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लव जिहाद…सरकारों की असफलताओं से लोगों का ध्यान भटकाने का कुप्रयास

21 नवम्बर 2020 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के निर्देश पर संघी न्यूज चैनल एक सुनियोजित रणनीति के तहत कथित लव जिहाद का मुद्दा उछालकर वोट बैंक की क्षुद्र राजनीति खातिर समाज में नफरत, बटवारे का ना केवल जहर घोल रहे है अपितु खस्ताहाल अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी, गरीबी, मोदी-भाजपा कुशासन, मंहगाई व आमजनों से जुडे मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने का कुप्रयास भी कर रहे है।

विद्रोही ने कहा कि एक सुनियोजित रणनीति के तहत भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री कथित लव जिहाद पर अलग कानून बनाने का राग अलापकर नफरत, बटवारे की आग में घी डालने का पाप कर रहे है। भारत में हर बालिग युवा को अपनी मर्जी से किसी भी धर्म, जाति, समूह में शादी करने का संवैद्यानिक अधिकार है जिस पर अपनी विभिन्न रूलिंग में सुप्रीम कोर्ट कई बार मोहर लगा चुका है। आज तक भाजपा व भाजपा शासित राज्य सरकारे यह नही बता सकी है कि कथित लव जिहाद है क्या है और इन मामलों की जांच के क्या परिणाम निकले? 

विद्रोही ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री भी फरीदाबाद के निकिता हत्याकांड के बहाने कथित लव जिहाद को प्रदेश में हवा देकर प्रदेश में कानून व्यवस्था की नाकामी व लडकियों व महिलाओं को अराजक तत्वों से सुरक्षा देने में अपनी असफलता को छुपाना चाहते है। कथित लव जिहाद के नाम से नया कानून बनाने की वकालत करने वाली भाजपा राज्य सरकारे एक तरह से खुद ही अपने-अपने राज्यों की कानून व्यवस्था की असफलता की पोल खोल रही है। विद्रोही ने कहा कि लड़कियों को बरगालकर, छदम नाम, धर्म रखकर शादी करने वाले व जबरदस्ती प्रलोभन से धर्मपरिवर्तन करवाने वाले अराजक तत्वों के खिलाफ मौजूदा कानून में ही आजीवन कारावास तक की कठोर सजा का प्रावधान पहले ही है।

सवाल उठता है कि भाजपा सरकारे ऐसे कठोर मौजूद कानून को अराजक तत्वों के खिलाफ प्रयोग क्यों नही करती? जमीनी सच्चाई यह है कि संघी कथित लव जिहाद को साम्प्रादायिक धु्रवीकरण राजनीति का हथियार बनाने का कुप्रयास के साथ अपनी सरकारों की असफलताओं से लोगों का ध्यान भटकाने का कुप्रयास कर रहे है ताकि खस्ताहाल अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी, मंहगाई, बिगड़ी कानून व्यवस्था, किसान, मजदूर, कर्मचारियों, छात्रों, युवाओं के ज्वलंत मुद्दे चर्चा का विषय ही न बने।

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