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भारत सारथी/ऋषि प्रकाश कौशिक

गुरुग्राम। हरियाणा भर में पंचायत चुनाव में किसी भी पार्टी ने चुनाव चिन्ह पर लडऩे की हिम्मत नहीं दिखाई लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से सभी पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने में लगी हुई थीं।

सूत्रों से प्राप्त सूचना के अनुसार भाजपा ने प्रत्येक विधायक उसके क्षेत्र का पंचायत और जिला परिषद चुनाव का प्रभारी बनाया। ऐसी स्थिति में जिस अनुपात जिला पार्षद और सरपंच जीतेंगे, वह उस विधायक की उस क्षेत्र में लोकप्रियता का मानदंड होंगे। 

अब गुरुग्राम की बात करें तो गुरुग्राम का सारा क्षेत्र तो निगम ने अपने आधीन कर लिया लेकिन गुरूग्राम के साथ लगते पटौदी विधानसभा में 100 सरपंच चुनाव जीते या यूं कहें कि 100 पंचायत हैं और उनके जीतने पर यहां के विधायक ने यह दर्शाने का पूर्ण प्रयास किया कि वह सबके सब भाजपा के हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री का कार्यक्रम भी कराया और सरपंचों द्वारा मुख्यमंत्री को सम्मानित भी कराया।

आपको याद होगा कि उस समय मुख्यमंत्री को विधायक जरावता ने राजा साहब कहा था। इसके उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा था कि वह कोई राजा नहीं हैं। वह तो जनता के सेवक हैं और साथ ही उन्होंने सरपंचों को नसीहत भी दी थी कि वे भी जनता के सेवक बन कार्य करें।

इसके पश्चात विधायक सत्यप्रकाश जरावता के अनेक ब्यान आए कि वह सभी सरपंचों के साथ हैं और उन्हें ग्रांट भी दिलाएंगे। उनके इन ब्यानों पर सरपंचों में व्यापक प्रतिक्रिया हुई। अनेक सरपंचों को यह बात केवल और केवल जुमला है। यदि यह सत्य होता तो जब फरवरी 2021 से पंचायत बंद हुई थी तब इन्होंने क्षेत्र का कितना ध्यान रखा।

अनेक सरपंचों का कहना था कि हमारे क्षेत्र की सरकार द्वारा ग्राम विकास के लिए आई ग्रांट भी खर्च नहीं हुई और वह लैप्स होकर वापिस चली गई। उस समय विधायक क्या कर रहे थे?

कुछ सरपंचों से बात हुई तो उनका कहना था कि ग्रांट लगाना तो बीडीपीओ और एसडीएम का काम है और विधायक बार-बार बताते भी हैं कि उनका काम सडक़ बनवाना थोड़े ही है। उनका काम तो क्षेत्र के लिए नीतियां बनवाना है, जिसमें उन्होंने अनेक स्कूल अपग्रेड कराए, मानेसर निगम बनवाया आदि-आदि।

इस सरपंचों ने सामने से सवाल दाग दिया कि माना कि उनका काम सीधा यह नहीं है लेकिन यदि कोई अधिकारी उचित कार्य नहीं कर रहा तो उसकी देख-रेख का काम क्या विधायक का नहीं है? क्या विधायक बता पाएंगे कि उन्होंने बीडीपीओ और एसडीएम को कब कहा कि वह क्षेत्र के विकास के लिए आई हुई ग्रांट को गांवों में लगाएं और यदि बीडीपीओ और एसडीएम ने उनकी बात नहीं मानी तो क्या उन्होंने उच्च अधिकारियों को कोई पत्र लिखा कि यह लोग कार्य ठीक प्रकार से नहीं कर रहे और इन्हें निर्देश दिए जाएं कि ग्रांट लगाई जाए? हमारे पास इसका कोई उत्तर था नहीं।

इस पर मैंने विधायक सत्यप्रकाश जरावता से फोन पर इस बात की जानकारी लेनी चाही तो वहां से फोन नहीं उठाया गया। व्हाटसएप पर मैसेज डालकर पूछा गया कि भाजपा के पक्ष के आपके क्षेत्र में कितने सरपंच बने हैं तो उसका भी कोई जवाब नहीं मिला। हां, जब यह पूछा कि 10 नवंबर को मानेसर निगम पर सीएम फ्लाइंग का छापा पड़ा था, उसमें क्या हुआ तो उसके उत्तर में जरूर यह कहा गया कि वह छापा मेरे कहने से ही डला था, क्योंकि सफाई कर्मचारी काम उचित प्रकार से नहीं कर रहे थे। 

इस पर भी प्रश्न खड़ा होता है कि क्या विधायक का काम सीएम फ्लाइंग से छापा लगवाना है या अधिकारियों को निर्देश देकर उनसे भली प्रकार से कार्य कराना है? 

अब प्रश्न यह भी उठता है कि मानेसर नगर निगम उन्हीं के कार्यकाल में बना और चर्चा है कि वहां अनेक नियुक्तियां भी उनकी अनुशंसा पर ही हुई हैं। ऐसे में क्या निगम की जो टेंडर प्रक्रिया है, उससे वह संतुष्ट हैं? ठेकेदारों द्वारा जो कार्य किए जा रहे हैं क्या वह उनसे संतुष्ट हैं? इसी प्रकार के अनेक प्रश्न खड़े होते हैं। 

रविवार 27 तारीख को जिला परिषद के परिणाम भी आ जाएंगे। पंचायत चुनाव के बारे में तो यह नहीं बता पा रहे कि भाजपा समर्थक कितने सरपंच चुनाव जीते हैं। परंतु जिला परिषद चुनाव तो चुनाव चिन्ह पर ही लड़ा जा रहा है और चर्चा यह भी है कि गुपचुप तरीके से अंतिम समय में भाजपा का चुनाव चिन्ह पर चुनाव लडऩा इन्हीं के प्रयासों से संभव हुआ।

इसमें चर्चा यह भी चल रही है कि प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ भी गुरुग्राम में ही निवास करते हैं और गुरुग्राम में जिला परिषद और पंचायत चुनाव में उनकी कोई सक्रिय भूमिका नजर नहीं आई। न तो उनका कोई ब्यान आया और न किसी स्थान पर वह जनता से रूबरू हुए। इससे भी ज्यादा चुनाव के बारे में प्रदेश अध्यक्ष ने जिला कार्यकर्ताओं से भी कोई मीटिंग नहीं की।

इन सब बातों से निष्कर्ष क्या निकलेगा यह तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही दिखाई देने लगेगा। फिलहाल तो अनुमान यह है कि यदि जिला परिषद के चुनाव भाजपा के पक्ष में नहीं आए तो भाजपा में उठा-पटक होने की संभावना है।

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