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कमलेश भारतीय

क्या तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष व पश्चिमी की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कांग्रेस और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की आलोचना कर भाजपा को ऑक्सीजन दे रही हैं ? यह गंभीर बात कही है कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी भाजपा की ऑक्सीजन सप्लायर हो गयी हैं । दूसरी ओर आजकल तृणमूल कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर का कहना है कि पिछले दस सालों में कांग्रेस नब्बे प्रतिशत चुनाव हाल चुकी है । यह आरोप भी लगाया है कि कांग्रेस का नेतृत्व एक विशेष व्यक्ति का दैवीय अधिकार नहीं है । कांग्रेस की ऐसी आलोचना करते वक्त प्रशांत किशोर यह भूल गये कि जिस पार्टी यानी तृणमूल कांग्रेस के लिए रणनीति बना रहे हैं वह पार्टी भी केवल और केवल ममता बनर्जी के दैवीय अधिकार से चल रही है । जब विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी हार गयी थीं तो भी हारी हुई ममता बनर्जी ने किसी दूसरे पर विश्वास न कर खुद ही मुख्यमंत्री पद की शपथ क्यों ली थी ? किसी दूसरे तीसरे नेता को छह माह भी मुख्यमंत्री पद क्यों नहीं दिया ? दूसरों की आलोचना करने से पहले अपने गिरेबान में झांक लेना चाहिए कि नहीं?

इधर कांग्रेस अपनों से भी घिरी रहती है । जब से इसके वरिष्ठ नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नवी राज्यसभा से विदा हुए हैं तब से उनके निशाने पर कांग्रेस ही है न कि भाजपा । देखा जाये ये वरिष्ठ नेता भी भाजपा को ऑक्सीजन सप्लाई करने वालों में शामिल कहे जा सकते हैं । एक साल होने को आया जब इन्होंने ‘जी 23’ यानी विद्रोही ग्रुप का गठन जम्मू में ही किया गुलाबी पगढ़ियां पहना कर । इस ग्रुप के लोगों में कपिल सिब्बल भी लगातार कांग्रेस पर प्रहार करते रहते हैं और इन्हीं में मनीष तिवारी भी शामिल हैं जिनकी किताब चर्चित हो रही है जिसमें मुम्बई के ताज होटल पर आतंकवादियों के हमले को लेकर मनमोहन सरकार की आलोचना की गयी है । असल में गुलाम नवी हों या मनीष तिवारी इन लोगों की टाइमिंग ऐसी है कि जब जब विधानसभा चुनाव आते हैं ये कांग्रेस की आलोचना कर भाजपा को सीधे सीधे फायदा पहुंचाते हैं । अब पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विधानसभा आने वाले हैं और ये नेता अपनी पार्टी की आलोचना को हवा दे रहे हैं । ज़रा देखिए कि गुलाम नवी किस तरह कह रहे हैं कि उन्हें नहीं लगता कि सन् 2024 में भी कांग्रेस को तीन सौ सीटें मिलेंगीं क्योंकि अभी हालात ऐसे नहीं हैं । बताइए जहां गुलाम नवी हों और ऐसे शुभ वचन बोल रहे हैं , वहां भाजपा को ऑक्सीजन न मिलेगी तो क्या मिलेगा ? आखिर कांग्रेस की आलोचना कर और ऐसे निराशाजनक बयान देकर किसकी मदद की जा रही है ?

हर पार्टी अच्छे बुरे दौर से गुजरती है । भाजपा को सन् 1984 में मात्र दो लोकसभा सीटें मिली थीं तो कोई कल्पना कर सकता था कि भाजपा चार सौ पार अपने दम पर हो जायेगी एक चुनाव में ? फिर कांग्रेस कैसे नहीं पार कर सकती तीन सौ का आंकड़ा? पर गुलाम नवी जैसे नेता जब ऐसी मारक बयानबाज़ी करेंगे तब आम जनता इसका विश्वास कैसे करेगी ? क्या गुलाम नवी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मित्रता निभा रहे हैं और यह भी मोदी ने कहा था कि गुलाम नवी को खाली न रहने देंगें तो क्या वे गुप्त एजेंडे पर लगे हैं ? सोचने की बात है । कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए ।
-पूर्व उपाध्यक्ष हरियाणा ग्रंथ अकादमी ।

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