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पंचायती चुनाव ने सभी दलों को दिखाया आईना, नहीं लगता समझेंगे जनभावनाओं को

भारत सारथी/ऋषि प्रकाश कौशिक

गुरुग्राम। पंचायती चुनावों ने सभी दलों को आईना दिखा दिया। भाजपा सत्तासीन दल होने के बाद भी 10 जिलों में चुनाव चिन्ह पर नहीं लड़ पाई, केवल 7 जिलों में लड़ी और वहां भी दुर्गति हुई। उसके पश्चात भी बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं कि जिला परिषद की सरकार हम बनाएंगे।

इसी प्रकार आप पार्टी कुछ जिला परिषद की सीटें जीतकर दावा कर रही है कि हरियाणा में आगामी सरकार हमारी होगी।

इसी प्रकार कांग्रेस तो इन सबसे आगे निकली। एक भी सीट पर चुनाव चिन्ह पर चुनाव लडऩे की हिम्मत नहीं जुटा पाई और अब 87 प्रतिशत जनता पर अपना दावा जता रही है।

अत: राजनैतिक दलों की नजर में मतदाताओं की कीमत केवल इतनी है कि उनको अपनी सुविधानुसार इस्तेमाल किया जाए, क्योंकि हर दल उन्हें अपना बता देता है। जैसे सडक़ पर कोई सामान पड़ा हो तो उसके सभी दावेदार बन जाते हैं।

इन चुनावों में जिस प्रकार नए चेहरे अधिक जीतकर आए हैं। वह यह स्पष्ट संदेश दे रहा है कि हरियाणा की राजनीति से विमुख हो रही है। उन्हें न सत्ता पक्ष पर विश्वास है और न ही किसी विपक्ष पर। प्रजातंत्र में आजादी अमृत महोत्सव मे जनता की यह स्थिति शायद संविधान बनाने वाले ऊपर बैठे लोगों को खून के आंसू रूला रही होगी।

वर्तमान में प्रजातंत्र के नाम पर राजतंत्र जैसी व्यवस्था आती नजर आ रही है। किसी एक दल की बात नहीं कर रहे, पूरी राजनीति की बात कर रहे हैं। हर पार्टी में स्थिति यह है कि एक जो प्रमुख है बाकी कार्यकर्ता उसके गुणगान करते नहीं थकते। उनका लक्ष्य अपने शक्तिशाली आका को प्रसन्न करना है, न कि जनभावनाओं को उन पर जनता के हितार्थ काम करना। यह स्थिति आम कार्यकर्ताओं की नहीं अपितु मुख्यमंत्री और मंत्रियों की भी है। ऐसे में जनता राजनीतिज्ञों पर विश्वास कैसे करे।

अब आप देखिए कि जिला परिषद चुनाव में हर दल औंधे मुंह गिरा है लेकिन कोई भी दल सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है। अपितु सभी दल दावा कर रहे हैं कि जनता उनके साथ है। यह अलग बात है कि भाजपा, कांग्रेस, आप सभी में अंदरूनी तौर पर इस हार पर मंथन किया जा रहा है। 

अब गुरुग्राम को ही लें तो यहां जिला परिषद के वार्ड 9 का चुनाव एक प्रकार से जिला पार्षद चेयरमैन का चुनाव था और उसके प्रचार में अंतिम दिन विधायक सत्यप्रकाश जरावता ने प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो के साथ प्रत्याशी मधु सारवान की फोटो लगाकर यह दर्शाया कि प्रधानमंत्री मोदी जी उनके लिए वोट मांग रहे हैं। 

अब आप ही देखिए कि यह स्थिति कितनी दुखद एक जिला परिषद के उम्मीदवार के लिए वोट मांगता है और वह उम्मीदवार हार का मुंह देखता है। चर्चा क्षेत्र में चल रही है कि क्या प्रधानमंत्री का जनाधार नहीं रहा। हरियाणा भाजपा अब 2024 के लोकसभा चुनावों की तैयारी में लगी है और ऐसे में इन चुनावों में यह स्थिति बड़े प्रश्न खड़े करती है 2024 के लिए। 

कांग्रेस की तरफ देखिए कांग्रेस अंदरूनी कलह से पूरी तरह जूझ रही है। ऐसे में भी उनका दावा कि जनता हमारे साथ है, हास्यास्पद ही लगता है। अभी तो कांग्रेस के सामने बड़ा प्रश्न यह खड़ा है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा जब हरियाणा में प्रवेश करेगी तो उसका स्वागत टूटी हुई कांग्रेस करेगी या कोई अजूबा होगा कि कांग्रेस एक हो जाए? अब यह तो समय ही बताएगा कि वे वास्तव में एक होंगे या एक होने का दिखावा करेंगे।

यह बात मैं इसलिए लिख रहा हूं कि राजस्थान में भी सचिन पायलट और अशोक गहलोत जिनके विवाद में गद्दार तक के शब्द प्रयोग हुए, वे भी राहुल गांधी की यात्रा के लिए एक मंच पर आकर प्रेसवार्ता कर गए दिखाने के लिए कि कांग्रेस एक है। ऐसा ही कुछ हरियाणा में भी हो सकता है, जिसकी शुरुआत आज देखने को भी मिली कि भूपेंद्र हुड्डा के साथ कुमारी शैलजा भी उपस्थित थे।

आप पार्टी पंजाब चुनाव के बाद यहां पूरे जोरों-शोरों से सक्रिय हुई थी और दावा था कि आगामी सरकार हमारी होगी परंतु आज तक उनकी पार्टी में यह भी नहीं पता चला कि हरियाणा की कमान किसके हाथ है। जनता में संदेश जा रहा है कि इनकी स्थिति में पहले से कोई सुधार नजर आ नहीं रहा।

उपरोक्त सबकुछ कहने का अर्थ केवल और केवल यह है कि सभी पार्टियां अपने ही दल में अपनों से ही वर्चस्व की लड़ाईयां लड़ रही हैं। जनता की ओर किसी पार्टी का ध्यान नजर आता नहीं। जो पिछले कार्यकालों में हम देखते थे कि जनप्रतिनिधि और विधायक 24 घंटे जनता के लिए उपलब्ध रहते थे। 

वर्तमान में स्थिति यह है कि विधायक सप्ताह में दो घंटे का समय आम जनता के लिए अखबारों में प्रकाशित कर देते हैं तो ऐसी स्थिति में जनता कहां है और उसका महत्व क्या है? यह विचारनीय है।

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