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·       किसान के खेत से लेकर शहर की सड़कें तक सब जलमग्न- हुड्डा

·       5 दिन बाद भी ना किसानों की गिरदावरी हुई ना जल निकासी की व्यवस्था हुई- हुड्डा

·       जरूरत पड़ने पर ना बीमा कंपनी और ना सरकार देती किसानों को मुआवजा- हुड्डा

·       धान और बाजरा किसानों को नहीं मिल रही एमएसपी, खेत व मंडी दोनों जगह किसान पर मार- हुड्डा

29 सितंबरचंडीगढ़ः पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि मौसम के बाद हरियाणा की जनता अब सरकारी अनदेखी की मार झेल रही है। बारिश बंद होने के 5 दिन बाद भी खेतों, सड़कों और रिहायशी इलाकों से जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई। अबतक किसानों को फसलों में हुए नुकसान का मुआवजा भी नहीं दिया गया।

हुड्डा ने कहा है कि खेत में पककर तैयार खड़ी धान, बाजरा, नरमा और सब्जियों की फसल पर बारिश कहर बनकर बरसी। 2 दिनों की बारिश के चलते प्रदेशभर में किसानों की हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो गई। इसके चलते प्रत्येक किसान को हजारों रुपए का नुकसान हुआ। सरकार ने हमेशा की तरह मुआवजा देने का ऐलान तो किया लेकिन किसानों के हाथ हमेशा की तरह इंतजार ही लगा।

इससे पहले भी कई सीजन से किसान लगातार बेमौसमी बारिश, ओलावृष्टि और जलभराव का सामना कर रहे हैं। उसकी वजह से हुए नुकसान का मुआवजा आजतक किसानों को नहीं दिया गया। जरूरत के वक्त किसानों की मदद के लिए ना सरकार आगे आती है और ना ही बीमा कंपनियां। जबकि कंपनियां प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर किसानों के प्रीमियम से करोड़ों की चांदी कूट रही हैं। अबतक इस योजना से बीमा कंपनियां 40,000 करोड़ रुपए का तगड़ा मुनाफा कमा चुकी हैं। लेकिन किसान के हाथ हमेशा घाटा ही लगता है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि किसान को खेत में मौसम और मंडी में सरकारी नीतियों की मार पड़ रही है। 2060 रुपये के रेट वाली धान 1700 से 1800 रुपए प्रति क्विंटल में पिट रही है। यहीं हाल बाजरा के किसानों का है। सरकार ना तो किसानों को एमएसपी दिलवा रही है और ना ही अपनी घोषणा के मुताबिक बाजरा किसानों को भावांतर भरपाई योजना का लाभ दे रही है।

हुड्डा ने आगे कहा कि हर बार की तरह इसबार भी बारिश के बाद गुरुग्राम, फतेहाबाद, भुना, रोहतक, हिसार, कैथल, कुरुक्षेत्र, फरीदाबाद, जींद, झज्जर, सिरसा, अंबाला, यमुनानगर, सोनीपत, पानीपत, महेंद्रगढ़, भिवानी समेत पूरे हरियाणा से जलभराव की भयावह तस्वीरें सामने आईं। सड़कें और गलियां दरिया में बदल गईं और कई शहरों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए। लोगों के घरों से लेकर सरकारी कार्यालयों तक में पानी घुस गया। लेकिन सरकार तमाशबीन बनी सब देखती रही।

बार-बार मांग के बावजूद सरकार ने वक्त रहते ना ड्रेन्स की सफाई करवाई, ना सीवरेज सिस्टम को ठीक किया और ना ही जल निकासी के लिए पंप सेट लगाए। सरकार की इसी कारगुजारी का खामियाजा किसान व आम जनता को भुगतना पड़ा। इसलिए कांग्रेस की मांग है कि अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए सरकार जल्द निकासी की व्यवस्था करे और  स्पेशल गिरदावरी करवा किसानों को उचित मुआवजा दे।

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