कुछ तो गडबड है , जांच सुस्त क्यों ?

कमलेश भारतीय

सीआईडी का बडा लोकप्रिय डायलाॅग – दया , कुछ तो गडबड है । दरवाजा तोडो । यूपी के शाहजहांपुर के स्वामी चिन्मयानंद पर लाॅ की छात्रा से दुष्कर्म मामले की सुस्त चल रही जांच को लेकर यही डायलाॅग याद आ रहा है – कुछ तो गडबड है । चिन्मयानंद भाजपा नेता ही नहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं । उनके मुमुक्षु आश्रम के काॅलेज में लाॅ की छात्रा से दुष्कर्म का मामले को खूब चर्चा मिल रही है । वीडियो वायरल कर यह लडकी अंडरग्राउंड हो गयी थी । बाद में अपने दोस्त के साथ राजस्थान में मिली लेकिन उसने यूपी जाने से खतरा बता कर दिल्ली में रखे जाने की बात कही ।

उसे दिल्ली ही रखा गया है । वैसे जांच के लिए शाहजहांपुर लाया गया था क्योंकि छात्रा का कहना था कि उसके कमरे में सबूत हैं । छात्रा का आरोप है कि स्वामी चिन्मयानंद ने एक वर्ष तक यौन शोषण किया । छात्रा से तो लगातार पूछताछ चली लेकिन चिन्मयानंद को मीडिया के शोर मचाने पर मुश्किल से पूछताछ शुरू की गयी । छात्रा ने धमकी दी है कि यदि उसके आग लगा लेने से ही एफआईआर दर्ज की जाती है तो वह इसके लिए भी तैयार है । यह नौबत क्यों ? एक छात्रा पर ही सारा लांछन मढ देना या उसका चारित्रिक हनन करना ही क्या न्याय देने से इंकार नहीं है ?

राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल और किसे कहेंगे ? अब नयी बात सामने आई है कि लाॅ छात्रा की मां को इसी वर्ष मुमुक्षु आश्रम के काॅलेज में शिक्षिका नियुक्त किया गया था । क्या यह गुप्त समझौते का प्रयास था ? या अपने दुष्कर्म को छिपाने की कीमत ? जो भी हो उन्नाव की लडकी आज भी अस्पताल में अपनी सांसें ले रही है और जिंदगी मौत की लडाई लड रही है तो लाॅ छात्रा आग छिडक कर मर जाने की धमकी दे रही है । यह कैसी कानून व्यवस्था है ? क्या यही बेटी बचाओ का नारा है कि बेटियां मुंह छिपाती फिर रही हैं ?

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