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तिरंगा अभियान से उपजी विसंगतियों और अपमान पर ध्यान दे सरकार
चलाये जा रहे इस प्रोपेगैंडा का हिस्सा बनना नागरिकों की मजबूरी 
26 जनवरी आयी लेकिन कोई विशेष उत्साह कहीं नज़र नहीं आया सिवाय कांग्रेस के नेताओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं में 
 ‘ कोउ नृप भये हमें का हानि ‘ वाली  सोच बहुत शक्तिशाली, जब तक कि आम आदमी को अपना लाभ – हानि किसी के  शासक होने या न होने से नज़र ना आए 

अशोक कुमार कौशिक 

दिसंबर 1929 रावी के किनारे  कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन । यह तय किया गया कि 26 जनवरी 1930 को अंग्रेजी राज से स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाएगा और जगह-जगह राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा। इस बार भी 26 जनवरी आयी लेकिन कोई विशेष उत्साह कहीं नज़र नहीं आया सिवाय कांग्रेस के नेताओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं में । अब भाजपा ने तिरंगे को लेकर अमृत महोत्सव का आयोजन किया है जो इस माह के अंत तक जारी रहेगा।

गांधी जी कारण जानते थे । स्वतंत्रता ऐसा विचार है जिसको लोग समझ नहीं पाते क्योंकि यह एक तरह का एब्स्ट्रेक्ट विचार है जो आम आदमी के लिए कोई महत्व नहीं रखता । आम आदमी को सिर्फ इस बात से मतलब होता है कि मुझे क्या फा़यदा होने वाला है। आजा़दी से आम आदमी को क्या फायदा होगा यह उसे समझ में नहीं आया था कभी भी और ना ही आज आता है । ‘ कोउ नृप भये  हमें का हानि ‘ वाली  सोच बहुत शक्तिशाली होती है। जब तक कि आम आदमी को अपना लाभ – हानि किसी के शासक होने या न होने से नज़र ना आए । 

* केंद्र सरकार ने फ़्लैग कोड में कुछ बदलाव किये हैं।

पहले तिरंगे को सूर्योदय के बाद व सूर्यास्त से पहले ही फहराने का नियम था, नए कोड के अनुसार अब रात के समय भी तिरंगा फहराया जा सकेगा।

अब तक पॉलिस्टर कपड़े से बने झंडे को फहराने पर पाबन्दी थी, लेकिन नए कोड के अनुसार नियमों में बदलाव किया गया है। नए नियमों के तहत, अब राष्ट्रीय ध्वज मशीनों से तैयार हुए कपास, पॉलिस्टर, ऊनी और रेशमी से बने राष्ट्रीय ध्वज को भी फहराने की अनुमति है।

परेड, जुलूस में झंडा दाहिने ओर लेकर चलना होगा, किसी भी विज्ञापन के तौर पर झंडे का उपयोग नहीं होगा, सभा में मंच पर तिरंगा इस प्रकार फहराया जाएगा कि जब वक्ता का मुंह श्रोताओं की ओर हो तो तिरंगा उनके दाहिने और होगा।

 झंडे को स्फूर्ति से फहराया जाए, और धीरे-धीरे आदर के साथ उतारा जाए। उल्लंघन करने पर सजा का है प्रावधान, राष्ट्रीय ध्वज फहराते समय सम्मान का रखें ध्यान, जाने अनजाने अपने राष्ट्रीय गौरव का अपमान करने की स्थिति में व्यक्ति को सजा भुगतनी पड़ सकती है। इसके लिए 3 साल कारावास व अर्थदंड अथवा दोनों सजा एक साथ का है प्रावधान।

सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और फ़ोटोज की भरमार है जिनमें भाजपाइयों द्वारा निकाली जा रही तिरंगा यात्रा में तिरंगा उल्टा लटका हुआ है। बाकी प्रेसीडेंट महोदया को भी श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के स्थान पर द्रौपदी मुर्मुर बना दिया गया है। लेकिन ये सेकंडरी चीज है ।‌ उल्टा झंडा आप स्पष्ट रूप से देख सकते हैं ।‌ साथ ही सरकार द्वारा विक्रय किये जा रहे राष्ट्रीय ध्वजों के आकार, रंगों के अनुपात और उनके मैटीरियल का भी आंकलन कर सकते हैं। बाकी इस अभियान के परिणाम इस माह के अंत तक आप सब अपनी आँखों से देखेंगे ही देखेंगे। पूरे देश भर में अनेक मामले इस प्रकार के सामने आ रहे हैं। हरियाणा के नांगल चौधरी के भाजपा विधायक डॉ अभय सिंह द्वारा शनिवार को निकाली गई तिरंगा यात्रा में भी राष्ट्रीय ध्वज के अपमान देखने को मिला। रैली में शामिल एक व्यक्ति ने उल्टा राष्ट्रीय ध्वज लहराया हुआ था, वही दूसरे युवक ने राष्ट्रीय ध्वज को अपने मस्तक पर बांधा हुआ था।

 “हर घर तिरंगा” के नाम पर राष्ट्रीय ध्वज का जो अपमान हो रहा है जो इस माह के अंत तक होगा, वैसा आज तक कभी नहीं हुआ होगा । विक्रय किये जा रहे राष्ट्रीय ध्वज हमें प्राप्त हुए, जिनका आकार, रंगों का अनुपात और इनका मैटीरियल किसी भी तरह से राष्ट्रीय ध्वज हेतु निर्धारित प्रोटोकॉल के सापेक्ष नहीं है । इस अभियान के दौरान और इसके बाद देश भर के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रीय ध्वज के कथित सम्मान के नाम पर उसका अपमान ही होगा, लेकिन अफ़सोस कि राष्ट्रवाद के नाम पर फासीवादी सरकार के द्वारा चलाये गए इस प्रोपेगैंडा का हिस्सा बनना नागरिकों के लिए मजबूरी सा बनता जा रहा है। इस अभियान का हिस्सा न बनना लोगों को अपराधबोध से ग्रस्त कर रहा है। इस अभियान के नाम पर तिरंगे का अभूतपूर्व अपमान होना सुनिश्चित है। 

अब यह सवाल उठ खड़ा होता है कि राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने पर क्या सजा दी जाएगी ? शायद नहीं, देशभर में अपमान के अनेकों मामले को लेकर सोशल मीडिया भरी पड़ी हैं। क्योंकि मामला भाजपा व सरकार से जुड़ा है इसलिए कार्रवाई करेगा कौन?

* तिरंगा अभियान से उपजी विसंगतियों और अपमान पर ध्यान दे सरकार

आज़ादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत भारत सरकार ने देश के 20 करोड़ घरों पर तिरंगा फहराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस मकसद को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय ध्वज संहिता में बदलाव किए गए हैं ताकि इतनी बड़ी तादाद में तिरंगा सबको उपलब्ध करवाया जा सके। पूरी सरकारी मशीनरी जब इस काम में लगी है तो लक्ष्य तो पूरा हो ही जाएगा। लेकिन अच्छा होता अगर इस आपाधापी में उपजी विसंगतियों पर भी सरकार का ध्यान जाता।

मसलन, सोशल मीडिया पर हाथरस ज़िले के किसी स्कूल का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक अध्यापक छोटे-छोटे बच्चों से तिरंगे के लिए 15-15 रुपए लाने की बात कर रहा है। वे बच्चे जिनके मां-बाप पांच रुपए भी बड़ी मुश्किल से दे पाते होंगे, वे 15 रुपए कहां से और कैसे लेकर आएंगे- अध्यापक इस बात से बेपरवाह नज़र आता है और इससे भी कि सरकारी भाषा में कही जा रही बात को मासूम बच्चे कितना समझ पा रहे होंगे।

इसी तरह की एक ख़बर ओर है कि फरीदाबाद में एक राशन दुकान संचालक ने झंडा खरीदे बिना राशन न देने का एक संदेश व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजा । उसने लिखा है कि उसकी दुकान से जुड़े सभी राशन कार्ड धारक 20 रुपए लेकर डिपो पर झंडा लेने पहुंचें। ऐसा न करने वालों को अगस्त महीने का गेहूं नहीं दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि हरियाणा में सभी जिले की राशन दुकानों को खाद्य आपूर्ति विभाग ने झंडा वितरण केंद्र बनाया है और हर दुकान को डेढ़-दो सौ झंडे अग्रिम भुगतान पर दिए गए हैं।

ख़बर यह भी है कि रेल कर्मियों के अगस्त के वेतन से 38 रुपए तिरंगे के वास्ते काट लिए जाएंगे। कई बैंक कर्मचारियों ने भी शिकायत की है कि उनकी तनख़्वाह से 50-50 रुपए तिरंगे के नाम पर उनसे बिना पूछे काट लिए गए हैं। रेल कर्मियों ने तो इस कटौती पर मज़ेदार सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जब भाजपा के दफ़्तर से तिरंगा 20 रुपए में बेचा जा रहा है, तो उनकी तनख्वाह से लगभग दोगुनी राशि क्यों वसूली जा रही है। रेल कर्मियों के संगठन ने इस वसूली पर ऐतराज़ जताया है।

माना कि 15, 20, 38 या 50 रुपए की रकम बहुत मामूली है, लेकिन वसूली का यह तरीका ठीक नहीं है। वसूली के मनमाने तरीकों से कुछ दिक्कतें भी पैदा हो सकती हैं। मान लीजिए कि कोई सरकारी या बैंक कर्मचारी इस कटौती के बाद राशन लेने जाए और वहां फिर उससे तिरंगा लेने पर ही राशन मिलने की बात कही जाए, तो वह क्या करेगा? सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले ग़रीब बच्चों के मां-बाप क्या करेंगे?

* आखिरी बात- 

सरकार को पूरी पारदर्शिता के साथ बताना चाहिए कि वेतन कटौती, भाजपा कार्यालयों तथा राशन की दुकान से जो राशि इकठ्ठा की जा रही है, वह कुल कितनी होगी और कहां खर्च की जाएगी। जब आयकर चुकाने वाले मुट्ठी भर लोग कह सकते हैं कि उनके टैक्स का पैसा किसानों की कर्ज माफ़ी या लोगों को मुफ़्त चीज़ें बांटने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, तो सरकारी मुलाजिम भी तो जानें कि उनकी तनख्वाह का हिस्सा- जो ज़रा सा ही क्यों न हो, किस काम में लगने वाला है। आम आदमी को भी यह हक है उससे लिया जा रहा पैसा आखिर कहां जमा होगा और किस काम में इस्तेमाल किया जाएगा?

अरे मेरे प्यारे देशवासियों, तुम्हें अपनी देशभक्ति साबित करने की जरूरत नहीं है, क्यों बावले हो रहे हो । तुम अपनी मिट्टी के प्रति हजारों साल से वैसे ही वफादार रहे हो। तुम्हारे पूरखों ने ही तो इस सर-जमीं को अपने खून पसीने से सींचा है। फिर किसको और क्यों दिखा रहे हो कि हम भी देशभक्त हैं। ये गर्व से ज्यादा शर्मिंदगी की बात है कि तुम्हें भी अपने हाथ में तिरंगा झंडा पकड़ कर इस देश के प्रति अपनी वफादारी का सबूत पेश करना पड़ रहा है। 

तुम देख नहीं रहे हो क्या? तुम्हारे भाई और बेटे रोजाना ही इस देश की सरहदों से अपनी शहादत देकर तिरंगों में लिपट कर घर आ रहे हैं। अभी हाल ही में Comman Wealth Games में पदकों से इस देश की झोली आपके भाई और बेटों ने ही तो भरी है।

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