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पंचांयत चुनाव करवाने में डेढ़ साल की देरी……. कांग्रेस ने चुनाव करवाने से खट्टर सरकार को कब रोका ? विद्रोही

समय पर पंचायत चुनाव न करवाने से ग्रामीण विकास का 4500 करोड़ रूपये का बजट लैप्स हो गया। इसकी जवाबदेही भाजपा व मुख्यमंत्री खट्टर की नही तो किसकी है? विद्रोही
पंचायत एक्ट में सरकार ठीक चुनाव से पूर्व ही संशोधन क्यों करती है? ऐसे संशोधन चुनाव के समय से काफी पहले क्यों नही किये जाते? विद्रोही
सरकार की गलत, छोटी व औच्छी सोच के  चलते समय पर हरियाणा पिछडा वर्ग आयोग नही बनाया ताकि पिछडे वर्ग के विभिन्न संवैद्यानिक अधिकारों पर डाका डाला जा सके : विद्रोही
जिस कांग्रेस ने पंचायत राज कानून बनाकर पंचायतों को अधिकार देकर मजबूत किया, वह कांग्रेस की पंचायत चुनावों में रोडा अटकायेगी, यह आरोप ही हास्यास्पद है। विद्रोही

13 अगस्त 2022 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा खट्टर सरकार अपनी छोटी व औच्छी सोच के चलते खुद अपने क्रियाक्लापों से पंचांयत चुनाव करवाने में डेढ़ साल की देरी कर चुकी है और अब समय पर चुनाव न करवाने की अपनी गलतियों का ठीकरा सत्ता दुरूपयोग से कांग्रेस पर फोडने की बेशर्मी भी कर रही है। विद्रोही ने सवाल किया कि कांग्रेस ने समय पर पंचायत चुनाव करवाने से भाजपा खट्टर सरकार को कब रोका? यदि सरकार अपने अविवेकपूर्ण निर्णयों के चलते समय पर पंचायत चुनाव नही करवा पाई तो इसकी जवाबदेही कांग्रेस पर कैसे डाल रही है? समय पर पंचायत चुनाव न करवाने से ग्रामीण विकास का 4500 करोड़ रूपये का बजट लैप्स हो गया। इसकी जवाबदेही भाजपा व मुख्यमंत्री खट्टर की नही तो किसकी है? सवाल उठता है कि पंचायत एक्ट में सरकार ठीक चुनाव से पूर्व ही संशोधन क्यों करती है? ऐसे संशोधन चुनाव के समय से काफी पहले क्यों नही किये जाते? 

विद्रोही ने कहा कि सरकार की गलत, छोटी व औच्छी सोच के  चलते समय पर हरियाणा पिछडा वर्ग आयोग नही बनाया ताकि पिछडे वर्ग के विभिन्न संवैद्यानिक अधिकारों पर डाका डाला जा सके। हरियाणा चुनाव आयोग द्वारा बार-बार चेताने के बाद भी भाजपा खट्टर सरकार ने पंचायत चुनावों में पिछडे वर्ग के आरक्षण को सुनिश्चित करने आवश्यक कानूनी कदम समय पर क्यों नही उठाये? यदि पिछडे व दलित वर्ग के लोग पंचायती राज में अपने हकों के लिए हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट गए तो इसके लिए कांग्रेस कैसे जिम्मेदार है? यदि कांग्रेस से जुडा कोई वकील ऐसे केसों की कोर्ट में पैरवी कर रहा है तो यह उसका व्यक्तिगत व लोकतांत्रिक अधिकार है। कांग्रेस उस व्यक्ति को कैसे रेाक सकती है? विद्रोही ने पूछा कि क्या भाजपा से जुडे वकील हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में विभिन्न मामलों में हरियाणा व केन्द्र की भाजपा सरकार के खिलाफ पैरवी नही करते? कांग्रेस के वकीलों पर सवाल खड़े करने वाली भाजपाई अपने वकीलों को क्यों नही निकालते? कांग्रेस तो पहले ही दिन से समय पर चुनाव करवाने की हिमायती थी ताकि गांव की सरकार गांव के लोगों के हाथों में हो। ग्रामीण विकास के लिए पंचायती संस्थाओं के चुनाव जरूरी है। जिस कांग्रेस ने पंचायत राज कानून बनाकर पंचायतों को अधिकार देकर मजबूत किया, वह कांग्रेस की पंचायत चुनावों में रोडा अटकायेगी, यह आरोप ही हास्यास्पद है। 

विद्रोही ने कहा कि हरियाणा का 56 साल का प्रजांतात्रिक इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने कभी भी अपने सिम्बल पर चुनाव नही लडा है। इसलिए भाजपा सिम्बल पर चुनाव न लडने पर कांग्रेस पर अनर्गल आरोप लगाने से पहले सौ बार विचारना चाहिए। वहीं कांग्रेस ने कब कहा कि भाजपा अपने सिम्बल पर चुनाव न लडे। भाजपा सरपंच, ब्लॉक समिति व जिला परिषद के सदस्यों के चुनाव अपने सिम्बल पर लडकर देख तो ताकि भाजपा को भी पता चल जायेगा कि गांवों में कितनी पानी में है। कांग्रेस तो अपने स्टैंड पर अभी तक कायम है कि पंचायती चुनाव आपसी भाईचारे के चुनाव है जिसमें कांग्रेस हस्तापेक्ष नही करेगी। विद्रोही ने कहा कि कांग्रेस से जुडे कार्यकर्ता, नेता पूर्व की तरह सरपंच, ब्लॉक समिति व जिला परिषदों के चुनावे लड़ेंगे जैसे वे अब तक लड़ते आये है। स्थानीय स्तर कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता अपने-अपने गांव, क्षेत्र  की परिस्थितियों  के अनुसार जिस उम्मीदवार को चाहे मदद करेे, वे स्वतंत्र है। विद्रोही ने सत्तारूढ़ दल भाजपा से आग्रह किया कि पंचायत चुनावों से भागने के लिए कांग्रेस पर व्यर्थ का ठीकरा न फोडे। 

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