• Thu. Sep 29th, 2022

Bharat Sarathi

A Complete News Website

-मनोहर लाल के होते हुए हरियाणा में किसी से भेदभाव नही होगा: सीएम
-पटौदी स्थित आश्रम हरि मंदिर में अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय अधिवेशन में संतो का आशीर्वाद लेने पहुँचे थे मुख्यमंत्री
शासन व्यवस्था भौतिक विकास तो कर सकती है, सभ्य समाज का निर्माण केवल संत समाज ही कर सकता है- सीएम
लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता के माध्यम से जनसेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म व कर्तव्य- मनोहर लाल

गुरुग्राम, 25 जून। मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि जिस प्रकार से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं को प्रधानमंत्री ना कहते हुए देश का प्रधान सेवक कहा है, उसी प्रकार से हरियाणा प्रदेश में मेरी भूमिका मुख्य सेवक की है। मुख्यमंत्री आज अखिल भारतीय संत समिति के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्धघाटन समारोह में शामिल होने पटौदी स्थित आश्रम हरि मंदिर पहुँचे थे। अधिवेशन में धर्म रक्षा, राष्ट्र रक्षा व राष्ट्र निर्माण से सम्बंधित विषयों पर मंथन के लिए देश के विभिन्न राज्यों व 13 अखाड़ा परिषद के साधु संत शामिल थे। अधिवेशन में शामिल संतो ने मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल को पगड़ी व माला भेंट कर उन्हें अपना आशीवार्द दिया।

मुख्यमंत्री ने अधिवेशन में उपस्थित संत समाज के प्रतिनिधियों को शॉल व पुष्पमाला भेंट करने उपरान्त अपने संबोधन में कहा कि संतो के इस राष्ट्रीय अधिवेशन में आकर वे अभिभूत है कि आज उन्हें एक ही मंच पर पूरे देश के संत समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों के दर्शन व आशीर्वाद प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि आज की लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता के माध्यम से जनसेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म व कर्तव्य है। प्राचीनकाल में जब राजशाही का समय था तो राजा से कोई गलती होने पर धर्म के पुरोधा राजा के सर पर मयूर पंख रख कर उसे आभास दिलाते थे कि शासन व्यवस्था भले ही उसे दंडित ना करे लेकिन धर्म उसे अवश्य दंड देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे संत समाज को विश्वास दिलाते हैं कि वे धर्म की मर्यादा का ध्यान रखते हुए यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी वजह से समाज में किसी भी व्यक्ति को कोई कष्ट ना हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य की प्रसिद्धि के हिसाब से उसका अपना धर्म होता है। एक विद्यार्थी का, एक पिता का, एक माता का व एक सेवक का अपना धर्म है लेकिन जब हम संतो के चरणों में बैठते हैं तभी शासन की दिशा ठीक होती है। उन्होंने कहा कि माता-पिता केवल शरीर का निर्माण करते हैं लेकिन उस शरीर को एक सभ्य नागरिक का रूप देना व राष्ट्र निर्माण के लिए मार्गदर्शन देने का कार्य संत समाज करता है। ठीक उसी प्रकार शासन व्यवस्था भौतिक विकास तो कर सकती है लेकिन सभ्य समाज का निर्माण केवल संत समाज ही कर सकता है। उन्होंने मंच से संत समाज को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे किसी भी परिस्थितियों में प्रदेश में वातावरण खराब नही होने देंगे। उन्होंने कहा कि मनोहर लाल के होते हुए हरियाणा में किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं होगा। आज हरियाणा सरकार अंत्योदय के भाव के साथ समाज के वंचित व पीड़ित वर्ग को ध्यान में रखते हुए अपनी नीतियां बना रही है व उनकी जीवनशैली में सुधार लाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

अधिवेशन के उद्धघाटन सत्र में अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष व सारसा गुजरात के सतकैवल्य ज्ञानपीठ के पीठाधीश्वर कुबेराचार्य स्वामी अविचलदास महाराज ने कहा कि अखिल भारतीय संत समिति देश के 127 संत संप्रदाय का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने कहा कई बार हमारे धार्मिक प्रयासों को राजनीति से जोड़कर देखा जाता है लेकिन संत का केवल एक ही कर्तव्य है धर्म की रक्षा करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे। उन्होंने अधिवेशन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज को जागृत करने के लिए इस अधिवेशन का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि हमें हमारी भावी पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए यह चिंतन करना होगा कि हमारे बच्चों में, हमारे घर में हिंदू संस्कार हैं या नहीं हमें इस पर ध्यान देना होगा, क्योंकि पूर्व में जब देश गुलाम था तो हमारे राजा शूरवीर तो थे लेकिन संगठित नहीं थे इसलिए भावी पीढ़ी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए हिंदुत्व की दृष्टि से समाज को संगठित होकर आगे बढ़ना होगा।

अधिवेशन में कार्यक्रम के संयोजक व आश्रम हरि मंदिर पटौदी के अधिष्ठाता स्वामी धर्मदेव ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल प्रवृति के मुख्यमंत्री है। भले ही उन्होंने भगवा धारण ना किया हो लेकिन उनके विचार व राष्ट्र निर्माण में उनके द्वारा दिया जा रहा योगदान संतो की परिपाटी को ही लक्षित करता है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के यशश्वी मुख्यमंत्री पूरे देश में ऐसे पहले मुख्यमंत्री है जिन्होंने अपने निवास स्थान को संत कबीर कुटीर का नाम दिया है।

स्वामी धर्मदेव ने कहा कि अपने धर्म का पालन करते हुए प्राण न्योछावर करना सबसे श्रेष्ठ है। उन्होनें अधिवेशन में उपस्थित जनसमूह से आह्वान करते हुए कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देने से ही आपका कर्तव्य पूरा नही होगा। आप सभी को राष्ट्र की रक्षा, बड़ों के सम्मान व अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए अपने बच्चों को तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय संत समिति से पूरे देश के करीब 70 हजार संत जुड़े हैं। जो राष्ट्रीयता की भावना को जागृत करने के लिए निरंतर लोगों के बीच जाकर उनका मार्गदर्शन करते हैं। अधिवेशन में जो भी प्रस्ताव पास होंगे उनके प्रचार व प्रसार के लिए संत समाज पूरे देश के सभी गांवों में जाएंगे।

कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए संत समाज के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।

इस अवसर पर पटौदी के विधायक सत्य प्रकाश जरावता, थानेसर के विधायक सुभाष सुधा, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार अमित आर्य, पटौदी के एसडीएम प्रदीप कुमार, तहसीलदार रीटा ग्रोवर सहित पटौदी व आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में आए श्रद्धालु उपस्थित रहे।

  • Facebook
  • Twitter
  • LinkedIn
  • Email
  • Print
  • Copy Link
  • More Networks
Copy link
Powered by Social Snap