महाराणा प्रताप की जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित किये

स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने स्वाभिमान व स्वतत्रंता के प्रतीक महाराणा प्रताप की जयंती पर महाराणा प्रताप चौक स्थिति उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करकेे अपनी भावभीनी श्रद्धाजंली दी। कपिल यादव, अमन एडवोकेट, यश यादव व अजय कुमार ने भी अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये। इस अवसर पर विद्रोही ने कहा कि स्वाभिमान व स्वतंत्रता के लिए लडने वालों को लोग न केवल सैकडों वर्षो तक याद करते है अपितु उनके जीवन से प्ररेणा भी लेते है। इसका जीता-जागता उदाहरण मेवाड के महाराणा प्रताप है।

15वीं सदी में महाराणा प्रताप के दौर में हिन्दुस्तान पर मुगल सम्राट अबकर का वर्चस्व था। उस समय के हिन्दुस्तान के अधिकांश राजा-महाराजाओं ने जब सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार करके उनके आगे नतमस्तक हो गए थे, तब उस दौर में भी महाराणा प्रताप ने अपनी स्वतंतत्रा व स्वाभिमान को नही त्यागा। विद्रोही ने कहा कि विपरित परिस्थितियों से भी जूझते हुए महाराणा प्रताप ने सम्राट अकबर की गुलामी स्वीकार करने की बजाय युद्ध में हारने व अपने सगे भाई द्वारा विश्वासघात करने पर गुलामी की बजाय संघर्ष को महत्व दिया और वे अपना किला छोडक़र जंगलों में चले गए जहां उनके बेटे-बेटियों ने घास की रोटियां खाकर भी अपना जीवन यापन किया, लेकिन तब भी महाराणा प्रताप झुके नही और अपने स्वाभिमान व स्वतत्रंता के लिए लडना ही श्रेष्ठ समझा। हल्दी घाटी के मदान में लड़ते-लड़ते महारणा प्रताप शहीद हो गए, लकिन अपनी आन-बान व शान को नही छोडा। ऐसे महान सपूत व राष्ट्र भक्त महाराणा प्रताप की जयंती पर आज भी हमे प्ररेणा मिलती है। ऐसे महापुरूष को शत-शत नमन। 

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