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कमलेश भारतीय

काग्रेस चिंतन शिविर शुरू और कुछ प्रस्ताव बाहर । यानी एक परिवार , एक टिकट , महिलाओं की एक तिहाई भागादारी , पेंशनभोगी मानसिकता वाले नेताओं से मुक्ति , कांग्रेस अध्यक्ष गांधी परिवार से बाहर और जनांदोलन की परंपरा फिर से शुरू की जाये, संघ परिवार बनाम गांधी परिवार पर बहस ।

अब ये बिंदु हैं विचार के लिए । कांग्रेस बिन गांधी परिवार ? गांधी परिवार पर ही छोड़ दी बात । फिर कैसा प्रस्ताव ? यानी बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे ? पेंशनभोगी मानसिकता वाले नेताओं से छुटकारा । यानी जी 23 समूह के नेताओं का क्या करना है ? इन्हें भाजपा की तरह मार्गदर्शक की भूमिका में रखना है ? महिलाओं की भागीदारी की बात । मैं लड़की हूं , लड़ सकती हूं के नारे ने कोई करिश्मा नहीं दिखाया उत्तर प्रदेश के चुनाव में । फिर भी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए , सिर्फ शोभा के लिए नहीं , संघर्ष के लिए । एक परिवार , एक टिकट में भी पेंच यह है कि यदि पांच साल से पार्टी में सक्रिय है तो टिकट का हकदार है । इस नियम से प्रियंका गांधी भी पार है तो अशोक गहलोत का बेटा वैभव भी । सब पार । कोई झंझट नहीं । वैतरणी पार । कितने नेताओं के परिवारों को छूट । पहले यह नियम कर लिया होता तो बृजेंद्र सिंह कांग्रेस में होते, राव इंद्रजीत भी कांग्रेस में रह जाते आरती राव के लिए , निर्मल सिंह भी न जाते । कितने लोग रह जाते ।

बड़ी बात कि जनांदोलन की परंपरा को फिर से जगाये रखने की बात । काग्रेस नेता अब आरामपरस्त हो चुके हैं । एसी के बाहर तो चर्चा भी नहीं करते , मंथन शिविर भी नहीं करते तो आंदोलन कड़ी धूप में कैसे करने सड़क पर उतरें ? रसोई गैस का मूल्य ही इतना बड़ा मुद्दा है , इसके लिए भी कोई आगे नहीं आ रहा । कभी स्मृति ईरानी ने पांच रुपये मात्र बढ़ने पर बीच सड़क बैठ कर विरोध किया था और चूड़ियां भेजी थीं मनमोहन सिंह को । अब तो एक हजार रुपये पार हो गया रसोई गैस सिलेंडर और कहां हो स्मृति ईरानी जी ? चलिए वे तो सत्ता सुख भोग रही हैं । प्रियंका गांधी जी आप कहां हैं ? कीजिए जनांदोलन की शुरूआत । वरिष्ठ कांग्रेसजनों से उनके अनुभव का फायदा उठाने का समय है तो युवाओं को काम पर लगाने, जिम्मेदारी सौंपने और दिशा देने की जरूरत है । ये काम जितनी जल्दी हो जायें तो कांग्रेस का भला हो जाये । फिर भी चिंतन और नव संकल्प शिविर में अभी दो दिन और हैं । नयी बातें आएंगी और विचार करेंगे ।

छोड़ो कल की बातें
कल की बात पुरानी
नयी सिरे से लिखोगे क्या
कांग्रेस की कहानी ?
-पूर्व उपाध्यक्ष, हरियाणा ग्रंथ अकादमी ।

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