इस बार पंजाबी मतदाता करेगा भिवानी सीट पर हार-जीत का फैसला

भाजपा समर्थक समझे जाने वाला पंजाबी वोटर नहीं नहीं कर पाया निर्णय, भाजपा प्रत्याशी की पंजाबी नेताओं से बैठक रही बेनतिजा, चोथी बार मुकाले में आए डाक्टर भारद्वाज के चुनाव अभियान की गति धीमी

ईश्वर धामु 

भिवानी।  भिवानी विधानसभा सीट से लगातार तीसरी बार जीत हासिल करने के लिए भाजपा प्रत्याशी के रूप में एक बार फिर फिर घनश्याम सर्राफ मैदान में हैं। उनका अब चोथी बार मुकाबला डाक्टर शंकर भारद्वाज से हैं। इससे पहले सर्राफ ने डाक्टर भारद्वाज को 2009 और 2014 में हराया था। डाक्टर भारद्वाज 2005 में कांग्रेस की टिकट से घनश्याम सर्राफ से चुनाव जीते थे। अब एक बार फर दोनो आमने -सामने हैं। लेकिन इस बार डाक्टर भारद्वाज जन नायक जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। उन्होने लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ दी थी और भाजपा में शामिल हो गए थे। लोकसभा चुनाव में उन्होने भाजपा के लिए प्रचार किया और रेडमैन धर्मबीर सिंह का साथ लिया। परन्तु विधानसभा के इन चुनावों में सांसद रेडमैन उनको टिकट नहीं दिला पाएं तो अंतिम समय में डाक्टर भारद्वाज ने जेजेपी का दामन थामा और टिकट हासिल कर ली।

इस मुकाबले को तिकोना बना रहे हैं कांग्रेस के प्रत्याशी अमर सिंह। उनको पूर्व मंत्री किरण चौधरी ने टिकट दिलवाई है और उनका पूरा चुनाव भी किरण चौधरी की अगुवाई में लड़ा जायेगा। भिवानी सीट पर ब्राह्मण, राजपूत, जाट और बनिया जातियां समान रूप से प्रभावी हैं। पर भिवानी सीट को बनिया और ब्राह्मण की सीट माना जाता है। परन्तु इस बार भाजपा की टिकट के लिए पहली बार पंजाबी नेता ने अपना सशक्त दावा पेश किया था। नगर पार्षद हर्षदीप डुडेजा ने पूरी ताकत से भाजपा टिकट के लिए जोर लगाया। उनका नाम अंतिम समय तक पैनल में बताया गया। एक समय तो लगा था कि भाजपा की टिकट उसी को मिल भी जायेगी। परन्तु राजनैतिक हालातों ने करवट बदली तो भाजपा ने सिटिंग विधायक घनश्याम सर्राफ को ही मैदान में उतार दिया। जबकि प्रारम्भ में कहा जाता था कि जिन एक दर्जन सिटिंग विधायकों की भाजपा टिकट काट रही है, उनमें घनश्याम सर्राफ का नाम भी शामिल है। परन्तु तेजी से बदले हालातों  में सर्राफ को टिकट मिल गई। अब पार्षद हर्षदीप को चाहे टिकट न मिली हो पर उनके टिकट के संषर्घ ने पंजाबी वोटर को झंझोड़ दिया। अब पंजाबी वर्ग को पहली बार भिवानी सीट पर अपनी ताकत का एहसास हुआ है।

अब तो आम चर्चा हो गई है कि अगर भिवानी से पंजाबी को टिकट मिलती तो वो आसानी से जीत हासिल करता। पर अब पहली बार पंजाबी वोटर एकजूट नजर आ रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार प्रत्याशी के समर्थन को लेकर पंजाबी समाज की दो मिटिंग हो चुकी है। परन्तु अभी तक पंजाबी समाज किसी एकमत निर्णय पर नहीं पहुंचा हैं। दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी ने पंजाबी नेताओं से बैठकें की हैं। परन्तु वें भी उनको किसी मौड़़ तक ले जाने में कामयाब नहीं हुए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सर्राफ ने पार्षद हर्षदीप डुडेजा के साथ बैठक की है। लेकिन सर्राफ इस बैठक में उठे सवालों का जबाब नहीं दे पाएं। बैठक में जो मौजूद थे, उनका कहना था कि विधायक के रूप में सर्राफ जनभावनाओं पर खरे नहीं उतरे हैं। वें जनसमस्याओं का समाधान करवाने में भी असफल रहे हैं।

भिवानी सीट पर बने नए राजनैतिक हालतों के अनुसार इस बार पंजाबी मतदाता निर्णायक भूमिका अदा करेगा। लेकिन अभी तक पंजाबी समाज ने भाजपा प्रत्याशी को अपना समर्थन दिया नहीं है। जबकि आम धारणा है कि पंजाबी वोट भाजपा को जायेगा। परन्तु भिवानी सीट पर हालात हट कर हैं। दूसरी ओर चार चुनाव लड़ चुके डाक्टर शंकर भारद्वाज अभी तक पंजाबी समाज तक पहुंच ही नहीं पाए हैं। देखना होगा कि जीत में अहम् भूमिका निभाने वाला पंजाबी वोटर किसके समर्थन में आता है? 

○ साभार दैनिक उत्तम हिन्दू

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