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जयराम विद्यापीठ में तीन दशक से भी अधिक समय से गीता की धारा प्रवाह निरंतर बह रही है : ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी

जयराम विद्यापीठ का प्रयास हर बच्चा और युवा गीता को अपने जीवन में उतारे।

वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक

कुरुक्षेत्र, 23 नवम्बर : भगवान श्री कृष्ण के श्री मुख से उत्पन्न हुई पावन श्री गीता के जन्मोत्सव गीता जयंती महोत्सव 2022 के कार्यक्रमों को भव्य स्वरूप प्रदान करने के लिए देशभर में संचालित श्री जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी की अध्यक्षता में श्री जयराम गीता जयंती आयोजन समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई।

परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी के समक्ष विद्यापीठ में होने वाले राज्य स्तरीय अंतर्विद्यालय सांस्कृतिक कार्यक्रम कमेटी प्रमुख राजेंद्र सिंघल ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इस बार सोनीपत, करनाल, कैथल, अम्बाला व पानीपत सहित अन्य जिलों से भी विभिन्न स्कूलों के बच्चे अपनी प्रस्तुतियां देने के लिए उत्साहित हैं। स्कूल संचालक एवं प्रिंसिपल निरंतर जानकारियां ले रहे हैं। सिंघल ने बताया कि 4 हजार से अधिक स्कूली बच्चे प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे।

ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने राज्यभर के स्कूलों का उत्साह देखते हुए अंतर्विद्यालय सांस्कृतिक कार्यक्रम कमेटी के सदस्यों को सलाह कि आगामी वर्ष गीता जयंती के कार्यक्रमों को एक सप्ताह से बढ़ाकर 10 दिन किया जाए एवं साथ ही उत्साही एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गीता पर आधारित प्रतियोगिताओं में अधिक से अधिक मौका दिया जाए। राजेंद्र सिंघल ने बताया कि 28 नवम्बर से 1 दिसम्बर तक विद्यापीठ में राज्य स्तरीय अंतर विद्यालय सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिताएं नए स्वरूप एवं नए अंदाज से आयोजित होंगी। इस बार भजन प्रतियोगिता के साथ शब्द संकीर्तन को भी जोड़ा गया है। इन सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिताओं में विभिन्न जिलों के करीब 80 स्कूलों से 4 हजार से अधिक स्कूली विद्यार्थी अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। यह बच्चे गीता से संबंधित श्लोकोच्चारण, गीता से संबंधित पेंटिंग, आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स, भजन व गीता से संबंधित कोरियोग्राफी इत्यादि विभिन्न कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा दिखाएंगे।

सिंघल ने बताया कि इस बार गीता पर आधारित लिखित परीक्षा भी होगी। जयराम संस्थाओं के मीडिया प्रभारी राजेश सिंगला एवं सदस्य टेक सिंह लौहार माजरा ने इस मौके पर विद्यापीठ में 2 दिसम्बर को होने वाले गरीब परिवारों की कन्याओं के सामूहिक विवाह समारोह की तैयारियों के साथ ही 4 दिसम्बर को जयराम विद्यापीठ से निकलने वाली भव्य शोभा यात्रा की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। शोभायात्रा में शामिल झांकियों, विभिन्न बैंड एवं इस बार विशेष तौर पर शोभायात्रा में आकर्षण का केंद्र रहने वाले सुंदर गीता मंदिर की जानकारी दी गई। 4 दिसम्बर को ही गीता जयंती के अवसर पर शोभायात्रा के उपरांत ब्रह्मसरोवर पर भव्य एवं विशाल दीपदान होगा। इस में हजारों की संख्या में दीप प्रज्वलित कर दीप दान किया जाएगा।

ब्रह्मचारी ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष 28 नवम्बर से 4 दिसम्बर तक संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन होगा, जिसमें कथा व्यास भागवत भास्कर आचार्य श्याम भाई ठाकर पोरबंदर गुजरात वाले होंगे। ब्रह्मचारी ने बताया कि कथा के शुभारंभ से पूर्व कथा स्थल तक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। ब्रह्मचारी ने बताया जयराम विद्यापीठ के संस्थापक व पूज्य प्रात: स्मरणीय ब्रह्मलीन गुरु देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी की प्रेरणा से पिछले करीब चार दशकों से हर वर्ष 2 दिसम्बर को विद्यापीठ में मंदिरों की मूर्तियों का प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया जाता है। इस साल भी 2 दिसम्बर को विद्यापीठ में मंदिरों की मूर्तियों का प्राण प्रतिष्ठा समारोह एवं विधिवत पूजन होगा। 2 दिसम्बर को ही विद्यापीठ में विख्यात कवि सुरेंद्र शर्मा की अध्यक्षता में हास्य कवि सम्मेलन होगा जिसमें देश के अनेकों महान हास्य कवि पहुंचेंगे। ब्रह्मचारी ने बताया कि 26 नवम्बर को गीता जयंती के निर्विघन कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भगवान श्री राम के परम भक्त वीर हनुमान का आह्वान कर ध्वजारोहण होगा।

इस मौके पर बैठक में मौजूद जयराम शिक्षण संस्थान के उपाध्यक्ष एवं सेवानिवृत आयुक्त टी.के. शर्मा, सुरेंद्र गुप्ता, के.के. कौशिक एडवोकेट, ईश्वर गुप्ता, डी.के. गुप्ता, खरैती, डा. नरेंद्र पाल सिंह गुप्ता, कुलवंत सैनी, टेक सिंह, डा. के. सी. रल्हन, राजेश सिंगला, के. सी. रंगा, सुनील गर्ग, आचार्य सोमनाथ गौतम, सुनील गौरी, विनोद कुमार, सुशील कंसल इत्यादि की विद्यापीठ के गीता जयंती कार्यक्रमों के लिए ड्यूटियां लगाई गई एवं जिम्मेवारियां निर्धारित की गई। ब्रह्मचारी ने विद्यापीठ के गीता पर आधारित कार्यक्रमों बारे कहा कि गीता जयंती पर गीता बच्चों एवं युवाओं के माध्यम से हर घर तक पहुंचनी चाहिए। साथ ही युवा एवं बच्चे गीता को अपने जीवन में उतारें .तभी गीता जयंती पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम सार्थक होंगे। उन्होंने कहा कि उनके पूज्य गुरु ब्रह्मलीन देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी की प्रेरणा से तीन दशकों से भी अधिक समय से जयराम विद्यापीठ में गीता की धारा प्रवाह निरंतर हो रही बह रही है।

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