प्रो सुनीता श्रीवास्तव : शिक्षक और शिष्य में पैसा आडे आ रहा

कमलेश भारतीय

शिक्षक और शिष्य के संबंधों के बीच पैसा आडे आ रहा है क्योंकि प्लस टू के बाद से ही पैसे के कारण अजीब सा रिश्ता बन जाता है । यहीं से समस्या शुरू होती है शिक्षक और शिष्य के बीच । ये दूरी यूनिवर्सिटी तक खींची चली आती है । यह कहना है गुजवि के कुलपति प्रो टंकेश्वर कुमार की धर्मपत्नी प्रो सुनीता श्रीवास्तव का । वे गुजवि में फिजिक्स विभाग में प्रोफैसर हैं । बनारस में जन्मी , दिल्ली -चेन्नई और चंडीगढ में शिक्षित सुनीता ने पंजाब विश्विद्यालय से बीएससी , एमएससी , एम फिल और पीएचडी की ।

पहली जाॅब कहां की ?

नारायणगढ के गवर्नमेंट काॅलेज में और दूसरी डी ए वी काॅलेज , चंडीगढ में ।

पंजाब यूनिवर्सिटी में कब से ?

सन् 1999 से फिजिक्स विभाग में । आजकल गुजवि में ।

स्कूल काॅलेज में किन गतिविधियों में भाग लेती थीं ?

स्पोर्ट्स में । एथलीट रही । दिल्ली के स्कूल में थ्री स्टार एथलीट ।

इसके अतिरिक्त क्या अच्छा लगता है यानी शौक क्या हैं ?

हिंदी व अंग्रेजी साहित्य में कविता । खुद भी अंग्रेजी में कविताएं लिखती हूं ।

और क्या ?

चंडीगढ में रहते समय सेवा भारती पत्रिका की सहसंपादिका रही और विज्ञान व तकनीक के अच्छे लेखों का अनुवाद किया । साइंस पत्रिका में मेरे लेख प्रकाशित हुए ।

इनके अतिरिक्त क्या रूचि है ?

खाना बनाना और संगीत सुनना ।

कौन प्रिय गायक ?

जगजीत सिंह व गुलाम अली । शास्त्रीय संगीत भी सुनती हूं ।

ऐसा शौक कैसे लगा ?

मेरे पापा बहुत सुनते थे । वहीं से यह शौक लग गया ।

शिक्षक , शिष्य और शिक्षा का संबंध ऐसा क्यों ?

पैसा आडे आ गया । शिष्य समझते हैं कि हम पे कर रहे हैं । यही जड है समस्या की । शिष्यों से दोस्ती का स्तर रखना चाहिए और उनकी जिज्ञासा शांत करनी चाहिए ।
हमारी शुभकामनाएं प्रो सुनीता श्रीवास्तव को ।

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