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अप्लाइड आर्ट में मास्टर डिग्री प्राप्त छात्र भरत ने व्यक्त किये मनोभाव
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को कहा जा रहा आदिवासी, छात्र ने बताया भारतवासी
सत्तासीन सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के भी यही बोल आदिवासी राष्ट्रपति
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की टिप्पणी पर बवाल, और मााफी भी मांगी
सदन के अध्यक्ष,  राज्यपाल तथा राष्ट्रपति पदासीन होने बाद न हो राजनीति

फतह सिंह उजाला

गुरुग्राम । विधानसभा, लोकसभा, राज्यसभा, बहुमत सहित सत्तासीन होने के लिए राजनीतिक दृष्टिकोण से बहुमत या फिर सहयोगी दलों के समर्थन से बहुमत महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। यह कटु सत्य है कि किसी भी सर्वाेच्च पद पर पदासीन होना या फिर किया जाना , यह कार्य पॉलिटिकल सपोर्ट के बिना अधूरा ही लगता और रहता है । लेकिन सभी सर्वाेच्च पदों पर यह नीति और फार्मूला भी लागू नहीं होता । फिर भी इस बात से बिल्कुल इंकार नहीं कि राजनीतिक दखल अवश्य बना रहता है , लोकतंत्र में मतदान और चुनाव प्रक्रिया का विशेष महत्व बना हुआ है। मतदान के उपरांत चुने गए जनप्रतिनिधियों की संख्या से निर्धारित होता है कि किस राजनीतिक दल को बहुमत मिला या फिर सहयोगी दलों की बदौलत सत्ता की दावेदारी की जाती है ।

लेकिन इससे अधिक ऊपर उठकर जब विधानसभा , लोकसभा ,राज्यसभा के सभापति का चुनाव होता है । तो सभी राजनीतिक दल अपने समर्थक उम्मीदवार को पद पर बिठाने या चयन के लिए साम दाम दंड भेद नीति पर खुलकर अमल भी करते हैं । परंतु जब सदन में सभापति का चुनाव हो जाता है तो इसके बाद चुना गया प्रतिनिधि केवल और केवल सभापति ही होता है । ठीक यही बात देश के सर्वाेच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति पर भी लागू मानी जाती है । देश और दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा के द्वारा प्रचारित किया गया की भाजपा ने राष्ट्रपति पद के लिए आदिवासी महिला नेत्री द्रौपदी मुर्मू को अपना उम्मीदवार बनाया, दूसरी ओर विपक्ष के द्वारा यशवंत सिन्हा को अपना उम्मीदवार राष्ट्रपति पद के लिए बनाया गया । परिणाम भाजपा समर्थित द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में आया और उनके द्वारा राष्ट्रपति पद की ग्रहण करने के साथ अपना कार्यभार भी संभाल लिया गया । इस बीच कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी के द्वारा राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को लेकर की गई टिप्पणी के बाद सबसे अधिक विरोध सत्ता पक्ष भाजपा के नेताओं का ही देखने के लिए मिला है। भाजपा नेताओं के द्वारा अपना विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बार नहीं दो बार नहीं हर बार एक ही बात का ढोल पीटा गया कि कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी के द्वारा आदिवासी महिला राष्ट्रपति का अपमान किया गया है । इसके लिए सोनिया गांधी , राहुल गांधी और अधीर रंजन चौधरी सहित पूरी कांग्रेस पार्टी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और देश सहित सभी देशवासियों से माफी मांगनी चाहिए।

यहां तक तो बात समझ में आती है , लेकिन भाजपा और भाजपा के नेताओं के द्वारा आदिवासी महिला राष्ट्रपति बार-बार कहा जाने पर क्यों और किन कारणों से जोर दिया जा रहा है ? भारतीय संवैधानिक व्यवस्था में राष्ट्रपति पद सर्वाेच्च , गरिमा पूर्ण और किसी भी राजनीतिक ठप्पे कई गुना अधिक ऊंचा रहा है । वरिष्ठ पत्रकार फतह सिंह उजाला के पुत्र भरत जोकि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी से अप्लाइड आर्ट में मास्टर फाइन आर्ट की अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके है। युवा छात्र भरत के द्वारा  देश की राष्ट्रपति और उनका बार-बार आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में परिचय कराने सहित प्रसारित किया जाने को एक चित्रकार और कलाकार के तौर पर बहुत ही गंभीरता से लिया गया। इन्हीं सब बातों मुद्दों और कटाक्ष को लेकर मास्टर फाइन आर्ट की डिग्री प्राप्त युवा छात्र भरत के द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सम्मान में एक कार्टून चित्र बनाकर सभी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को एक सीख सहित संदेश देने का एक प्रयास किया गया है। भारत के नक्शे के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को हाथ में तिरंगा झंडा लिए अपनी आर्ट में दिखाया गया है । इसमें एक ही संदेश दिया गया है कि …सुनो राजनीति…सुनो राजनीति, मैं हूं केवल भारतवासी , बनाई गई आर्ट को यह नाम इसीलिए दिया गया है कि भारत के सर्वाेच्च संवैधानिक पद पर पदासीन होने सहित शपथ लेने के उपरांत महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अब किसी भी राजनीतिक दल से किसी भी प्रकार से परोक्ष- उपरोक्ष संबंध नहीं रह गया । वह देश की पहली नागरिक और राष्ट्रपति होने के साथ-साथ किसी राजनीतिक दल कार्यकर्ता से ऊपर भारतवासी ही हैं । वैसे भी भारतीय चुनाव प्रणाली और लोकतंत्र में केवल मात्र भारतवासी ही अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए, किसी भी चुनाव में अपनी दावेदारी प्रस्तुत करते हैं या फिर विभिन्न राजनीतिक दलों के द्वारा केवल और केवल भारतवासी मतदाता को ही अपना उम्मीदवार भी बनाया जाता है।

गौरतलब है कि कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में बैचलर ऑफ फाइन आर्ट पढ़ाई करते हुए वरिष्ठ पत्रकार उजाला के पुत्र भरत के द्वारा इचिंग आर्ट कैटेगरी में बनाई गई ग्राफिक आर्ट मौत के बाद की लालसा का चयन विभिन्न राष्ट्रीय स्तरीय आर्ट प्रदर्शनी के लिए कई बार हुआ और पुरस्कार भी जीते।  इतना ही नहीं 2 मिनट की बनाई गई डॉक्यूमेंट्री फिल्म को यूनिवर्सिटी स्तर पर प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है । इसके बाद एशिया की दूसरी सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में अप्लाइड आर्ट में मास्टर डिग्री के लिए मेरिट लिस्ट में छठा स्थान प्राप्त कर अपनी पढ़ाई को पूरी किया।  इसके साथ साथ करोना कॉल के दौरान तथा वर्ष 2019 में केंद्र सहित उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी तथा सीएम योगी के मार्गदर्शन में स्पष्ट बहुमत प्राप्त किए जाने पर भी छात्र भर के द्वारा बनाई गई आर्ट को लोगों के द्वारा दिल खोलकर सहारा जा चुका है ।

छात्र भरत के मुताबिक उसके द्वारा बनाए जाने वाले कार्टून आर्ट कैरीकेचर ग्राफिक विजुअल इत्यादि में पिता फतह यिंह उजाला का मार्गदर्शन हमेशा प्रोत्साहित करते हुए सजीव और सटीक चित्रण में सहायक साबित होता आ रहा है । हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के विषय में, …सुनो राजनीति …सुनो राजनीति , मैं हूं केवल भारतवासी , थीम के साथ जो ग्राफिक अथवा आर्ट तैयार किया गया। उसमें राष्ट्रपति ज्योति मुर्मू को तिरंगा झंडा दिए हुए भी दर्शाया गया है । इसके पीछे भावार्थ यही है कि केंद्र सरकार के द्वारा अगस्त महीने में पूरे देश में हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार, प्रत्येक देशवासी में राष्ट्रप्रेम जागृत करने के साथ-साथ तिरंगे के महत्व को बताने के लिए पूरे देश को तिरंगामय बनाने का काम करने जा रही है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आर्ट अथवा ग्राफिक के माध्यम से भी यही संदेश दिया गया है कि मैं भारतवासी और प्रत्येक भारतीय , भारतवासी का गौरव सहित गर्व तिरंगा झंडा ही है । कम शब्दों में बड़ी बात यही है कि तिरंगा देश की आन बान शान है । वही राष्ट्रपति पद पर पदासीन नागरिक सबसे पहले भारतवासी ही है।

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