ट्विंकल और आसिफा से उठे सवाल

आखिर मोमबतियां कब रोशनी देंगीं नेताओं को ?

 कमलेश भारतीय 

ट्विंकल और आसिफा जैसी बच्चियों से जो घिनौने कांड हुए उनसे रूह कांप उठती है । हालांकि ये पहले या आखिरी कांड नहीं हैं । दिल्ली की निर्भया से लेकर जेसिका लाल तक कितनी तरह के कांड सामने आते रहे हैं । मोमबतियां जला कर जंतर मंतर पर कितनी बार प्रदर्शन किए गये । क्या इनका कोई असर पडा ? या इनका किसी ने नोटिस लिया ? वैसे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कहते रहे हैं कि यदि पुलिस का नियंत्रण हमारी सरकार के अधीन दिया जाए तो वे इसके जिम्मेवार माने जायेंगे । अभी तक पुलिस केंद्र सरकार के अधीन है । हालांकि केजरीवाल यह आरोप भी लगा चुके कि मेरा सुरक्षाकर्मी मेरी हत्या कर सकता है । जब मुख्यमंत्री खुद ही सुरक्षित नहीं तो वे किसी निर्भया की सुरक्षा क्या कर पायेंगे ?

इधर फिल्म अभिनेता अनुपम खेर का एक फोटो वायरल हो रहा है जिसमें वे स्लेट पर जस्टिस फार ट्विंकल लिखे हुए हैं । किसी ने इसके नीचे बहुत अच्छा कमेंट पोस्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी आपके , यूपी की ट्विंकल के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आपकी भाजपा के , सारा मीडिया किसकी गोदी में मोदी के । फिर जस्टिस किससे मांग रहे हो और सुरक्षा कौन देगा ? आप ही सुरक्षा देने वाले और आप ही सुरक्षा मांगने वाले । कमाल है न ? 

लडकियों की असुरक्षा को लेकर मां बाप व अभिभावक चिंतित रहते हैं । इसीलिए लडकियों कै जन्म से पहले भ्रूण हत्या का शिकार होना पडता है । प्रधानमंत्री मोदी बेटी बचाओ से बेटी पढाओ तक का नारा हरियाणा के पानीपत से कर गये और हरियाणा की वाह वाह भी लेकिन समस्या जस की तस ।आखिर मोमबतियां कब रोशनी देंगीं नेताओं को ?

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