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-कमलेश भारतीय

राजनीति अब शो बन गयी है और चैनलों पर न्यूज भी एक शो से कम नहीं । विचार और विचारधारा सब गायब होते जा रहे हैं । जब जब चुनाव आने वाले होते हैं तब तब दलबदल के शो तेजी से आयोजित किये जाने लगते हैं । पहले पंजाब में ये शो देखने को मिले । अब उत्तर प्रदेश में । इससे भी पहले पश्चिमी बंगाल में ये शो भव्य स्तर पर आयोजित किये गये और चुनाव परिणाम के बाद यही बेपैंदी के लोटे जैसे लोग बैक गियर भी लगाने लगे ।

फर्क यह भी है कि पहले एक ही पार्टी के पास चाणक्य था , अब सभी पार्टियों के पास अपने अपने चाणक्य हैं । पहले एक ही पार्टी ऐसे शो आयोजित करती थी । अब दूसरी पार्टियों के शो भी सामने आने लगे हैं । उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने इस बार भाजपा को मात दे दी और अनेक विधायक व मंत्री अपने पाले में ले आई । इस पर भाजपा का चौंकना स्वाभाविक था क्योंकि वे दलबदल पर अपना एकाधिकार समझती थी । इसलिए तुरंत इस्तीफा देने वाले मंत्री के वारंट निकलवा दिये और कहा कि हम तो इनकी बात सुनने को तैयार थे । दूसरी ओर भाजपा छोड़ने वाले कह रहे हैं कि हमारी सुनवाई नहीं हो रही थी । यही नहीं दलबदल करने वाले एक डायलाॅग जरूर कहते हैं -हमें अब पार्टी में घुटन महसूस होने लगी थी । चार पांच साल तक मंत्री रहने के बाद घुटन क्यों होने लगी भाई ? पीछे कोई इन नेताओं से । क्यों मन भर गया ? तीन तीन पार्टियों में आप दलबदल कर आ गये । क्यों ? सब जगह घुटन होने लगी ?

यह दलबदल के शो पांच राज्यों में चुनाव से पहले और चुनाव के बाद आम देखने को मिलेंगे । यही तो आज लोकतंत्र और जीत की संजीवनी है । इसके बिना कोई पार्टी कुछ नहीं कर सकती । दलबदल कानून को रोज़ ठेंगा दिखाते हैं हर पार्टी वाले नेता । शान से, मुस्कुराते बड़ी बेशर्मी से पार्टी छोड़ते, बदलते रहते हैं और इनके समर्थक बहुत ही मुश्किल में फंस जाते है कि इधर जायें या उधर जायें । आजकल हरियाणा में भी दलबदल चलता रहता है । खासतौर पर इनेलो रूठे लोगों को मनाने में लगी है । अभी बड़े चौटाला कुरूक्षेत्र में पुराने साथी अशोक अरोड़ा से मिलने पहुंच गये । पहले अभय चौटाला हिसार में उमेद लोहान से मिलने पहुंचे थे और वे इनेलो में आ गये थे -घर वापसी । वैसे वे समय बिताने कांग्रेस में चले गये थे । अब घर लौट आये हैं । दलबदल से नेताओं की बोरियत दूर होती है और अकेलापन भी नहीं रहता । आजकल हमारे पूर्व मंत्री सम्पत सिंह और कंवल सिंह ऐसे ही घर बैठे बोर हो रहे हैं । कुछ न कुछ सोच रहे हैं , पर तोल रहे हैं । पता नहीं कब बड़े चौटाला चाय पीने प्रो सम्पत के घर आ जायें । हालांकि एक बार जब चौ भजन लाल ने चाय प्रोग्राम शुरू किये थे तब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने चुटकी लेते कहा था कि इतनी चाय सेहत के लिए अच्छी नहीं । पर जिस तेजी से ठंड का प्रकोप बढ़ रहा है , उसे देखते लगता है कि यह दलबदल की चाय बहुत तेजी से बनाई और पिलाई जाने लगेगी । इसकी मांग बड़ी तेजी से बढ़ेगी ब्रांड चाहे कोई भी हो ,,
-पूर्व उपाध्यक्ष, हरियाणा ग्रंथ अकादमी ।

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