हिन्दी ने प्रगति कर पूरे देश व दुनिया में अपना विशेष स्थान बनाया है

14 सितम्बर 2019, हिन्दी दिवस पर स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आमजनों से अपील की कि वे व्यक्तिगत जीवन में ज्यादा से ज्यादा हिन्दी का प्रयोग करके हिन्दी को यर्थाथ में राष्टï्रभाषा का दर्जा दे। विद्रोही ने कहा कि 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा में हिन्दी को राष्टï्रभाषा का दर्जा देने का निर्णय किया और तभी से हर वर्ष इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

विद्रोही ने कहा कि देश की आजादी के 72 वर्ष के इतिहास में हिन्दी ने काफी प्रगति करके पूरे देश व दुनिया में अपना विशेष स्थान बनाया है जो पूरे देश के लिए गौरव की बात है। लेकिन अभी तक हम अंग्रेजी के वर्चस्व को देश में तोड़ नही पाये है और अंग्रेजी के मुकाबले में देश में हिन्दी को स्थान मिलना चाहिए था, वह अभी तक नही मिला है। आरएसएस जैसे कथित सांस्कृतिक संगठनों द्वारा अपनी साम्प्रदायिक विचाराधारा को लोगों पर थोंपने के कुप्रयास से भाषा के नाम पर देश के विभिन्न क्षेत्रीय भाषाए बोलने वाले लोगों ने हिन्दी को अपने ऊपर जबरदस्ती थोपने की बात कहकर हिन्दी का विरोध किया।

विद्रोही ने कहा कि यदि निजी राजनैतिक स्वार्थो को छोडक़र समन्वय व सदभाव के साथ गैर हिन्दी भाषी लोगों को हिन्दी अपनाने को प्रेरित किया जाता तो हिन्दी को सही अर्थो में आज राष्टï्रभाषा का सम्मान मिल गया होता। विद्रोही ने कहा कि आज हिन्दी दिवस पर हमे मिलकर संकल्प करना चाहिए कि क्षेत्रिय भाषाओं व गैर हिन्दी भाषी लोगों की भावना का सम्मान करते हुए कैसे हिन्दी की स्वीकार्यता को और अधिक बढ़ाया जाये, इस पर मिलकर सार्थक प्रयास करेंगे।

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