रवाल के नामांकन के साथ ही उनका चुनाव इस अनुमान के साथ उठना शुरू हुआ कि शायद दो वैश्य समाज के प्रत्याशियों की खींचतान के बीच वे कोई करिश्मा दिखा पायें।लेकिन इधर अग्रवाल का नामांकन वापस और उधर उनकी ‘सोनिया गांधी की जय’ वाली स्टेटमेंट के भ्रामक प्रचार ने उनके संघर्ष को बढ़ा दिया।

बाद में डैमेज-कंट्रोल में जुटे सुखबीर कटारिया ने अपने ‘भारत माता की जय’ सम्बन्धी बयान की पूरी वीडियो जारी करके यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि इस वक्तव्य के पीछे उनकी कोई गलत भावना नहीं थी,बल्कि वे भाजपा की असफलताओं को ‘भारत माता की जय’ नारे से छिपाने की नीति को उजागर कर रहे थे।किंतु तब भी जागरूक वोटर्स के अनुसार यह प्रश्न अनुत्तरित समझा गया कि भला कांग्रेस के राज में ही किसी राजनीतिक व्यक्ति-विशेष की जय क्यों?

इस चुनाव में गुरुग्राम में जिस निर्दलीय प्रत्याशी की उपस्थिति ने सभी को चौंकाया है,वे हैं यहां के सबसे कम उम्र वाले सीरियस कैंडिडेट मोहित मदनलाल ग्रोवर।अपनी आर्थिक शक्ति और चुनावी-चालों से उन्होंने मतदाताओं का ध्यान आकर्षित किया और बड़ी चुनौती के रूप में उभरने की कोशिश करते नज़र आए।

निर्दलीय प्रत्याशी गजेसिंह कबलाना तो मानों सुखबीर कटारिया के लिए ही यहां अवतरित हुए हैं।इन दोनों के काफी कॉमन वोट हैं और नौ सौ मीटर के दायरे में ये एक-दूसरे के वोटों का विभाजन कर देते हैं।एयरफोर्स फोर्स से रिटायर्ड गजेसिंह कबलाना कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रह चुके डॉ.अशोक तंवर की टीम के हैं और तंवर के इस्तीफे के साथ कड़े संघर्ष की राह पर आ गए हैं।

निगम पार्षद अश्विनी शर्मा और निगम में अधिकारी रह चुके राव भोपाल सिंह ने भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव में रूचि रखने वालों का ध्यान आकर्षित किया है।ये दोनों ही चुनावी-चुनौती पेश कर देने के गम्भीर प्रयास कर रहे हैं।आम आदमी पार्टी के रणबीर सिंह राठी शिक्षित और जन-समस्याओं की अच्छी समझ रखने वाले प्रत्याशी हैं,किंतु हरियाणा में आम आदमी पार्टी के जनाधार की स्थिति से प्रायः सभी वाकिफ ही हैं।

इनके अलावा जजपा के सूबे सिंह,इनेलो के ब्रह्मप्रकाश,बसपा के नरेन्द्र सिंह,लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के तविन्द्र सैनी,एसयूसीआई(कम्युनिस्ट)के वजीर सिंह,जेडीयू के गोविंद नारायण,स्वराज इंडिया के सैलजा भाटिया, निर्दलीय कुलदीप जाँघू,दिनेश कुमार आदि भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

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