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अहीरवाल के सभी वे नेता जयचंद, जो अपने निजी स्वार्थो की पूर्ति के लिए कपडों की तरह दल व विचार बदलते है : विद्रोही

जब तक अहीरवाल में ऐसे जयचंद रहेंगे, इस क्षेत्र के साथ विकास व अन्य मामलों में यूंहि राजनीतिक भेदभाव होता रहेगा : विद्रोही 

18 अगस्त 2022 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष एवं हरियाणा प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि आज अहीरवाल को सरकारी संस्थानों में उसके हिस्से का जो धन नही मिल रहा है और विकास के नाम पर जो भेदभाव हो रहा है और पिछडे बाहुल्य इस क्षेत्र के ओबीसी वर्ग के सुनियोजित ढंग से संवैद्यानिक अधिकारों पर चोट की जा रही है, वे सभी जयचंदों की वजहों से ही हो रहा है। विद्रोही ने कहा कि अहीरवाल के सभी वे नेता जयचंद है जो अपने निजी स्वार्थो की पूर्ति के लिए कपडों की तरह दल व विचार बदलते है। अहीरवाल के सबसे बड़े दुश्मन वही नेता है तो जिस दल की भी राजनीतिक हवा नजर आती है, उसमें शामिल होकर इलाके के साथ धोखा करके अपने निजी हित साधते आये है। जब तक अहीरवाल में ऐसे जयचंद रहेंगे, इस क्षेत्र के साथ विकास व अन्य मामलों में यूंहि राजनीतिक भेदभाव होता रहेगा। 

विद्रोही ने कहा कि राजनीति में वैचारिक व सैंद्धातिक मतभेद स्वभाविक है और इन मतभेदों के कारण दल व विचार भी बदले जाने स्वभाविक राजनीतिक प्रक्रिया है। लेकिन अहीरवाल के नेता वर्षो से बेपंदे के लौटे की तरह केवल कुर्सी के लिए इधर-उधर लुढक़ते रहते है। कहने को अहीरवाल के विकास व लोगों की पैरवी करने वाले अलम्बरदार बनने का ढोंग करते है, लेकिन वास्तव में इन अवसरवादी, सिंद्धाहीन, कुर्सी के भूखेे नेताओं का एकमात्र मकसद अपना व अपने परिवार का हित करना है।

विद्रोही ने अहीरवाल के लोगों से आग्रह किया कि यदि वे विकास, सरकारी संसाधनों में समान हक चाहते है और अहीरवाल से की जाने वाली भेदभाव की राजनीति के कुचक्र का अंत करना चाहते है तो सबसे पहले वे बेपंदी के लौटे की तरह इधर-उधर लुढकने वाले, केवल कुर्सी के लिए तडप रहे दल-बदल करने वाले इन अवसरवादी नेताओं को पहले घर बैठाये, तभी उनका व इस क्षेत्र का भला हो सकता है। 

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